रांची। गोमिया प्रखंड के लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोमगढ़ में आयोजित दो दिवसीय 18वां अंतरराष्ट्रीय संथाली महाधर्म सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार को यहां पहुंचे मुख्यमंत्री रघुवर दास स्थानीय लोगों के साथ संथाली धुन पर थिरके और उनका उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि पिछले 70 साल में आदिवासी जीवनशैली में कोई बदलाव नहीं आया। इसके लिए पूर्व की सरकारें जिम्मेदार रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान में आदिवासी समाज को प्रदत्त विशेष दर्जा देने के प्रावधान को ध्यान में रख कर, आदिवासी कल्याण के कार्य किये जा रहें हैं। इससे उनकी जिंदगी में अब बदलाव आ रहा है।

आजादी के बाद आदिवासियों की शहादत को याद नहीं किया गया। प्रधानमंत्री ने पहली बार लाल किला से धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को नमन किया। साथ ही 25 करोड़ की राशि प्रदान की, ताकि जिस कारागार में धरती आबा ने अपने आखिरी दिन गुजारे थे, उस परिसर में उनकी प्रतिमा लगायी जाये। यही नहीं, उस परिसर में झारखंड के सभी शहीदों की प्रतिमा लगेगी, ताकि आने वाली पीढ़ी, देश और दुनिया के लोग झारखंड के वीर शहीदों के संबंध में जान सकें, उनसे प्रेरणा ले सकें। इस अवसर पर गिरिडीह सांसद रविंद्र कुमार पांडेय, बोकारो विधायक बिरंची नारायण, घाटशिला विधायक लक्ष्मण टुडू, बेरमो विधायक, पूर्व मंत्री हेमलाल मुर्मू, जिला 20 सूत्री उपाध्यक्ष लक्ष्मण नायक, बोकारो उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अन्य उपस्थित थे।

राज्य की समृद्धि के लिए मरांग बुरू से मांगा आशीर्वाद
मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों-लाख संथाल समाज के लोग यहां आज मरांग बुरु (लुगू बुरु) से आशीर्वाद लेने आये हैं। हमने भी आज यहां मत्था टेक कर यह आशीर्वाद मांगा कि कैसे झारखंड राज्य में स्मृद्धि आये एवं बेरोजगारी और बेकारी दूर हो। मरांग बुरु सभी का कल्याण करें, समृद्धि से राज्य के लोग आच्छादित हों। यही कामना लेकर आशीर्वाद लेने आया हूं। उनके लिए जो अभाव की जिंदगी जी रहें उनके जीवन मे बदलाव आये और मान्यता है और मुझे विश्वास है कि मरांग बुरु से सच्चे मन से मांगी गयी याचना जाया नहीं जाती।

पांचवीं तक संथाली भाषा में पढ़ाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां आकर मैंने देखा कि संथाल समाज के लोग अपनी भाषा में संबोधित कर रहें हैं और ऐसा करना भी चाहिए। हमें अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। इसी उद्देश्य से संथाली भाषा को सरकार एक से 5वीं कक्षा तक की पढ़ाई में लागू करेगी, ताकि बच्चे अपनी मातृभाषा में ज्ञान पा सकें।

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