रांची। झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक चिट्ठी का इंतजार बेसब्री से हो रहा है। इस चिट्ठी की प्रतीक्षा ना सिर्फ सत्तापक्ष और विपक्षी नेताओं को है, बल्कि आम लोगों की भी इसको लेकर उत्सुकता भी लगातार बढ़ती जा रही है। मामला सीएम हेमंत सोरेन के आॅफिस आॅफ प्रॉफिट से जुड़े केस से सम्बंधित है। 18 अगस्त को सुनवाई होने के बाद भारत निर्वाचन आयोग की ओर से अपनी परामर्शी चिट्ठी दिल्ली से राजभवन रांची भेजी जा चुकी है। इसपर राज्यपाल ने अबतक अपना मंतव्य नहीं भेजा है। राज्यपाल रमेश बैस ने चिट्ठी के संबंध में चुटकी लेते हुए बीते दिनों एक कार्यक्रम में कहा कि लिफाफा चिपक गया है, खुल नहीं रहा। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि या भारत में पहली ऐसी घटना है जिसमें सीएम चुनाव आयोग और राज्यपाल के दरवाजे पर जाते हैं। उनसे हाथ जोड़कर पूछते हैं कि उनकी सजा क्या है। उनकी सजा के बारे में उन्हें बताया जाए। सीएम के इस बयान के बाद भाजपा और झामुमो में जुबानी जंग जारी है। इसी बीच निर्दलीय विधायक सरयू राय ने ट्वीट कर बंद लिफाफे के संबंध में कहा कि राजभवन में रखा लिफाफा बंद नहीं है। वह तो कब का खुल चुका है। ऐसा नहीं कि मजमून से हेमंत सोरेन अनभिज्ञ हैं। उनकी फोनटेपिया मशीनरी के पास प्रासंगिक वातार्लाप का रिकॉर्ड पहले दिन से है। दोनों खेमों से आए दिन हो रही बयानबाजी जगे को जगाने की कोशिश जैसी है। रहस्य बेपर्द होना चाहिए।
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