रांची। राजधानी रांची में ध्वनि प्रदूषण को लेकर कोर्ट के स्वत: संज्ञान एवं रांची शहर में बैंक्वेट हॉल , धर्मशाला, मैरिज हॉल में लाउडस्पीकर एवं डीजे के साथ रात 10:30 बजे के बाद बारात लगने से ध्वनि प्रदूषण रूल का उल्लंघन होने को लेकर दाखिल झारखंड सिविल सोसाइटी की जनहित याचिका की सुनवाई बुधवार को झारखंड हाइकोर्ट में हुई। सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट की खंडपीठ ने रांची में ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाइकोर्ट के 19 सितंबर 2023 के आदेश का सख्ती से अनुपालन करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। हाइकोर्ट की खंडपीठ ने कहा है कि अगर ध्वनि प्रदूषण को लेकर कोई शिकायत करता है, तो उसके नाम का खुलासा न किया जाये, जिससे उसे किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इससे पहले प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ध्वनि प्रदूषण को लेकर कोर्ट ने 19 दिसंबर 2023 को विस्तृत आदेश पारित किया था, लेकिन इसे लेकर राज्य सरकार गंभीर नहीं है।
ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए वर्ष 2019 में गठित टास्क फोर्स कोर्ट के आदेश का सही तरीके से अनुपालन नहीं कर पा रही है। खंडपीठ को यह भी बताया गया कि कई साइलेंट जोन जिनमें सीसीएल के गांधीनगर अस्पताल शामिल है, इसके आसपास अभी भी ध्वनि प्रदूषण हो रहे हैं। जबकि साइलेंट जोन में ध्वनि प्रदूषण नहीं होना चाहिए था। खंडपीठ को प्रार्थी की ओर से यह भी बताया गया कि रांची में ध्वनि प्रदूषण को लेकर शिकायत करने वालों का नाम सार्वजनिक हो जा रहा है, जिससे उन्हें डर का सामना करना पड़ रहा है। खंडपीठ ने मामले में ध्वनि प्रदूषण रोकने को लेकर कोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर उठाये गये कदम के बारे में राज्य सरकार एवं झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर निर्धारित की है।

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