31 जुलाई को झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजीव कुमार को कोलकाता पुलिस ने 50 लाख की नकगी के साथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद बात सामने आयी की कोलकाता का एक व्यवसायी अमित अग्रवाल के द्वारा की गयी एक एफआईआर पर कोलकाता पुलिस ने अधिवक्ता राजीव को गिरफ्तार किया। एफआईआर में कहा गया है कि केस नंबर 4290/2021 को मैनेज करने के लिए अधिवक्ता राजीव कुमार 10 करोड़ रुपये की डिमांड कर रहे थे। काफी बातचीत के बाद सौदा एक करोड़ में तय हुआ। जिसकी दो किस्तों में डिलिवरी होनी थी। पहली किस्त 50 लाख रुपये लेने के लिए राजीव कुमार कोलकाता पहुंचे। जिसे लेने के बाद कोलकाता पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि एफआईआर में जिस केस नंबर कर जिक्र किया गया है उस केस में अमित अग्रवाल पार्टी ही नही हैं।

जानकारी के अनुसार 4290/2021 पीआईएल नंबर में राज्य के मुख्य सचिव, इनकम टैक्स, सीबीआई, ईडी, हेमंत सोरेन, बसंत सोरेन, रवि केजरीवाल और रजिस्ट्रार आॅफ कंपनी को पार्टी बनाया गया है। जिसमें कहीं भी अमित अग्रवाल के नाम का जिक्र ही नही है।

तो अब सवाल यह उठता है कि अमित अग्रवाल ने यह एफआईआर दर्ज क्यों करायी। क्यों कि एफआईआर में कहा गया है कि केस नंबर 4290/2021 को मैनेज करने के लिए अधिवक्ता राजीव कुमार, अमित अग्रवाल से पैसे की मांग कर रहे थें।

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