रांची। मिशन 2019 के मद्देनजर भले ही सत्तारूढ़ बीजेपी के खेमे में सक्रियता तेजी से बढ़ती जा रही है, लेकिन प्रदेश में विपक्षी एकता को लेकर अभी तक कोई खास पहल नहीं दिख रही है। वैसे तो राज्य के सभी विपक्षी दल ‘महागठबंधन’ को अटूट बता रहे हैं, लेकिन अंदरखाने उनकी एकता ‘कॉमन प्लेटफार्म’ पर नहीं देखने को मिल रही है।
संघर्ष यात्रा से झामुमो ने कर दिया शंखनाद
एक ओर राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने संघर्ष यात्रा के साथ अपनी तैयारियों का शंखनाद कर दिया है, वहीं कांग्रेस के खेमे में भी बैठकों का दौर जारी है। जबकि झाविमो और राजद भी अपने-अपने स्तर से तैयारियों में जुटे हैं। हैरत की बात यह है कि इन सबके बीच महागठबंधन को लेकर विपक्षी दलों के नेता किसी खास नतीजे पर नहीं पहुंच पाये हैं। ज्यादातर विपक्षी दल अब भी सिर्फ सरकार की खामियां ढूंढ़ने और स्थानीय स्तर पर छिटपुट आंदोलनों में ही जुटे हैं।
सींटों के बंटवारे पर एनडीए में प्रक्रिया अंतिम चरण में
भाजपा केंद्र और राज्य स्तर पर सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत काफी पहले ही शुरू कर चुकी है। कहा जा रहा है कि सीट बंटवारे की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बीजेपी ने पिछले कुछ हफ्ते में न केवल स्टेट एग्जीक्यूटिव की बैठक की, बल्कि पार्टी के सात मोर्चों की बैठक की, जिसमें कार्यकर्ताओं को बूथ की मजबूती को लेकर टिप्स भी दिये गये।
वहीं महागठबंधन के खेमे में ऐसी कोई सुगबुगाहट अभी तक नहीं हो रही है। दरअसल विपक्षी दल बर्रे के छत्ते में हाथ डालने से बच रहे हैं। उन्हें भी पता है कि सीटों का बंटवारा उनके लिए आसान नहीं होगा। इसलिए इसे लेकर विपक्ष की ओर से कोई बयानबाजी नहीं हो रही। साथ ही समय-समय पर प्रमुख विपक्षी दल सभी 81 सीटों पर चुनाव लड़Þने की तैयारी की बात दुहराते रहे हैं। चाहे वह कांग्रेस हो या झारखंड मुक्ति मोर्चा। यह बात जरूर है कि विपक्षी दलों में झारखंड मुक्ति मोर्चा चुनाव की तैयारी में सबसे आगे है।
सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर फंस रहा है पेंच
दरअसल, तय फार्मूले के हिसाब से आम चुनाव में कांग्रेस बड़े शेयर होल्डर के रूप में रहेगी और राज्य में प्रमुख विपक्षी दल होने के नाते झारखंड मुक्ति मोर्चा दूसरे स्थान पर रहेगा। इसके बाद झाविमो, वाम दल और फिर राजद का नंबर आता है। कांग्रेस कम से कम आठ लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने के मूड में है। वहीं, झामुमो चार सीटों पर, जबकि फिलहाल झामुमो का दो सीट पर कब्जा भी है। उसके बाद झाविमो, वाम दल और फिर राजद हैं। ऐसे में कुल 14 लोकसभा सीट में से बची दो सीट में इन्हें कैसे बांटना होगा, यह समस्या सामने आ रही है। ऐसे में कथित रूप से कांग्रेस और झामुमो को मिलकर कोई रास्ता निकालना होगा। यही वजह है कि झामुमो अपनी संथाल की दो सीटिंग सीटों के अलावे अन्य इलाकों में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है। गुरुवार को झामुमो ने कोल्हान में अपनी संघर्ष यात्रा की शुरूआत की है। वहीं दूसरी तरफ झाविमो कोडरमा और चतरा में एक्टिव है। साथ ही राजद ने भी चतरा और पलामू में अपनी गतिविधियां बढ़ा रखी हैं।
क्या कहते हैं विपक्षी दलों के नेता
कांग्रेस: पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय के अनुसार महागठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश पिछले ढाई साल से की जा रही है और यह इंटैक्ट भी है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन को लेकर झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की तरफ से पहल होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इसके लिए उन्हें सभी बिंदुओं पर चर्चा कर कोई रास्ता निकालना चाहिए।

झाविमो: झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि निश्चित रूप से सबों को मिलकर सक्रियता बढ़ानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महागठबंधन में कांग्रेस, झामुमो, जेवीएम और राजद समेत अन्य दल हैं। ऐसे में कांग्रेस और झामुमो की तरफ से गंभीरता से शुरुआत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जल्द ही पहल करने की जरूरत है, क्योंकि समय बहुत कम है, छह महीने के भीतर चुनाव लड़ना होगा।

राजद: वहीं, राजद के प्रवक्ता मनोज कुमार ने कहा कि राजद पूरे दमखम के साथ चुनाव की तैयारी में लगा है। प्रदेश अध्यक्ष अन्नपूर्णा देवी के नेतृत्व में चतरा और पलामू में कार्यकर्ता सम्मेलन होना है। जब चुनाव आ जायेगा तब सारे लोग एकजुट हो जायेंगे।

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