रांची। झारखंड में बार-बार चुनाव लड़नेवाले नेता ‘कुबेर’ हो जाते हैं। उन पर लक्ष्मी की कृपा जैसे छप्पर फाड़कर बरसती है। कई ऐसे नेता हैं, जिनकी संपत्ति में एक से दूसरे चुनाव के बीच हजारों प्रतिशत का इजाफा हो गया।
2005 और 2009 के विधानसभा चुनावों में उतरे झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता भूषण तिर्की ने अपने नामांकन पत्र के साथ जो हलफनामा दायर किया था, उसके अनुसार उनकी संपत्ति में पांच साल में एक लाख बारह हजार एक सौ इक्कीस प्रतिशत की वृद्धि हो गयी थी। 2005 में वह मात्र छह हजार रुपये नगदी लेकर उतरे थे और दुबारे 2009 में जब उन्होंने उम्मीदवारी का पर्चा दाखिल किया तो उनके पास 67 लाख 33 हजार 275 रुपये की संपत्ति थी।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने झारखंड में 2009 से 2014 बीच के चुनाव में उतरे प्रत्याशियों की संपत्ति के ब्योरे का विश्लेषण किया है। इसकी रिपोर्ट के अनुसार, इन दो चुनावों के बीच सबसे ज्यादा संपत्ति जिस नेता की बढ़ी, वह हैं चंदनकियारी सीट से आजसू के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले उमाकांत रजक। एक से दूसरे चुनावों का फासला नापते हुए उनकी संपत्ति 3213 प्रतिशत बढ़ गयी। वह जब 2009 का चुनाव लड़ रहे थे, तब उन्होंने नामांकन पत्र के साथ दिये गये हलफनामे में अपनी कुल संपत्ति मात्र दो लाख पैंतीस हजार रुपये बतायी थी। इस चुनाव में वह विजयी रहे। 2014 के चुनाव में जब वह फिर उतरे, तो उन्होंने अपनी संपत्ति 77 लाख 85 हजार 535 रुपये बतायी।
प्रतिशत के हिसाब से संपत्ति में वृद्धि के पैमाने पर दूसरे नंबर पर रहे जुगसलाई सीट के आजसू प्रत्याशी रामचंद्र सहिस। 2009 में उनकी संपत्ति की कुल कीमत 2 लाख 15 हजार 735 रुपये थी, जो अगले चुनाव में 2843 प्रतिशत के उछाल के साथ 63 लाख 49 हजार पहुंच गयी। संपत्ति की तरक्की के इस स्केल में तीसरे नंबर पर रहे देवघर से राजद के टिकट पर चुनाव लड़नेवाले सुरेश पासवान। इन दो चुनावों के बीच उनकी संपत्ति 2192 प्रतिशत बढ़ी। 2009 में उनके पास 17 लाख 58 हजार 936 रुपये की संपत्ति थी, जो पांच साल बाद चार करोड़ तीन लाख 17 हजार 523 रुपये हो गयी। चतरा से चुनाव लड़नेवाले भाजपा के जयप्रकाश सिंह भोक्ता इस सूची में चौथे नंबर पर रहे। 2009 में वह नौ लाख 20 हजार रुपये की संपत्ति के स्वामी थे और 2014 में जब वह दुबारा चुनाव मैदान में उतरे तो उनकी संपत्ति की कुल कीमत थी एक करोड़ 98 लाख 30 हजार रुपये। कोडरमा से राजद की प्रत्याशी रहीं अन्नपूर्णा देवी ने इन दो चुनावों के बीच अपनी संपत्ति में 1751 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। 2009 में वह 45 लाख 38 हजार 629 रुपये की मालकिन थीं, जबकि 2014 में जब चुनाव मैदान में आयीं तो उनकी कुल संपत्ति की कीमत हो गयी आठ करोड़ 40 लाख छह हजार 729 रुपये।
उम्र भी बदल जाती है नेताओं की
2009 में यदि कोई नेता 25 साल का है तो 2014 में उसकी उम्र 30 साल ही होगी ना ! लेकिन, झारखंड में चुनाव लड़नेवाले कई नेताओं की उम्र के मामले में यह सिंपल गणित फेल हो जाता है। चुनाव के वक्त नेताओं द्वारा दिये गये ब्योरे का विश्लेषण करने पर एडीआर ने पाया कि गांडेय से चुनाव लड़नेवाले कांग्रेस के सरफराज अहमद, सिसई से लड़नेवाली गीताश्री उरांव, झामुमो के चंद्रिका महथा, डालटनगंज से लड़नेवाले कांग्रेस के केएन त्रिपाठी, आजसू के उमाकांत रजक, खूंटी के भाजपा विधायक नीलकंठ सिंह मुंडा, तोरपा के पौलुस सुरीन, झामुमो के साइमन मरांडी, झामुमो के हाजी हुसैन अंसारी, भाजपा के अर्जुन मुंडा, जयप्रकाश सिंह भोक्ता सहित कई नेताओं की उम्र का गणित बदल गया।