मुरी | अभी उसकी उम्र ही क्या थी! मात्र तेरह साल! खाने, खेलने और पढ़ने के दिन ही तो थे उसके। वह पढ़ भी रहा था। स्कूल से पढ़ कर ही तो वह घर लौटा था। स्कूली कपड़े भी वह नहीं खोल पाया था। अमूमन स्कूल से घर आने पर बच्चे खाने और खेलने की बात ही सोचते हैं और जाहिर है, वह भी यही सोच रहा होगा। लेकिन उसे क्या पता था कि जिस क्षण वह अपने स्कूली कपड़े उतार रहा है, वह उसका अंतिम क्षण होगा। अचानक कोई हैवान आया और उसने उस हंसते-खेलते बच्चे का गला दबा दिया। देखते ही देखते उसके प्राण पखेरू उड़ गये। विडंबना देखिये कि जिस मां ने अपनी ममता की छांव में उसे जन्म दिया, पाल-पोस रही थी, अंतिम क्षणों में वह उस मां का दर्शन भी नहीं कर पाया। उससे भी बड़ी विडंबना देखिये कि गला दबा कर हत्या होने के बाद भी पुलिस हत्यारे को नहीं खोज रही है। वह हाथ पर हाथ धरे बैठी है। शायद इसलिए कि वह सामान्य परिवार का था। उसके परिवार की पहुंच किसी राजनेता या बड़े अधिकारी तक नहीं है। ऐसे में पुलिस भला हत्यारे तक पहुंचने की जहमत क्यों उठायेगी। परिवार के लोग हत्या के आठ दिन बाद भी खून के आंसू रो रहे हैं। मां की ममता कलप रही है। आस-पड़ोस और परिचित लोग हर दिन इस उम्मीद में समय काट रहे हैं कि शायद आज पुलिस हत्यारे तक पहुंच जाये। लेकिन यह आज उस परिवार के लिए नहीं आ रहा है। परिवार के लिए हर दिन पहाड़ सा कट रहा है। उनकी आंखों से आंसू नहीं थम रहे। आंखें पथरा सी गयी हैं। न्याय पाने की आस में हर पल-पल उस परिवार की जिंदगी बोझ सी हो गयी है।
यह कोई फिल्मी कहानी है, बल्कि मुरी ओपी क्षेत्र के बड़ा मुरी महतो टोली परिवार के साथ घटी एक हृदयविदारक घटना है। रांची से लगभग साठ किलोमीटर दूर मुरी ओपी क्षेत्र के बड़ा मुरी महतो टोली में घटी उस घटना ने मुरी ओपी पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा पर बड़ा सवाल पैदा कर दिया है। परिवार के साथ ही पड़ोसियों का भी विश्वास मुरी ओपी पुलिस पर से उठने लगा है। उन्हें समझ में नहीं आता कि आखिर पुलिस हत्यारे तक पहुंचने की कोशिश क्यों नहीं कर रही! क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठ गयी है!
21 अक्तूबर को घटना है। बड़ा मुरी महतो टोली का 13 वर्षीय कुंदन आरटीसी स्कूल में छठी कक्षा का छात्र था। दोपहर करीब दो बजे का समय रहा होगा। हर दिन की भांति कुंदन स्कूल से अपनी साइकिल से घर लौटा था। उस समय उसकी मां रीना देवी सिगपुर नर्सिंग होम में अपनी ड्यूटी पर गयी थीं। वहां वह नर्स का काम करती हैं। कुंदन के पिता रोजी-रोटी की जुगाड़ में अजमेर शरीफ में काम करते हैं। उनकी दो बेटियां भी बाहर रह कर पढ़ाई कर रही हैं। उस दिन घर में कोई नहीं था। हर दिन की तरह कुंदन अपनी साइकिल को बाहर रख कर घर का दरवाजा खोला। घर के अंदर जाकर उसने दरवाजा बंद कर दिया। वह अपना कपड़ा खोल ही रहा था कि हत्यारा घर के अंदर प्रवेश कर गया और उसने कुंदन का गला दबा दिया। कुंदन के प्राण पखेरू उड़ गये। अपराधी भाग निकला। हत्यारे ने तीन से चार बजे के बीच इस घटना को अंजाम दिया। जब परिवार के लोग घर लौटे, तो उन्होंने कुंदन को आवाज लगायी। जब कुंदन ने कोई आवाज नहीं दी, तो घर के लोग सीढ़ी लगा कर चहारदीवारी को फांद कर घर के अंदर गये। कुंदन खटिया पर बेसुध पड़ा था। लोगों ने कुंदन की मां रीना देवी को फोन किया। वह सिगपुर नर्सिंग होम से घर आयी और आनन-फानन में रोते-बिलखते कुंदन को लेकर नर्सिंग होम पहुंची। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि कुंदन अब इस दुनिया में नहीं है। कुंदन के गले पर हाथ के अंगूठे के निशान पाये गये। इससे स्पष्ट है कि किसी ने गला दबा कर उसकी हत्या कर दी थी। उसके बाद कुंदन की मां ने मुरी ओपी पुलिस को सूचना दी। पुलिस आयी, उसने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद कुंदन के शव को परिजनों को सौंप दिया। घटना के सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस की जांच हत्या की दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पायी है।
बुधवार को यह संवाददाता कुंदन के घर पहुंचा था। मां रीना देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। बातचीत में यह तथ्य सामने आया कि घर के लोगों के साथ जमीन का विवाद वर्षों से चल रहा है। आज तक जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है। पुलिस की खामोशी और कुंदन के साथ घटी घटना को याद करके कुंदन की बहनें भी भयभीत हैं कि कहीं हत्यारे का अगला निशाना वे नहीं बन जायें। जिनसे इस परिवार का जमीन विवाद चल रहा है, उनके बयान भी संदेहास्पद हैं। कुंदन की दादी का बयान संदेह को जन्म दे रहा है। आस-पड़ोस के लोगों की जुबान से हत्या की ही बात सामने आ रही है, जबकि पुलिस के हाथ अब तक हत्यारे तक नहीं पहुंच पाये हैं। कुंदन की हत्या के बाद यह परिवार टूट सा गया है। अब तो यह उम्मीद ही की जा सकती है कि मुरी ओपी पुलिस के हाथ हत्यारे तक पहुंचेंगे। यह इसलिए भी जरूरी है कि हत्यारे के हाथ रीना देवी की किसी और संतान के गले तक नहीं पहुंचें। यह तभी संभव है, जब पुलिस अपने कर्तव्य का पालन करेगी और कुंदन की मां रीना देवी को न्याय दिलवायेगी। वरना यह हत्या एक अबूझ पहेली ही बन कर रह जायेगी।
पुलिस से न्याय की उम्मीद लगाये बैठी है छात्र कुंदन की मां
एक हफ्ता बीत गया, पुलिस का एक्शन नजर नहीं आता | मुरी महतो टोली से स्वरूप भट्टाचार्य