वहीं कार्मिक ने शुरू की अपनी कार्यवाही
रांची। मंजूनाथ भजंत्री को रांची डीसी बनाये जाने के बाद से मामले ने तूल पकड़ लिया है। आयोग का कहना है कि भजंत्री को चुनाव के दौरान डीसी बनाया जाना हाइकोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। वहीं चुनाव आयोग की सरकार को चिट्ठी के बाद मंजूनाथ भजंत्री सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने इस बात की जानकारी सरकार को चिट्ठी लिख कर दी है। मंजूनाथ ने कहा कि किसी को भी हाइकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाने का पूरा अधिकार है।
कार्मिक ने शुरू की अपनी कार्यवाही
इधर सरकार की तरफ से कार्मिक विभाग ने अपनी कार्यवाही शुरू कर दी है। कार्मिक विभाग की तरफ से मुख्य सचिव को मामले से संबंधी सभी कागजात भेजा जा चुका है। आने वाले दिनों में संभवत: मुख्य सचिव या कार्मिक की तरफ से चुनाव आयोग को मामले से जुड़ी कार्यवाही के बारे में जानकारी दी जाये। कार्मिक की तरफ से मुख्य सचिव को भेजी गयी फाइल में यह भी कहा गया है कि मामले पर सरकार अपनी तरफ से निर्णय ले।
क्या था पूरा मामला
चुनाव आयोग की तरफ से मधुपुर उपचुनाव में तत्कालीन देवघर डीसी द्वारा आयोग के वोटर टर्न आउट एप और प्रेस कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग आंकड़ा पेश किये जाने की वजह से उन्हें 26 अप्रैल 2021 को उपायुक्त के पद से हटा दिया गया था। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद सरकार ने उन्हें फिर से देवघर डीसी के पद पर स्थापित करने का आदेश दिया था। इसके करीब छह महीने बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आयोग को रिपोर्ट भेज कर यह जानकारी दी कि डीसी ने चुनाव आचार संहिता खत्म होने के बाद आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ एक ही दिन छह प्राथमिकी दर्ज की है।
आयोग ने इस पर उपायुक्त से स्पष्टीकरण पूछा। जवाब संतोषप्रद नहीं होने की वजह से 6 दिसंबर 2021 को आयोग ने उपायुक्त को हटाने और भविष्य में आयोग की अनुमति के बिना चुनाव से जुड़े काम में पदस्थापित नहीं करने का आदेश दिया। 23 दिसंबर 2021 को कार्मिक विभाग की ओर से आयोग को एक पत्र लिख कर कहा गया कि आयोग अपना आदेश वापस ले, क्योंकि आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस तरह का आदेश देने का अधिकार आयोग को नहीं है। इस तरह के आदेश से राज्य की संप्रभुता प्रभावित होती है।