खबर विशेष में हम बात कर रहे हैं झारखंड मुक्ति मोर्चा की बदलाव रैली की। झारखंड मुक्ति मोर्चा की बदलाव रैली शनिवार को हरमू मैदान में हुई। इस रैली ने राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। रैली के बाद तमाम दलों की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। वहीं, इस रैली के बाद झामुमो उत्साहित हो गया है और चुनावी श्ांखनाद कर दी है। रैली को झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन, कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन समेत अन्य वरीय नेताओं ने संबोधित किया। अरसे बाद गुरुजी झामुमो के ऐसे किसी बड़े मंच पर दिखे। रैली के पूर्व जिला मुख्यालयों में झामुमो ने रैलियां की थीं। रैली के लिए पूर्व में मोरहाबादी मैदान निर्धारित था, लेकिन जिला प्रशासन से स्वीकृति नहीं मिलने के कारण स्थान बदलना पड़ा। झामुमो ने इसके लिए जिला प्रशासन को निशाने पर लिया था। कहा गया कि सत्तापक्ष के इशारे पर महारैली के प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। वहीं, प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया था कि मैदान की पूर्व से ही बुकिंग थी। दरअसल देखा जाये, तो इस रैली को लेकर झामुमो समेत तमाम दलों में बेचैनी थी। झामुमो की चिंता रैली की सफलता को लेकर थी, तो भाजपा की चिंता इसमें जुटनेवाली भीड़ और इसमें होनेवाले शक्ति प्रदर्शन को लेकर थी। वहीं आजसू पार्टी यह आकलन करने में जुटी थी कि झामुमो उसके वोट बैंक क्षेत्र में सेंधमारी तो नहीं कर रहा। इधर, विपक्ष के तमाम दल यह अंदाजा लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि रैली की सफलता को लेकर झामुमो महागठबंधन में किस तरह अपना दबाव बढ़ा सकता है। प्रशासन भी इस रैली को लेकर सशंकित था कि कितनी भीड़ होगी, किस तरह के लोग आयेंगे, विधि व्यवस्था को लेकर कोई परेशानी उत्पन्न न हो जाये, अािद..आदि। पेश है रैली के नफा-नुकसान को लेकर बदलते-बिगड़ते समीकरण पर आजाद सिपाही पॉलिटिकल ब्यूरो की रिपोर्ट।

झारखंड में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर करीब-करीब सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को सरजमीं पर उतारने में लगे हुए हैं। इसी क्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी भारतीय जनता पार्टी की तर्ज पर हर घर तक पहुंचने का इरादा बनाया है। इसके लेकर हर जिले में रैलियों का आयोजन किया गया। फिर कार्यकर्ताओं को साइकिल थमा कर गांव-गांव भेजा गया। कोशिश यही थी कि बदलाव रैली में भारी भीड़ जुटायी जाये। झामुमो के कार्यकर्ता ‘बदलाव अभियान’ (परिवर्तन) के तहत गांव-गांव, घर-घर जाकर सरकार की नाकामियों के बारे में बताते रहे। इस अभियान की साइकिल भी खास तरह से डिजाइन की गयी थी। साइकिल ‘आॅडियो सिस्टम’ से लैस है, जिसके जरिये झामुमो के संदेशों को जनता के बीच प्रचारित किया गया। यह सारी कवायद बस इसलिए थी कि रैली को जबरदस्त तरीके से सफल बनाया जा सके। ये सारी तैयारियां झामुमो की रैली से जुड़ी चिंताएं दर्शा रही थीं कि पार्टी इसे लेकर कितनी बेचैन है। इसके आधार पर ही महागठबंधन में पार्टी को खुद को स्थापित करना था। हेमंत को गठबंधन का नेता बनाना था। इसे लेकर पार्टी ने गुरुजी को मैदान में उतारा।

आजसू का झामुमो पर हमला
झामुमो और आजसू के बीच की प्रतिस्पर्द्धा किसी से छुपी नहीं है। दरअसल आजसू ऐसा महसूस करता है कि झामुमो उसके क्षेत्र में सेंधमारी कर रहा है। झारखंड में कुरमी-महतो की एक पट्टी सी बनी हुई है, जो कोल्हान से लेकर बोकारो, गिरिडीह होते हुए संथाल को छूती है। पिछले कई वर्षों में आजसू ने बड़ी मेहनत से इस पर अपनी पकड़ बनायी है। झामुमो बार-बार इस पकड़ को दरकाने की कोशिश कर रहा है, ताकि कोल्हान से संथाल तक उसका दबदबा कायम हो जाये। यही कारण है कि दोनों एक-दूसरे पर काफी हमलावर रहते हैं। बदलाव रैली से ठीक पहले आजसू पार्टी ने हमला करते हुए झामुमो पर सवालों की झड़ी लगा दी। आजसू ने कहा है कि शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन ने इस राज्य में 27 महीने सरकार चलायी। झामुमो बताये कि अपने शासनकाल में झामुमो ने आदिवासी-मूलवासी के हक-अधिकार के लिए क्या किया है। आजसू पार्टी के महासचिव राजेंद्र मेहता के हवाले से कहा गया है कि झामुमो बताये कि सीएम रहते हेमंत सोरेन ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के प्रस्ताव पर सहमति दी थी या नहीं।

सरकार से जनता की नाराजगी दिखा गयी रैली : कांग्रेस
वहीं महागठबंधन में शामिल झामुमो के साथी कांग्रेस ने रैली को सफल बताते हुए इसे सरकार के प्रति जनता की नाराजगी का प्रतिफल बताया। कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष इरफान अंसारी ने पूछे जाने पर कहा कि यह रैली सिर्फ झामुमो की सफलता नहीं बताती, बल्कि यह बताती है कि जनता डबल इंजन की इस सरकार से किस कदर नाराज है। यह लोगों का आक्रोश था, जो सड़क पर उतरा। कहा कि कांग्रेस की जनाक्रोश रैली में भी इसी वजह से भीड़ उमड़ रही है। पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस की जनाक्रोश रैली में भी भारी भीड़ उमड़ रही है। झामुमो की रैली से कांग्रेस की बेचैनी नहीं बढ़ेगी, बल्कि भाजपा और सरकार की चिंता बढ़नेवाली है। चुनाव सिर पर है। सभी पार्टियां अपना कार्यक्रम कर रही हैं। महागठबंधन इससे और मजबूत ही होगा। सिर्फ यही नहीं, झामुमो, झाविमो और कांग्रेस की रैलियों की सफलता हमारे लिए टॉनिक का काम करेगी।

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