पलामू। जिला में नक्सल प्रभावी पांडू थाना क्षेत्र के तिसिबार में मॉब लिंचिंग के मामले में पुलिस ने शुक्रवार सुबह जिला परिषद सदस्य और मुखिया समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस गिरफ्तार सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है। घटना के बाद गांव में 200 से अधिक पुलिस जवानों को तैनात किया गया है। गांव और उसके आसपास के इलाके में सुरक्षा का घेरा तैयार किया गया है।

दो दर्जन लोगों पर दो अलग-अलग प्राथमिकी : मॉब लिंचिंग के मामले में तिसिबार के मुखिया समेत दो दर्जन लोगों पर हत्या और पुलिस पर हमला करने के आरोप में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गयी है। पलामू एसपी इंद्रजीत महथा समेत वरीय पुलिस अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं। एसपी इंद्रजीत महथा ने बताया कि मॉब लिंचिंग के सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है, पुलिस मामले में अलर्ट मोड पर है। मॉब लिंचिंग में मारे गये बबलू मुशहर के शव का पोस्टमार्टम हो गया है। शव को बिहार स्थित उसके पैतृक घर पर भेजा जायेगा। वहीं घायल विकास और गुड्डू को पुलिस की ओर से सुरक्षा मुहैया करायी गयी है।

शादी के लिए लड़की देखने आये थे सभी : गौरतलब है कि बिहार का गुड्डू मुशहर अपने रिश्तेदारों के साथ शादी के लिए तिसिबार में लल्लू मुशहर के घर लड़की देखने आया था। इस दौरान बुधवार रात सभी लिंचिंग के शिकार हो गये। घटना में बबलू मुशहर की मौत हो गयी, जबकि गुड्डू और विकास गंभीर रूप से जख्मी हो गये थे। इससे पहले मंगलवार की रात तिसिबार के कालेश्वर साव के घर में चोरी हुई थी। चोरों ने कालेश्वर साव, उनकी पत्नी और पोता को जख्मी कर दिया था।

क्या है पुलिसिया जांच में: पुलिस की जांच में यह बात सामने आयी है कि लल्लू के घर से अफवाह फैली कि उनके घर में आये मेहमानों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है। अफवाह फैलने के बाद पूरा गांव जमा हो गया और सभी को पकड़ कर गांव के मंदिर के पास लाया गया। मंदिर के पास तीनों की पिटाई भी की गयी। इसके बाद भीड़ आक्रामक हो गयी। भीड़ के हमले में एक युवक मारा गया।
मॉब लिंचिंग में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा

एक हफ्ते में दिशा-निर्देश लागू करें नहीं तो गृह सचिव की पेशी होगी: सीप्रीम कोर्ट
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग पर रिपोर्ट पेश नहीं करने वाले राज्यों को शुक्रवार को फटकार लगायी। अब इसके लिए उन्हें एक हफ्ते का वक्त और दिया गया है। दरअसल, शीर्ष अदालत ने 17 जुलाई को मॉब लिंचिंग पर कुछ दिशा-निर्देश जारी किये थे। इन्हें लागू करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी तक 16 राज्यों ने रिपोर्ट पेश की है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि अगर रिपोर्ट पेश नहीं की गयी, तो संबंधित राज्यों के गृह सचिव को खुद अदालत में उपस्थिति देनी होगी।

वेबसाइट पर डालने होंगे निर्देश: कोर्ट ने कहा कि समाज में शांति-सद्भाव हर हाल में बनाये रखना होगा। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर मॉब लिंचिंग के खिलाफ दिशा-निर्देश जारी करने को कहा। मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस: ऐसे मामलों की जांच में एसपी नोडल अफसर होंगे। तत्काल एफआइआर हो। फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चले। अधिकतम सजा हो। पीड़ित को चोट के मुताबिक मुआवजा मिले।

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