धनंजय कुमार
हुसैनाबाद। पांच दिनों तक पेंशन की खातिर बैंक का दरवाजा खटखटाते आखिर रामजीत राम इस तरह हारे कि उन्होंने दुनिया ही छोड़ दी। स्टेट बैंक आॅफ इंडिया ने रामजीत को पेंशन तो नहीं ही दी, जान जरूर ले ली। भारतीय स्टेट बैंक हुसैनाबाद की मुख्य शाखा में शुक्रवार को बैंक कर्मियों की मनमानी, कैश काउंटर की कमी का खामियाजा रामजीत को बैंक में अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
हैदरनगर थाना क्षेत्र के सिंघना गांव निवासी 64 वर्षीय रामजीत राम शुक्रवार को भारतीय स्टेट बैंक के अपने खाता से वृद्धा पेंशन की रकम निकालने के लिए अपने परिजन के साथ आये थे, लेकिन बैंक में ग्राहकों की भीड़ और उमस के कारण वह बेहोश होकर गिर पड़े। परिजनों ने उन्हें उठा कर कुर्सी पर बिठाया। पर कुछ ही देर में रामजीत ने दम तोड़ दिया। बैंक कर्मियों ने रामजीत को पिछले कुछ दिनों में केवाइसी कराने के नाम पर पांच बार लौटाया था। शुक्रवार को एक बार फिर रामजीत पैसा निकालने बैंक पहुंचे थे, लेकिन पैसा तो नहीं मिला, पर जान जरूर चली गयी।

छह काउंटर में से तीन हमेशा बंद रहते हैंं
भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में ग्राहकों के लिए छह काउंटर जमा निकासी के लिए बनाये गये हैं, लेकिन बैंक कर्मियों की मनमानी के कारण तीन काउंटर हमेशा बंद रहते हैं। इस कारण खाताधारकों को हमेशा काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। आलम यह है कि अगर किसी खाताधारक को 500 रुपये भी निकालना हो, तो उन्हें पूरे दिन बैंक में ही गुजर जाता है।

बुजुर्गों को पेंशन निकालने में होती है भारी परेशानी
भारतीय स्टेट बैंक हुसैनाबाद के मुख्य ब्रांच में वृद्धा पेंशन के हजारों खाताधारक हैं। ये हर महीने वृद्धा पेंशन की राशि निकालने बैंक पहुचते हैं। बैंक में वृद्ध नागरिक सेवा केंद्र नहीं होने के कारण 60 से 90 वर्ष के वृद्ध के लिए पेंशन की राशि निकालना टेढ़ी खीर है। बैंक परिसर मे खड़े कई बुजुर्गों ने बताया कि एसबीआइ की शाखा से वृद्धा पेंशन की राशि निकालना हम लोगों के लिए भगवान से भेंट करने जैसा है।

बैंक कर्मियों की उदासीनता से परेशान रहते हैं खाताधारक
शुक्रवार को एसबीआइ में हुई रामजीत राम की मौत के बाद मौजूद खाताधारकों ने बताया कि बैंक कर्मियों द्वारा खाताधारकों को कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं करायी जाती है। बैंक में शुद्ध पेयजल, शौचालय, पंखा की सुविधा उपलब्ध नहीं है। बैंक के कर्मचारी खाताधारकों को तरजीह नहीं देते हैं। ग्राहकों ने बताया कि ब्रांच मैनेजर से भी कई बार इसकी शिकायत की गयी है, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकला।

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