• मां के दर्शन कर निहाल हो रहे भक्त

आजाद सिपाही संवाददाता
रांची। शारदीय नवरात्र षष्ठी को बेलबरन पूजन के साथ दुर्गोत्सव का रंग और भी गहरा गया। राजधानी के ज्यादातर पूजा पंडालों के पट शनिवार की शाम आम भक्तों के लिए खोल दिये गये। सात्विक जनों को अभय देने वाली महिषासुर मर्दिनी का दिव्य स्वरूप साकार हो उठा। लगा मानो जग में उजियारा हो गया हो। भक्तों की अंखियां निहाल हो गयी हों। दर्शन को उमड़े भक्तों ने जयकारा लगा आशीष मांगा, मंगल कामनाएं की तो मां के हाथों के रक्ताभ वृत्त से आशीर्वचनों का तेज सभी के शरीर में प्रविष्ट हो गया। महामाया सहित अन्य देवी-देवताओं की जिन प्रतिमाओं में कलाकारों ने जान डालने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उनमें तेज का संचार होता प्रतीत हुआ। ऐतिहासिक और कलात्मक कलाकारी का बेजोड़ नमूना पेश करती प्रतिमाएं और सार्थक जीवन का संदेश देते मनोहक एक से बढ़ कर एक पूजा पंडाल जहां दर्शनार्थियों को देर रात तक आकर्षित करते रहे, वहीं भक्ति गीतों से गुंजायमान वातावरण में मनोहारी विद्युत सज्जा का खूबसूरत नजारा मन मोहता रहा। अब विजयदशमी तक कुछ ऐसा ही भक्ति, उमंग और उल्लास का आलम चहुंओर छाया रहेगा। भक्त जहां मां का दर्शन-पूजन कर आशीष मांगेंगे वहीं भक्ति के मेले का भी जमकर लुफ्त उठायेंगे।

लुभा रहा संदेश देता पूजा पंडाल
शनिवार की शाम पट खुलते ही मां के दर्शन को तांता सा लग गया। लोग कभी पंडाल की भव्यता तो कभी आभा बिखेरती मां सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को अपलक निहारते रहे। मानव जीवन की सार्थकाा को प्रदर्शित करते शहर के पूजा पंडाल सभी का मन मोहते रहे। प्रकृति संरक्षण के साथ सेफ लाइफ तक का संदेश मिल रहा। बच्चों के आउटडोर खेल को लेकर भी सजग किया जा रहा।

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