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कुछ सीटों पर पार्टी बदल कर चुनाव मैदान में उतरे हैं पुराने प्रतिद्वंद्वी
कई सीटें ऐसी हैं, जिन पर 2019 में बेहद करीबी हुआ था मुकाबला
नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के छठे संस्करण के लिए दो चरणों में होनेवाले चुनावों के मुकाबले की तस्वीर लगभग साफ हो गयी है। राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा के बाद नामांकन दाखिल करने का काम भी तेजी से चल रहा है। 13 नवंबर को होनेवाले पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन भरने का काम अगले 24 घंटे में पूरा हो जायेगा, जबकि 20 नवंबर को होनेवाले दूसरे चरण के मतदान के लिए नामांकन दाखिल करने का काम चल रहा है। झारखंड विधानसभा का यह चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचक होनेवाला है, क्योंकि इस बार अधिकांश सीटों पर मुकाबला सीधा होने के आसार हैं। मुकाबले में एक तरफ सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन के घटक दल हैं, जिनमें झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा माले शामिल हैं। दूसरी तरफ विपक्षी एनडीए है, जिसमें भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा-आर शामिल हैं। इस चुनाव मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बनाने के लिए कई दूसरे दल भी मैदान में उतरे हैं, लेकिन कुछेक को छोड़ कर उनकी मौजूदगी का कोई खास असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है। इसके साथ ही इस चुनाव की सबसे खास बात यह है कि विधानसभा की करीब दो दर्जन सीटों पर मुकाबला पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच ही होगा, हालांकि कई सीटों पर उन चेहरों ने नयी पार्टी का दामन थाम लिया है। पुराने प्रतिद्वंद्वियों के एक बार फिर मुकाबले में उतरने के कारण ये विधानसभा सीट चर्चित हो गये हैं। क्या है इन दो दर्जन सीटों का चुनावी परिदृश्य और मुकाबले की तस्वीर, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।
झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर मुकाबले की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती जा रही है। राजनीतिक दल सीट शेयरिंग के बाद प्रत्याशियों के चयन का काम पूरी कर चुके हैं। सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन और विपक्षी एनडीए के घटक दलों की तरफ से प्रत्याशियों की सूची भी जारी की जा चुकी है। राज्य की 81 विधानसभा सीटों के लिए दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को मतदान होगा। पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन भरने का काम अगले कुछ घंटे में खत्म हो जायेगा, जबकि दूसरे चरण के मतदान के लिए नामांकन दाखिल करने का काम अभी चल रहा है और यह 29 अक्टूबर को खत्म होगा। चुनावी गहमा-गहमी के बीच अब मुकाबले की जो तस्वीर सामने आ रही है, उससे साफ हो गया है कि राज्य में करीब दो दर्जन ऐसी सीटें हैं, जिन पर इस बार भी 2019 जैसा ही मुकाबला होगा, क्योंकि इन सीटों पर पुराने प्रतिद्वंद्वी ही एक बार फिर मैदान में उतरे हैं। हालांकि इन दो दर्जन सीटों में से कई पर प्रतिद्वंद्वी तो पुराने हैं, लेकिन उन्होंने इस बार दल बदल लिये हैं और वे नये चुनाव चिह्न के साथ मैदान में हैं। 2019 में इनमें से कई सीटों पर मुकाबला काफी करीबी हुआ था। इसलिए इस बार बाजी किसके हाथ रहेगी, इसका आकलन बेहद मुश्किल है।
रांची में फिर सीपी और महुआ का सामना
बात शुरू करते हैं रांची विधानसभा सीट से। यहां एक बार फिर भाजपा के सीपी सिंह का मुकाबला झामुमो की महुआ माजी से होगा। 2019 में सीपी सिंह ने महुआ माजी को 5904 वोटों के अंतर से हराया था। सीपी सिंह को 79646 और महुआ माजी को 73742 वोट मिले थे।
हटिया में फिर टकरायेंगे नवीन और अजय
राजधानी की दूसरी विधानसभा सीट हटिया में भी एक बार 2019 की कहानी दुहरायी जायेगी। भाजपा के नवीन जायसवाल एक बार फिर कांग्रेस के अजयनाथ शाहदेव से टकरायेंगे। 2019 में नवीन ने अजय को 16264 वोटों के अंतर से हराया था। नवीन को 115431 और अजय को 99167 वोट मिले थे।
खिजरी में राजेश और रामकुमार के बीच टक्कर
राजधानी की तीसरी सीट खिजरी में भी 2019 जैसा मुकाबला ही होगा। यहां कांग्रेस के राजेश कच्छप को चुनौती देने के लिए भाजपा ने एक बार फिर रामकुमार पाहन को उतारा है। पिछली बार राजेश कच्छप ने 83829 वोट लाकर 78307 वोट लानेवाले रामकुमार पाहन को 5469 वोटों के अंतर से मात दी थी।
रामगढ़ में फिर दो देवियों का मुकाबला
इसी तरह रामगढ़ विधानसभा सीट की तस्वीर भी 2019 जैसी ही है। आजसू की सुनीता चौधरी के सामने एक बार फिर कांग्रेस की ममता देवी हैं, जिन्होंने 2019 का मुकाबला 28718 मतों के अंतर से जीता था, लेकिन बाद में अदालती आदेश के कारण उनकी विधायकी चली गयी थी। फिर हुए उप चुनाव में सुनीता चौधरी ने जीत दर्ज की थी।
जमुआ-बरकट्ठा में दल-बदल कर फिर पुराने चेहरे
गिरिडीह जिले की जमुआ विधानसभा सीट से चुनाव में फिर से केदार हाजरा और मंजू कुमारी आमने-सामने हैं। हालांकि इन दोनों ने इस बार पार्टियां बदल ली हैं। भाजपा के टिकट पर पिछला चुनाव 18175 वोटों से जीतने वाले केदार हाजरा इस बार झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं पिछली बार उनको टक्कर देने वाली कांग्रेस की मंजू कुमारी इस बार भाजपा से चुनाव मैदान में उतरी हैं। इसी तरह बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र में भी प्रत्याशी दल बदल कर चुनाव मैदान में हैं। 2019 में निर्दलीय चुनाव जीतने वाले अमित कुमार यादव इस बार भाजपा से चुनाव मैदान में हैं, जबकि पिछला चुनाव भाजपा से लड़ने वाले जानकी यादव इस बार झामुमो के टिकट से चुनाव लड़ रहे हैं।
संथाल समेत इन सीटों पर पुराने चेहरों की टक्कर
झारखंड की सत्ता का प्रवेश द्वार कहे जानेवाले संथाल परगना की अधिकांश विधानसभा सीटों पर भी मुकाबला पुराने चेहरों के बीच ही होगा। हालांकि यहां कई प्रत्याशी नये दलों के साथ मैदान में हैं। जरमुंडी में एक बार फिर कांग्रेस के बादल पत्रलेख का मुकाबला भाजपा के देवेंद्र कुंवर से होगा। झारखंड की आध्यात्मिक राजधानी देवघर में भी मुकाबला भाजपा के नारायण दास और राजद के सुरेश पासवान के बीच होगा, जैसा कि 2019 में हुआ था। गोड्डा सीट पर भी 2019 की तरह भाजपा के अमित मंडल और राजद के संजय प्रसाद यादव के बीच टक्कर होगी, जबकि महगामा में एक बार फिर 2019 की तरह कांग्रेस की दीपिका पांडेय सिंह को भाजपा के अशोक कुमार भगत चुनौती देंगे। इसके अलावा गिरिडीह में झामुमो के सुदिव्य कुमार को भाजपा के निर्भय शाहाबादी फिर चुनौती देंगे, जैसा कि 2019 में हुआ था। झरिया में भी यही सीन है, जहां 2019 की तरह एक बार फिर कांग्रेस की पूर्णिमा नीरज सिंह को भाजपा की रागिनी सिंह चुनौती देंगी। इसके अलावा जिन सीटों पर 2019 की तरह पुराने चेहरों के बीच मुकाबला होगा, उनमें मांडू (जेपी पटेल (कांग्रेस) बनाम आजसू के निर्मल महतो), बड़कागांव (अंबा प्रसाद (कांग्रेस) बनाम भाजपा के रोशनलाल चौधरी), चंदनकियारी (अमर बाउरी (भाजपा) बनाम झामुमो के उमाकांत रजक), निरसा (अर्पणा सेनगुप्ता (भाजपा) बनाम माले के अरूप चटर्जी), इचागढ़ (सविता महतो (झामुमो) बनाम आजसू के हरेलाल महतो), सिमडेगा (भूषण बाड़ा (कांग्रेस) बनाम भाजपा के श्रद्धानंद बेसरा), कोलेबिरा (नमन विक्सल कोंगाड़ी (कांग्रेस) बनाम भाजपा के सुजान जोजो), लोहरदगा (रामेश्वर उरांव (कांग्रेस) बनाम आजसू की नीरू शांति भगत), लातेहार (बैजनाथ राम (झामुमो) बनाम भाजपा के प्रकाश राम), विश्रामपुर (रामचंद्र चंद्रवंशी (भाजपा) बनाम राजद के नरेश प्रसाद सिंह), गढ़वा (मिथिलेश ठाकुर (झामुमो) बनाम भाजपा के सत्येंद्रनाथ तिवारी और भवनाथपुर (भानु प्रताप शाही (भाजपा) बनाम झामुमो के अनंत प्रताप देव) शामिल हैं। करीबी हुआ था मुकाबला इन दो दर्जन सीटों की खास बात यह है कि इनमें से अधिकांश पर जीत का अंतर एक हजार से लेकर सात हजार वोटों का रहा था। यानी इनमें से अधिकांश सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी रहा था। यदि कोई चमत्कार नहीं हुआ, तो ये सीटें इस बार भी चुनाव का रोमांच बढ़ायेंगी।