रांची। बैंक अधिकारी बनकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अपराधियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सजायाफ्ता अंकुश कुमार मंडल की सजा के खिलाफ क्रिमिनल अपील पर सुनवाई झारखंड हाइकोर्ट में हुई। मामले में अभियुक्त अंकुश कुमार मंडल की ओर से हस्तक्षेप याचिका (आइए) दाखिल कर जमानत का आग्रह कोर्ट से किया गया। हाइकोर्ट की एकल पीठ ने मामले में इडी को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। मामले के अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। अपीलकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार ने पैरवी की। बता दें कि रांची के पीएमएलए के विशेष अदालत ने जुलाई 2024 में मामले में 5 आरोपियों अंकुश कुमार मंडल, गणेश मंडल, संतोष मंडल, प्रदीप मंडल, पिंटू मंडल को 5-5 साल की सश्रम कैद की सजा सुनायी थी। साथ ही उन पर ढाई-ढाई लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। गणेश मंडल, संतोष मंडल ने पीएमएलए कोर्ट द्वारा सुनायी गयी सजा को हाइकोर्ट में चुनौती दी है।
दरअसल, ये सभी अभियुक्त जामताड़ा जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र के मिरगा गांव निवासी हैं। इन आरोपियों पर फर्जी पते पर सिम कार्ड लेने और बैंक अधिकारी बनकर लोगों को कॉल करके साइबर अपराध करने का आरोप है। मामले में इडी की ओर से 24 गवाहों को प्रस्तुत किया था। साथ ही काफी संख्या में दस्तावेज को चिह्नित कराया गया है। इडी ने साइबर अपराध के किसी मामले में पहली बार छह अगस्त 2018 को मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया था। जांच पूरी करते हुए इडी ने 27 मई 2019 को पांचों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मामले में पांचों आरोपियों के खिलाफ 13 दिसंबर 2019 को आरोप गठित किया गया था।