रांची। बिहार विधानसभा चुनाव का झारखंड की सियासत पर असर दिखने लगा है। झारखंड की सत्ता में हिस्सेदार राजद द्वारा बिहार में एक भी सीट नहीं दिये जाने पर झामुमो लाल हो गया है। पार्टी महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसे ‘मक्कारी’ करार देते हुए बिहार की सात सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। मंगलवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि झाझा, चकाई, कटोरिया, धमदाहा, मनिहारी, पीरपैंती और नाथनगर में झामुमो अपना उम्मीदवार उतारेगा। झामुमो ने पहले 12 सीटों पर दावा किया था, पर राजद ने एक भी सीट देने से इंकार कर दिया।
सुप्रियो ने कहा कि वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि नीतीश के डीएनए में खोट है। ऐसे में कुछ तो गड़बड़ी है। यह कैसी स्थिति है, जिसमेें जदयू के खिलाफ लोजपा चुनाव लड़ेगी और गठबंधन एक रहेगा। कमोबेश यही स्थिति राजद की है। राजद नेता राजनीतिक शिष्टाचार भूल गये हैं। झारखंड में 2019 के विधानसभा चुनाव में राजद की राजनीतिक हैसियत न रहते हुए भी हमने उन्हें बहुत ज्यादा तरजीह दी। हमने उनके एक उम्मीदवार को मंत्री बनाया। हम चाहते थे कि जो घर अंधेरा है, उसमें कम से कम दीया जले। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो के केंद्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन की आदत रही है कि वे बुरे दिनों के साथियों का साथ नहीं छोड़ते। पर राजद के नेता अच्छे दिन आने का सपना देख रहे हैं और इसी में मर्यादा भूल जा रहे हैं। हम राजद सुप्रीमो लालू यादव का आदर करते हैं और आगे भी करेंगे, पर उन्हें बताना चाहिए कि बिहार में सामाजिक न्याय और राजनीतिक भागीदारी की बातें कहां गयीं। अब झामुमो ही केवल त्याग नहीं करेगा। हम भी राजनीति करना सीख गये हैं। बिहार में हम अपने संगठन के साथ संपर्क में हैं। हमें किसी की कृपा की जरूरत नहीं है। उन्हें 144 सीटें मुबारक हों। अभी तक हमने इंतजार किया था, पर अब हम पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अब बिहार में राजद के साथ हमारा गठबंधन नहीं होगा। हम तीर-कमानवाले लोग हैं। जिस प्रकार एक बार तीर कमान से निकल जाता है, तो वापस नहीं आता, वैसे ही अब हम बिहार में राजद के साथ नहीं जायेंगे।

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