रांची। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने यूपीए नेताओं से संवैधानिक संस्थाओं को निष्पक्ष काम करने देने को कहा है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन के नेता संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा रखें। उन्हें निष्पक्ष काम करने दें। उन्होंने कहा कि झारखंड में मुख्यमंत्री से जुड़े मामले में चुनाव आयोग या राज्यपाल की भूमिका पर जबरन सवाल उठा कर निष्पक्ष संस्थाओं को घेरने का काम किया जा रहा है। बेहतर होता कि महागठबंधन के नेता पहले आयोग के फैसले का विधिवत इंतजार करते। फैसला आने के पूर्व ही संस्थाओं को कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। महागठबंधन के लोग बतायें कि चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री को पक्ष रखने का हर मौका दिया या नहीं। कई बार सुनवाई टाली गयी। मामले में जानबूझ कर देरी की गयी। अब वही लोग राजभवन, चुनाव आयोग पर फैसला जल्दी देने का दबाव डाल रहे हैं। बाबूलाल मरांडी के मुताबिक बीमारी से लेकर तमाम तरह के बहाने बनाकर संवैधानिक संस्थाओं से बार-बार समय सीएम मांगते रहे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अब इतनी जल्दबाजी है कि चुनाव आयोग, राज्यपाल तक पर निर्णय तुरंत करने का दवाब बना रहे हैं। बाबूलाल ने कहा कि अभी ऐसा लगता है कि सीएम को अपने विधायकों पर विश्वास नहीं है। इनसे साथ के विधायक दो दिन भी नहीं संभल रहे। गौरतलब है कि सत्ताधारी दल के मंत्रियों और विधायकों ने राज्यपाल की भूमिका पर रविवार को सवाल उठाये थे। सीएम हाउस में प्रेस कांफ्रेंस कर मंत्री बन्ना गुप्ता, चंपई सोरेन, सत्यानंद भोक्ता, विधायक स्टीफन मरांडी समेत कई विधायकों ने राज्यपाल से जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की थी। बन्ना ने कहा था कि लिफाफे में जो भी निर्णय हैं, उसे सार्वजनिक करना चाहिए। राज्यपाल द्वारा निर्वाचन आयोग के लिफाफे में क्या है, इसका खुलासा अभी तक नहीं किया जा रहा है। सत्तारूढ़ दलों के विधायक और मंत्री, निर्वाचन आयोग की तरफ से भेजे गये संदेश को जानना चाह रहे हैं। लिफाफा नहीं खुलने की वजह से राज्य में राजनीतिक ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। सरकार का कामकाज रूका हुआ है। अटकलों का बाजार भी गर्म है।
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