रांची। झारखंड में नियुक्त प्रारंभिक शिक्षकों की सेवा संपुष्टि पांच साल बाद भी नहीं हो सकी है। इससे ये सभी शिक्षक काफी परेशान हैं। उनकी नियुक्ति 2015-16 में राज्य के प्रारंभिक स्कूलों में की गयी थी। लगभग 16,000 शिक्षकों की नियुक्ति हुई है, लेकिन नौकरी लगने के पांच साल बीत जाने के बाद भी आधे से अधिक शिक्षकों की सेवा संपुष्टि नहीं हो पायी है। क्लास एक से पांच और छह से आठ की कक्षाओं के लिए इनकी नियुक्ति हुई थी। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के सफल उम्मीदवारों को उनकी मेरिट के आधार पर प्रारंभिक स्कूलों में नियुक्त किया गया था।
जिला स्तर पर मामला लंबित
संबंधित जिला को शिक्षकों की नियुक्ति होने के दो साल के भीतर उनके सर्टिफिकेट की जांच करा कर सेवा संपुष्टि करने का प्रावधान है, पर राज्य के अधिकांश जिले ऐसा नहीं कर पाये हैं। लगभग 15 से 16 हजार शिक्षकों में केवल दो हजार शिक्षकों की सेवा ही संपुष्ट हो पायी है। जिलों की बात करें, तो लातेहार, लोहरदगा और गिरिडीह को छोड़ कर किसी भी जिला में शिक्षकों की सेवा संपुष्ट नहीं हो पायी है।
कई जिला में अब भी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन नहीं हुआ
गढ़वा, चतरा, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा जिला में किसी भी शिक्षकों की सेवा संपुष्टि नहीं हो सकी है। इसके अलावा हजारीबाग, रामगढ़, कोडरमा, बोकारो, रांची, जामताड़ा और साहेबगंज में भी बहुत कम शिक्षकों की सेवा संपुष्टि हुई है, जबकि पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सराकेला-खरसावां, धनबाद और देवघर में 50 फीसदी शिक्षकों की सेवा संपुष्ट हो पायी है। इस संबंध में झारखंड प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष आनंद किशोर साहू ने बताया कि प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से कई बार सभी जिला को पत्र लिख कर सेवा संपुष्टि की प्रक्रिया को पूरा करने को कहा जा चुका है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने तो जिला शिक्षा अधीक्षकों का वेतन रोकने तक की बात कही थी। इसके बावजूद भी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन नहीं कराया गया है।
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