रांची। रांची के कांके रोड स्थित रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज (रिनपास) में लंबे समय से स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं होने का मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामले की प्रमुख बातें
- रिनपास में वर्ष 2007 से स्थायी निदेशक की नियुक्ति नहीं होने का दावा किया गया है।
- फिलहाल संस्थान का संचालन प्रभारी निदेशक के माध्यम से किया जा रहा है।
- जनहित याचिका उत्तम कुमार की ओर से दाखिल की गई है।
- मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
- हाईकोर्ट ने सरकार को 11 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
- मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
प्रभारी निदेशक की व्यवस्था पर सवाल
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने अदालत में पक्ष रखा। याचिका में कहा गया कि करीब 19 वर्षों से रिनपास में स्थायी निदेशक नहीं है और संस्थान का कामकाज प्रभारी निदेशक के भरोसे चल रहा है।
याचिका में प्रभारी निदेशक को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रार्थी का कहना है कि प्रभारी निदेशक पर आरोप होने के बावजूद उन्हें संस्थान की जिम्मेदारी दी गई है। याचिका में इस व्यवस्था को संस्थान के प्रशासनिक हित में उचित नहीं बताया गया है।
एक तिहाई कर्मचारी अस्थायी होने का दावा
याचिकाकर्ता ने संस्थान में कर्मचारियों की स्थिति का भी मुद्दा उठाया है। याचिका के अनुसार, रिनपास में करीब एक-तिहाई कर्मचारी अस्थायी हैं और इन्हीं के माध्यम से संस्थान का कामकाज संचालित किया जा रहा है।
याचिका में स्थायी निदेशक की लंबे समय से अनुपस्थिति और बड़ी संख्या में अस्थायी कर्मचारियों के सहारे संस्थान के संचालन को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।
सरकार से स्थायी निदेशक नियुक्त करने की मांग
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से राज्य सरकार को रिनपास में स्थायी निदेशक की नियुक्ति के लिए आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से स्थायी निदेशक नहीं होने से संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
11 सितंबर तक देना होगा जवाब
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए 11 सितंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। सरकार के जवाब के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। अब इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।



