अजय शर्मा
रांची। झारखंड कैडर की एक महिला आइपीएस अधिकारी इन दिनों चर्चा में हैं। जया राय जब जामताड़ा की एसपी थीं, उस दौरान एक हजार और पांच सौ के नोट चलन से हटा दिये गये थे। एसपी ने पूरे जिलों के थानों में जो भी नोट बरामद किये गये थे, उन सभी को बदलवाने का आदेश दिया था। क्रमवार करीब 38 लाख रुपये अलग-अलग थाना के थानेदारों ने बदल दिया था। सभी रकम एसपी के सरकारी एकाउंट में जमा कराये गये थे। अब इसे साक्ष्य मिटाने के रूप में देखा जा रहा है। जामताड़ा साइबर अपराधियों का गढ़ है। अधिकांश रकम इन अपराधियों के पास से ही बरामद किये गये थे। अब इसका लाभ अपराधियों को मिल रहा है और क्रमवार वे सभी जेल से बाहर निकल आये हैं। अब पुलिस मुख्यालय के अधिकारी इस पूरे मामले को लेकर माथापच्ची कर रहे हैं। न्यायालय कुछ भी मानने को तैयार नहीं है।
क्या है आरोप
जब कभी भी किसी अपराधी के पास से कुछ भी वस्तु, हथियार, नगदी बरामद किया जाता है, तो उसे कोई बदल नहीं सकता। इसमें अगर छेड़छाड़ हुई, तो इसे साक्ष्य मिटाने के रूप में देखा जाता है। जामताड़ा में तो हर थाने में साइबर अपराधियों के साक्ष्य मिटा दिये गये हैं। पुराने नोट के बदले अधिकारियों ने नया नोट जमा करा दिया है।
क्या कहती हैं जया राय
इस मामले पर जया राय कहती हैं कि जो कुछ हुआ होगा, नियम के अनुसार ही हुआ होगा। ऐसे मुझे इस पूरे मामले में सही-सही कुछ भी जानकारी याद नहीं है।
डीआइजी कहते हैं
दुमका के डीआइजी राजकुमार लकड़ा कहते हैं, इस पर तुरंत मैं कुछ नहीं कहूंगा। मुझे कुछ याद भी नहीं है।
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