विशेष
सहारा निवेशकों के बारे में सोचना, यानी राज्य की 21 लाख लोगों की उम्मीदों को पंख देना
पारा टीचरों, सहायक पुलिसकर्मियों और अनुबंधकर्मियों का भरोसा भी हासिल करने का लक्ष्य
सत्तारूढ़ पक्ष को इसका जवाब देने के लिए कोई नया हथियार लाना होगा

नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
झारखंड में विधानसभा चुनाव का पहला चरण अब महज हफ्ता भर दूर है। चुनाव प्रचार में सभी दलों और प्रत्याशियों ने पूरी ताकत झोंक रखी है। एक दूसरे के खिलाफ राजनीतिक बमबारी चालू है। बयानों के मिसाइल भी दागे जा रहे हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, चुनाव प्रचार की रफ्तार भी तेज होती जा रही है। सत्ताधारी गठबंधन की तरफ से प्रचार की कमान जहां हेमंत सोरेन ने संभाल रखी है, वहीं भाजपा ने पीएम मोदी और अमित शाह के अलावा अपने तमाम मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों को प्रचार अभियान में झोंक दिया है। लोग कह रहे हैं कि हिमंता कम थे कि भाजपा ने योगी आदित्यनाथ को भी मैदान में उतार दिया है। योगी ने झारखंड में एंट्री मारते ही हिंदुओं को चेता दिया कि बंटोगे तो कटोगे। जनता अपने मनपसंद नेताओं को देख कर भी खूब उत्साहित हो रही है। कांग्रेस की तरफ से मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कमान संभाली हुई है।
उन्होंने योगी के बयान का जवाब देते हुए कहा है कि बांटनेवाले भी तुम और काटनेवाले भी तुम। सूचना है कि राहुल गांधी और दूसरे नेता भी झारखंड में चुनाव प्रचार करने के लिए आनेवाले हैं। इधर झारखंड के चुनाव प्रचार अभियान में पिछले दो महीने से महागठबंधन और खासकर उसके नेता हेमंत सोरेन की जिन तीन-चार योजनाओं की खूब चर्चा हो रही थी, उनमें मंईयां सम्मान योजना और बिजली बिल माफी योजना, सर्वजन पेंशन योजना और अबुआ आवास योजना ने खूब सुर्खियां बटोरीं। उन योजनाओं की सुर्खियों के बाद भाजपा कहीं न कहीं झारखंड में बैकफुट पर थी, जिसकी काट के लिए उसने पहले गोगो दीदी योजना की घोषणा की। अभी-अभी भाजपा ने संकल्प के रूप में जो दो वादे किये हैं, उससे चुनावी मैदान में उत्सुकता बढ़ गयी है। ये दो वादे हैं, सहारा निवेशकों के पैसे लौटाने और पारा टीचरों, सहायक पुलिसकर्मियों और अनुबंधकर्मियों के स्थायीकरण का। भाजपा ने झारखंड के लिए जो संकल्प पत्र जारी किया है, उसमें इन दो वादों को शामिल किया गया है। भाजपा द्वारा किये गये इन दो वादों के बाद से ऐसा लगता है कि चुनावी माहौल में एक हलचल पैदा हो गयी है और भाजपा समर्थकों का कहना है कि ये दो वादे गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। क्योंकि राज्य में सहारा निवेशकों की संख्या करीब 21 लाख है। इन निवेशकों में नयी आस जग चुकी है। इनके परिवार के लोग उत्साहित हो रहे हैं कि उनके फंसे हुए पैसे उन्हें मिलने शुरू हो जायेंगे। फिलहाल किसी भी राजनीतिक दल की निगाह इस ओर नहीं गयी थी। लेकिन सहारा निवेशक अपनी पीड़ा आजाद सिपाही के कार्यक्रम भ्रमण के दौरान भी बताते रहे। लेकिन अब भाजपा ने इस ओर ध्यान आकर्षित कर एक बड़े वर्ग या वोट बैंक को साधने का प्रयास किया है। भाजपा अगर इनका भरोसा जीतने में कामयाब होती है, तो इससे उसे चुनावी लाभ मिल सकता है। यह फार्मूला भाजपा अन्य चुनावी राज्यों में भी लगा सकती है। अब सत्ता पक्ष को इन दो वादों के जवाब में कोई नया हथियार उतारना जरूरी हो गया है। क्या हैं ये दो वादे और क्या हो सकता है इनका असर, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह

झारखंड में पहले चरण के चुनाव के लिए अब महज एक हफ्ता बचा है। इसलिए चुनाव प्रचार अभियान पूरे उफान पर है। विभिन्न दलों और प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक रखी है। पिछले कुछ सालों से प्रचार अभियान के दौरान यह देखने को मिल रहा है कि दलीय प्रत्याशियों के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी भी चुनावी वादे करते हैं और जीतने पर उन वादों को पूरा करने की कोशिश भी करते हैं। इसलिए इस चुनाव में भी खूब वादे किये जा रहे हैं, उन्हें पूरा करने की कसमें खायी जा रही हैं और संकल्प-प्रण के साथ नयी योजनाओं की रूपरेखा भी जनता के सामने रखी जा रही है।

इन वादों और संकल्पों-घोषणाओं के शोर में अभी-अभी जिन दो संकल्पों ने पूरे चुनाव प्रचार अभियान में हलचल पैदा कर दी है, वे भाजपा ने जारी किये हैं। इनमें पहला संकल्प है सहारा निवेशकों के पैसे लौटाने का और दूसरा है पारा टीचरों, सहायक पुलिसकर्मियों और अनुबंधकर्मियों की सेवा को स्थायी करने का। इन दो संकल्पों में खास बात यह है कि इनसे झारखंड का हर तीसरा व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रभावित है। इन दोनों संकल्पों की एक और खास बात यह है कि ये हर जाति, धर्म, क्षेत्र, समुदाय और आयवर्ग को समान रूप से प्रभावित करते हैं।
झारखंड में पिछले दो महीने से सत्ता पक्ष और विपक्ष की तरफ से मुख्य रूप से मंईयां सम्मान योजना और गोगो दीदी योजना की चर्चा हो रही थी। इसके अलावा सर्वजन पेंशन योजना, कृषि ऋण माफी योजना और बिजली बिल माफी योजना के बारे में भी बात हो रही थी।
सत्ता पक्ष की तरफ से इन योजनाओं को अपनी उपलब्धियों के रूप में बताया जा रहा था, तो विपक्ष की तरफ से गोगो दीदी योजना लागू करने की बात जोर-शोर से प्रचारित की जा रही थी। ऐसा महसूस होने लगा था कि झारखंड का यह चुनाव मंईयां सम्मान योजना बनाम गोगो दीदी योजना हो गया है।

क्या था इन दोनों योजनाओं का स्वरूप
इन दोनों योजनाओं का टारगेट समूह महिलाएं ही थीं। तीन महीना पहले मंईयां सम्मान योजना लागू हुई और करीब 50 लाख महिलाओं के खाते में हर महीने एक-एक हजार रुपये भेजे जाने लगे। इसके जवाब में भाजपा ने सरकार बनने पर गोगो दीदी योजना लागू करने का वादा किया, जिसमें हर महीने 21 सौ रुपये खाते में भेजे जाने की बात कही गयी। इसके बाद सत्ता पक्ष ने चुनाव बाद दिसंबर महीने से मंईयां सम्मान योजना की राशि को एक हजार से बढ़ा कर ढाई हजार रुपये करने का फैसला किया और यह रकम दिसंबर से खाते में भेजने की घोषणा की गयी। इन दोनों योजनाओं ने चुनाव प्रचार अभियान को कौन कितना रुपया दे रहा है जैसे सवालों में उलझा कर रख दिया। इसके अलावा सत्ता पक्ष की तरफ से सर्वजन पेंशन योजना, बिजली बिल माफी योजना और कृषि ऋण माफी योजना को अपनी उपलब्धियों के रूप में गिनाया जाने लगा, तो विपक्ष की तरफ से केंद्र सरकार की योजनाओं को सामने रखा जाने लगा। दूसरे शब्दों में कहें, तो चुनाव प्रचार का फोकस आर्थिक लाभ और रेवड़ियों पर हो गया।

ऐसे में भाजपा ने अब अपना संकल्प पत्र जारी किया है और इसके अलावा अब तक सात प्रण जारी किये हैं। इनमें से दो प्रण अब प्रचार अभियान में हलचल मचा रहे हैं। इनमें पहला है सहारा निवेशकों का पैसा लौटाने का वादा और दूसरा है झारखंड के पारा टीचरों, सहायक पुलिसकर्मियों और अनुबंधकर्मियों की सेवा को स्थायी करना।

क्या है सहारा निवेशकों वाला संकल्प
भाजपा ने कहा है कि यदि उसकी सरकार बनी, तो वह सहारा के निवेशकों का पैसा लौटायेगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह यह संकल्प व्यक्त कर गये हैं। झारखंड समेत पूरे देश में सहारा इंडिया में निवेश करनेवालों की संख्या करीब 10 करोड़ है। इनके करीब 25 हजार करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। झारखंड में सहारा में निवेश करनेवालों की संख्या करीब 24 लाख है और इनका करीब 11 सौ करोड़ रुपया फंसा हुआ है। भाजपा ने पहली बार यह रकम वापस दिलाने का वादा किया है। इस मुद्दे की खास बात यह है कि इससे हर जाति, वर्ग, संप्रदाय और आयवर्ग के लोग प्रभावित हैं। झारखंड में तो निम्न से लेकर उच्च आय वर्ग के लोगों की रकम भी फंसी हुई है। भाजपा ने यह वादा कर एक झटके में उन तमाम लोगों की उम्मीदें जगा दी हैं।

पारा टीचरों, सहायक पुलिसकर्मियों और अनुबंधकर्मियों के लिए घोषणा
भाजपा ने पारा टीचरों को स्थायी करने का संकल्प व्यक्त कर झारखंड के 65 हजार परिवारों में खुशी की लहर दौड़ा दी है। राज्य में स्कूली शिक्षा की रीढ़ बन चुके ये पारा टीचर पिछले करीब 12 साल से आंदोलनरत हैं। इनकी समस्याओं पर कई बार बात हुई, लेकिन कभी इसका समाधान करने की गंभीर कोशिश नहीं हुई। इसके अलावा पार्टी ने साढ़े तीन हजार सहायक पुलिसकर्मियों और करीब साढ़े छह लाख अनुबंधकर्मियों की सेवा को स्थायी करने का वादा कर उनमें भी उम्मीद की नयी किरण जगा दी है। इस एक संकल्प की खास बात यह है कि इसने राज्य के हर पांचवें मतदाता को किसी न किसी रूप से प्रभावित किया है। दूसरे शब्दों में इसका मतलब यह है कि भाजपा की इस घोषणा ने राज्य के मतदाताओं को आकर्षित किया है।

सत्ता पक्ष की रणनीति
जाहिर है कि भाजपा के इन दो संकल्पों ने चुनाव प्रचार की दिशा-दशा बदल दी है। ऐसे में अब सत्ता पक्ष द्वारा अपनायी जानेवाली रणनीति पर गौर किया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि सत्ता पक्ष, खास कर झामुमो की तरफ से इन दो संकल्पों के जवाब में नयी योजनाओं की घोषणा की जा सकती है, ताकि मतदाताओं के मन में अपने प्रति विश्वास जगाया जा सके। सत्ता पक्ष के लिए ऐसा करना जरूरी हो गया है, क्योंकि अब प्रचार अभियान का रुख एक नये क्षितिज की ओर बढ़ चुका है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि सत्ता पक्ष की तरफ से कौन सा जवाबी हथियार मैदान में उतारा जाता है।

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