विशेष
कहीं गठबंधनों में पैदा हो गयी है दरार, तो कहीं प्रत्याशी नहीं
नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
चुनाव, यानी लोकतंत्र का महापर्व और यदि चुनाव में सस्पेंस-रोमांच और थ्रिल नहीं हो, तो फिर उस चुनाव का कोई महत्व नहीं रह जाता है। झारखंड, जिसे कभी राजनीति की प्रयोगशाला कहा गया था, में आसन्न विधानसभा चुनाव से पहले सस्पेंस-रोमांच और थ्रिल, तीनों दिखायी दे रहा है। राज्य की 81 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में 13 और 20 नवंबर को वोट डाले जायेंगे। पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन भरने का काम पूरा हो गया है, जबकि दूसरे चरण के लिए नामांकन दाखिल करने का काम 29 नवंबर तक चलेगा। चुनाव प्रक्रिया का यह चरण कितना सस्पेंस भरा है, यह इसी बात से साफ हो जाता है कि राज्य की कम से कम सात ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां या तो दोनों गठबंधनों के घटक दलों के बीच पेंच फंसा है या फिर अब तक यह तय नहीं हो सका है कि वहां के चुनाव मैदान में कौन उतरेगा। सस्पेंस वाली इन सात विधानसभा सीटों में से चार ऐसी हैं, जहां सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन के घटक दलों के बीच विवाद पैदा हो गया है और इसके कारण पूरा चुनावी परिदृश्य बदलता हुआ दिखायी दे रहा है। इन सीटों में विश्रामपुर, छतरपुर, धनवार और जमुआ शामिल हैं। उधर विपक्षी एनडीए में भी टुंडी सीट को लेकर सस्पेंस बरकरार है कि यहां से कौन सा दल अपना प्रत्याशी देगा। इतना ही नहीं, दो सीटें ऐसी हैं, जहां सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन के घटक दल कांग्रेस को प्रत्याशी की घोषणा करनी है। इन सात विधानसभा सीटों पर जारी सस्पेंस के कारण झारखंड विधानसभा का चुनाव बेहद रोचक दौर में पहुंच गया है। क्या है इन सात सीटों का सस्पेंस और क्या हो सकता है इसका असर, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।
आगामी 13 और 20 नवंबर को दो चरणों में होनेवाले झारखंड विधानसभा चुनाव की गहमा-गहमी पूरे उफान पर है। पहले चरण के मतदान के लिए नामांकन दाखिल करने का काम पूरा हो गया है और अब दूसरे चरण के मतदान के लिए प्रत्याशी नामांकन दाखिल कर रहे हैं। यह काम 29 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद चुनाव प्रचार अभियान जोर पकड़ेगा। लेकिन नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही झारखंड विधानसभा का यह चुनाव रोमांचक दौर में पहुंच गया है। इस रोमांच का कारण बनी हैं वे सात विधानसभा सीटें, जहां या तो गठबंधन के घटक दल एक-दूसरे को चुनौती देते हुए अपने-अपने प्रत्याशी उतार दिये हैं या फिर प्रत्याशियों का नाम ही तय नहीं हो पाया है। झारखंड की इन सात विधानसभा सीटों ने इस चुनाव में सस्पेंस, रोमांच और थ्रिल पैदा कर दिया है।
धनबाद: कांग्रेस को नहीं मिल रहा प्रत्याशी
सबसे पहले बात देश की कोयला राजधानी धनबाद की। यह सीट भाजपा का गढ़ रही है। 2014 और 2019 में यहां से भाजपा के राज सिन्हा ने जीत हासिल की थी। इस बार भी भाजपा ने उन्हें ही मैदान में उतारा है। सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन में हुई सीट शेयरिंग के तहत धनबाद सीट कांग्रेस के कोटे में गयी है। लेकिन कांग्रेस ने अब तक यहां से प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। सियासी हलके में अब चर्चा होने लगी है कि कांग्रेस के पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जिसे धनबाद से उतारा जा सके। बताया जा रहा है कि कांग्रेस यहां से किसी अल्पसंख्यक को उतारना चाहती है, लेकिन उसे कोई ऐसा प्रत्याशी नहीं मिल रहा है, जो राज सिन्हा को टक्कर दे सके। लोकसभा चुनाव में भी उसने अंतिम समय में अनुपमा सिंह को धनबाद से उतारा था, जिन्होंने भाजपा के ढुल्लू महतो को टक्कर दी थी।
बोकारो में भी कांग्रेस प्रत्याशी का इंतजार
धनबाद के बाद बोकारो दूसरी ऐसी सीट है, जहां से कांग्रेस को उम्मीदवार देना है, लेकिन उसने अब तक किसी को टिकट नहीं दिया है। शुरूआत में बोकारो से समरेश सिंह की बहू श्वेता सिंह को कांग्रेस का टिकट दिये जाने की चर्चा हुई थी, लेकिन अब यह सीट होल्ड पर है। 2014 और 2019 में यहां से भाजपा के बिरंची नारायण जीते थे। इस बार भी भाजपा ने उन्हें ही मैदान में उतारा है। लेकिन कांग्रेस की तरफ से अब तक प्रत्याशी के नाम की घोषणा नहीं किये जाने के कारण चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ नहीं हुई है।
टुंडी सीट पर भाजपा-आजसू में रस्साकशी
टुंडी तीसरी ऐसी विधानसभा सीट है, जहां से विपक्षी एनडीए का कौन सा दल लड़ेगा और उसका प्रत्याशी कौन होगा, यह अब तक तय नहीं हो सका है। एनडीए के दो बड़े घटक दलों, भाजपा और आजसू के बीच जो सीट शेयरिंग तय हुई थी, उसमें टुंडी सीट पर कोई फैसला नहीं हो सका था। आजसू इस सीट पर दावा ठोक रही थी, लेकिन भाजपा यह सीट छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी। टुंडी से सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन की तरफ से झामुमो के मथुरा महतो प्रत्याशी हैं। उन्होंने 2019 में भी जीत हासिल की थी। आजसू ने टुंडी से अपने सुप्रीमो सुदेश महतो को उतारने की बात कही थी, लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं हुई। ऐसे में अब तक यह तय नहीं है कि टुंडी सीट पर एनडीए का कौन घटक लड़ेगा और उसका प्रत्याशी कौन होगा।
धनवार-जमुआ में झामुमो और माले आमने-सामने
अब बात धनवार और जमुआ विधानसभा सीट की। सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन की सीट शेयरिंग में भाकपा माले को चार सीटें दी गयी थीं। इनमें बगोदर, निरसा, सिंदरी और धनवार सीट शामिल थी। इसके बाद माले ने धनवार से राजकुमार यादव को प्रत्याशी घोषित कर दिया। लेकिन इसके अगले ही दिन इस पर विवाद हो गया और झामुमो ने निजामुद्दीन अंसारी को यहां से प्रत्याशी बना दिया। इससे माले बिफर गया और उसने गठबंधन से अलग होने की धमकी तक दे डाली। पार्टी ने धनवार का बदला जमुआ से लिया, जहां झामुमो ने केदार हाजरा को टिकट दिया, तो माले ने अशोक पासवान को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। माले ने कहा है कि यदि झामुमो ने अपना प्रत्याशी वापस नहीं लिया, तो वह गठबंधन से अलग हो जायेगा। बता दें कि धनवार से भाजपा के प्रत्याशी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी हैं, जबकि जमुआ से उसने मंजू देवी को उतारा है, जो हाल ही में कांग्रेस छोड़ कर उसके पाले में आयी हैं।
विश्रामपुर में राजद और कांग्रेस आमने-सामने
धनवार और जमुआ में एक तरफ जहां झामुमो और भाकपा माले में सामंजस्य नहीं बन पाया है, तो दूसरी ओर पलामू की विश्रामपुर सीट पर इंडी गठबंधन के दो महत्वपूर्ण दल राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार एक-दूसरे से मुकाबला करते नजर आयेंगे। सीट शेयरिंग में विश्रामपुर सीट राजद के कोटे में गयी थी और उसने इस सीट से राम नरेश सिंह को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद कांग्रेस ने सुधीर चंद्रवंशी को उम्मीदवार बना दिया और इसके साथ ही यहां मुकाबला रोचक हो गया। कांग्रेस और राजद ने एक-दूसरे पर समझौता तोड़ने का आरोप लगाया है। विश्रामपुर सीट पर 2014 और 2019 में भाजपा के रामचंद्र चंद्रवंशी जीते थे।
छतरपुर में भी कांग्रेस-राजद की बीच टेंशन
विश्रामपुर सीट पर पैदा हुआ विवाद अभी जोर पकड़ ही रहा था कि पास की छतरपुर सीट पर भी कांग्रेस और राजद के बीच तनाव पैदा हो गया। सीट शेयरिंग में छतरपुर सीट कांग्रेस के कोटे में गयी थी। पार्टी ने कुछ घंटे पहले अपने खेमे में आये राधाकृष्ण किशोर को यहां से उम्मीदवार बना दिया। तब तक विश्रामपुर में विवाद गहरा चुका था, तो राजद ने वहां का बदला छतरपुर में ले लिया और उसकी ओर से विजय राम ने नामांकन दाखिल कर दिया। इस तरह छतरपुर और विश्रामपुर में अब राजद और कांग्रेस दोनों दलों के उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस ने कहा है कि सीट शेयरिंग के तहत राष्ट्रीय जनता दल को पांच सीटें ही मिली थीं, लेकिन उसने मनमानी करते हुए छह सीटों पर उम्मीदवार दे दिया है। उधर राजद ने कहा है कि कांग्रेस ने छतरपुर सीट से उम्मीदवार देकर समझौता तोड़ा है।