रांची। रांची में रावण दहन की तैयारी तेज है। बारिश के मौसम को देखते हुए ऐसा रावण तैयार किया जा रहा है, जो वाटर प्रूफ है। रावण दहन में वृहद कार्यक्रम का भी आयोजन होगा। पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से रांची के मोरहाबादी में रावण दहन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। बारिश को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की तैयारी भी इसी आधार पर की जा रही है। 5 अक्तूबर को दशहरा के मौके पर रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले का दहन होगा।

मुख्यमंत्री होंगे मुख्य अतिथि
मोरहाबादी में आयोजित होनेवाले रावण दहन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि होंगे। वह ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले को तीर मार कर जलायेंगे। मौसम बारिश का है, इसके बावजूद हर साल की तरह इस साल भी भव्य आतिशबाजी का कार्यक्रम रखा गया है।

मुस्लिम कारीगर पूरी मेहनत से तैयार करते हैं पुतला
इन तैयारियों को लेकर उत्साह भी इसलिए ज्यादा है, क्योंकि कोरोना संक्रमण के दो साल बाद वृहद कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस साल रांची के मोरहाबादी मैदान में 74वां दहशरा मनाया जायेगा। हर वर्ष की तरह इस बार भी पंजाबी-हिंदू बिरादरी रावण दहन की तैयारी कर रही है। 25 साल से रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले को मुस्लिम कारीकर तैयार करते हैं। कुल 17 कारीगर इसे तैयार करते हैं, जिसमें 12 कारीगर मुस्लिम हैं।
बढ़ी रावण की ऊंचाई, कई रंगारंग कार्यक्रम का भी होगा आयोजन
इस बार रावण दहन के कार्यक्रम में सिल्ली का पाइका, जमशेदपुर का छऊ नृत्य और आतिशबाजी होगी। इसकी तैयारी भी लंबे समय से की जा रही है। इसके अलावा भी कई रंगारंग कार्यक्रम होंगे। रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले की ऊंचाई बढ़ायी गयी है। रावण 70, कुंभकरण 65 और मेघनाथ की ऊंचाई 60 फीट होगी। इसके साथ ही इस बार लंका भी बनायी जायेगी, जो 30/30 फीट की है।

1952 में पहली बार हुआ था रावण दहन
रांची के मोरहाबादी मैदान में पहली बार 1952 में रावण दहन हुआ था। 1952 में फिरोजपुर पंजाब के स्व अमीर चंद फतीजा ने 10 फीट का पुतला बना कर इसकी शुरूआत की थी। इसके बाद से हर साल इसी तरह वृहद आयोजन के जरिये यह आयोजन किया जा रहा है। कोरोना संक्रमण के दौरान इस पर रोक लगी थी, लेकिन एक बार फिर उत्साह के साथ इसकी शुरूआत हो गयी है।

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