गढ़वा। मंगलवार को गढ़वा में मंईयां सम्मान यात्रा के दौरान कल्पना सोरेन मंच से महिलाओं से पूछा कि आप इस मंईयां सम्मान योजना से खुश हैं या नहीं। महिलाओं का जवाब सुनने के बाद उन्होंने कहा कि झारखंड में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना हिट है। जब झारखंड की दीदी बहनों ने इसे हिट कर दिया है, तो हमारे विपक्ष को वैसे ही जवाब मिल गया है कि उनकी पिक्चर फ्लॉप है। दीदी बहनों को महीने का हजार रुपया, साल का 12 हजार रुपया देने के लिए मुख्यमंत्री जी को बहुत धन्यवाद देना चाहती हूं। महिलाओं को किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना होगा। ये क्रांतिकारी सोच है। झारखंड बने इतने साल हो गये, लेकिन किसी ने इस तरह की योजना के बारे में सोचा नहीं था। घर कैसे चलाना है ये महिलाओं के अलावा कोई नहीं जानता है। आपको आर्थिक रूप से मजबूत करने का यह प्रयास है, ताकि आपको छोटी से छोटी जरूरत के लिए किसी के सामने झुकने की जरूरत ना हो।
मजदूरों के बारे में केंद्र नहीं सुनता कोई बात
आपने देखा होगा कि 2019 में जब कोरोना आया था, तो हमारा जीवन अस्त-व्यस्त हो गया था। हमारे मजदूर भाई बाहर में फंसे हुए थे। उन्हें किसी ने बस से, ट्रेन से और हवाई जहाज से लाये हैं तो वो हेमंत सोरेन जी हैं। गरीब गुरबा की आवाज बन कर झारखंड मुक्ति मोर्चा आगे बढ़ा है। झारखंड में आप देख रहे हैं कि बहुत सारे नेता केंद्र से आ रहे हैं। उसमें मजदूर भाइयों के लिए बात करने वाला कोई नहीं है। मजदूर भाइयों का रैंकिंग सबसे नीचे आता है। मजदूरों के साथ हमेशा भेदभाव किया गया है। मनरेगा के मजदूरों खासकर महिलाओं से उनकी शारीरिक शक्ति के हिसाब से काम नहीं लिया जाता था। हेमंत जी केंद्र से हमेशा यही मांगते थे कि मनरेगा का जितना पैसा है, हम लोगों को दिया जाये। लेकिन केंद्र के कान में जूं भी नहीं रेंगती है। जब गरीब, शोषित वंचित की बात आती है, तो ये लोग सुनते नहीं हैं। उसके बाद हेमंत जी ने हमारे राज्य के मनरेगा मजदूरों के लिए पैसा बढ़ाया। हेमंत सोरेन जी हर वर्ग को साथ में लेकर चलते हैं। कल्पना सोरेन ने कहा कि झारखंड में रोज अलग-अलग नेता केंद्र से आ रहे हैं। अलग-अलग राज्य से मुख्यमंत्री आ रहे हैं। केंद्रीय मंत्री आ रहे हैं। मेरा सवाल आपसे बस ये हैं कि जो व्यक्ति दिन रात आपके बारे में सोचता है ,उसके साथ आप हैं या नहीं।
मंईयां सम्मान को लेकर पीआइएल दाखिल की गयी
आगे कल्पना सोरेन ने कहा कि ये हजार रुपया की बात नहीं है। पांच महीना हेमंत सोरेन जी का कौन लाकर देगा। जनता को इस बार जवाब देना है। बहुत लोग आपको बरगलाने के लिए आयेंगे। कहेंगे कि ये योजना केंद्र की तरफ से चल रही है। लेकिन आपको दिग्भ्रमित नहीं होना है। झारखंड के खनिज पर केंद्र की नजर रहती है। हेमंत जी ने 1 लाख छत्तीस हजार करोड़ केंद्र से मांगा है, लेकिन अभी तक पैसा नहीं मिला है। अगर ये पैसा मिल जाता, तो हमारे झारखंड का जो विकास है, इससे कई गुणा तेजी से होता। ये मंईयां सम्मान योजना हमने जब शुरूआत की तो इनके लोगों ने पीआइएल कर दी। मैं पूछना चाहती हूं कि जब झारखंड में ऐसी योजना चलती है, तो पीआइएल क्यों दाखिल हो जाती है। यही योजना जब भाजपा शासित राज्यों में लागू होती है, तो संवैधानिक हो जाती है।