विशेष
आदिवासी अस्मिता से लेकर घुसपैठियों के मुद्दे पर मांगे गये वोट
प्रचार अभियान के दौरान तल्खी भी आयी, पर बात बिगड़ने से बची
कल्पना सोरेन ने बनाया रिकॉर्ड, तो पीएम मोदी के दौरे भी रहे चर्चा में
नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
झारखंड विधानसभा चुनाव का प्रचार खत्म हो गया है। दो चरणों में होनेवाले इस चुनाव के दूसरे चरण में संथाल परगना और कोयलांचल में 20 नवंबर को 38 सीटों पर मतदान होगा। इनमें से 28 सीटों पर एनडीए और इंडी अलायंस में सीधा मुकाबला है, जबकि 10 सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष की स्थिति है। इस चुनाव में कई राजनीतिक घरानों के सदस्यों की अग्नि परीक्षा होगी। करीब एक महीने तक चले चुनाव प्रचार अभियान के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने पर जहां प्रशासन के साथ आम लोगों ने राहत की सांस ली है, वहीं इस बात की भी खूब चर्चा हो रही है कि यह चुनाव प्रचार कई मायनों में अनोखा रहा। इस चुनाव प्रचार में कई बातें पहली बार हुईं, तो कई ऐसे मुद्दे भी रहे, जो पहली बार सुनाई पड़े। प्रचार अभियान के दौरान नेताओं और प्रतिद्वंद्वियों के बीच तल्खी भी पैदा हुई, बयानों के तीर भी चले, लेकिन आम तौर पर पूरा प्रचार अभियान सलीके से चला। इस प्रचार अभियान में सबसे अधिक चर्चा कल्पना सोरेन की रही, जिन्होंने 98 सभाएं कर रिकॉर्ड कायम किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चार बार झारखंड आना भी चर्चा में रहा। जिन दो प्रमुख राजनीतिक हस्तियों की अनुपस्थिति को लोगों ने शिद्दत से महसूस किया, उनमें झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन और नीतीश कुमार शामिल हैं। राजद सुप्रीमो लालू यादव भी केवल एक जगह प्रचार के लिए पहुंचे, जो लोगों को आश्चर्य में डाल गया। झारखंड में कैसा रहा चुनाव प्रचार अभियान, किस नेता ने कितनी सभाएं की और क्या मुद्दे उठाये गये, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।
झारखंड की छठी विधानसभा चुनने के लिए हो रहे चुनाव का प्रचार अभियान खत्म हो गया है। राज्य विधानसभा की 81 सीटों के लिए दो चरणों में चुनाव कराये जाने हैं। इनमें से पहले चरण में 43 सीटों पर 13 नवंबर को चुनाव हो चुका है, जबकि दूसरे चरण में 38 सीटों पर 20 नवंबर को मतदान होगा। इनमें 18 सीटें कोयलांचल और 18 सीटें संथाल परगना में हैं। दो सीटें रांची संसदीय क्षेत्र में पड़ती हैं। इन 38 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार सोमवार शाम खत्म हो गया। करीब एक महीने तक चले चुनाव प्रचार अभियान में इस बार कई बातें पहली बार हुईं।
किसने कितनी सभाएं की
दूसरे चरण की 38 सीटों के लिए चुनाव प्रचार की सबसे खास बात यह रही कि इसमें दोनों ही पक्षों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। सत्ताधारी इंडी अलायंस की कमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन के हाथों में रही, तो विपक्षी एनडीए की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दूसरे नेताओं ने मोर्चा संभाल रखा था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों चरणों में छह चुनावी सभाएं की और रांची में रोड शो किया। गृह मंत्री अमित शाह ने कुल 16 सभाएं की, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और असम के सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने मिल कर एक सौ से ज्यादा छोटी-बड़ी सभाएं की हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव की 23 से अधिक सभाएं हुई हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी, पार्टी के कद्दावर नेता चंपाई सोरेन और आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो के अलावा लोजपा (आर) अध्यक्ष चिराग पासवान और अन्य ने भी कुल मिला कर 150 से अधिक सभाओं को संबोधित किया।
यह तो हुई विपक्ष की बात, लेकिन सत्ताधारी इंडी गठबंधन के स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने चुनाव प्रचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिये। दूसरे राजनीतिक दलों के नेता भी बेहिचक स्वीकार करते हैं कि हेमंत और कल्पना ने जिस तरह से प्रचार अभियान को अंजाम दिया है, वह रिकॉर्ड है। राज्य बनने के बाद शायद ही किसी नेता ने चुनाव में इतनी सभाएं की होंगी। अंतिम आंकड़े के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लगभग 92 सभाओं को संबोधित किया, जबकि उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने 98 से अधिक चुनावी सभाएं कीं।
इनके अलावा भाजपा और कांग्रेस के कई अन्य नेताओं की भी चुनावी सभाएं हुईं। भाजपा से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भजन लाल शर्मा, योगी आदित्यनाथ, मोहन यादव, मोहन चरण माझी, विष्णुदेव साय, जुएल ओराव, सम्राट चौधरी, अनुराग ठाकुर, लक्ष्मीकांत वाजपेयी, चिराग पासवान, जयराम ठाकुर, मिथुन चक्रवर्ती, शुभेंदू अधिकारी ने भी प्रचार किया।
यदि नेताओं की चुनावी सभाओं की बात की जाये, तो भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आठ, शिवराज सिंह चौहान ने 48, हिमंता बिस्वा सरमा ने 53, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने छह, राहुल गांधी ने छह और सचिन पायलट ने एक सभा की।
ये मुद्दे उठाये गये
झारखंड में चुनाव प्रचार अभियान खत्म होने के बाद यह जानना भी दिलचस्प है कि किस तरफ से क्या मुद्दे उठाये गये और कौन क्या दावा कर रहा है। दोनों पक्ष, चाहे वह सत्ताधारी इंडी अलायंस हो या भाजपा के नेतृत्व वाला विपक्षी एनडीए, इस चुनाव में जीत के दावे कर रहे हैं। एनडीए राज्य में उलटफेर का दावा कर रहा है। वहीं, इंडिया अलायंस अपने पुराने स्टैंड, ‘एक ही नारा, हेमंत दोबारा’ पर कायम है। जहां तक मुद्दों की बात है, तो हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सत्ताधारी इंडी अलायंस ने आदिवासी अस्मिता, संविधान और सामाजिक एकता-न्याय के मुद्दे उठाये। साथ ही उसने पांच साल के दौरान किये गये काम और केंद्र सरकार की कथित झारखंड विरोधी नीतियों को पूरी ताकत से उठाया है। चुनाव प्रचार अभियान कितना करीबी रहा, उसका अंदाजा इसी बात से मिलता है कि कुछ सीटों को छोड़ दें, तो राज्य की ज्यादातर सीटों पर कड़ा मुकाबला है। कोई पार्टी सीधे तौर पर दावा नहीं कर सकती कि वह सरकार बना रही है। झामुमो ने सरना धर्म कोड को भी मुद्दा बनाया है। झामुमो ने चुनाव से पहले मास्टर स्ट्रोक के रूप में मंईयां योजना और बिजली बिल माफ करने को भी भुनाने की कोशिश की है। जहां तक विपक्ष की बात है, तो उसने राज्य में डेमोग्राफी परिवर्तन और घुसपैठ के मुद्दे को अपना प्रमुख हथियार बनाया। इसके अलावा भ्रष्टाचार और झारखंड की कानून-व्यवस्था की स्थिति भी उसके मुद्दों की सूची में रही।
मुद्दों पर क्या कहते हैं राजनीतिक दल
झामुमो के नेता कहते हैं, भाजपा के पास चुनाव लड़ने के लिए कोई मुद्दा नहीं है। पांच साल के कार्यकाल में मुश्किलों के बावजूद हम आगे बढ़ते गये। पहले दो साल कोरोना से लड़ते रहे, फिर तीन साल तक इडी-सीबीआइ से लड़ते रहे। अब चुनाव आये हैं, तो जांच एजेंसियों को फिर से सक्रिय कर दिया गया है। जनता ये जानती है कि झामुमो ने उनकी जमीन बचायी है। भाजपा ने झारखंड बनने से पहले ही उसकी पहचान के साथ समझौता किया। राज्य का नाम ही बदल कर वनांचल रख दिया।
दूसरी तरफ भाजपा के नेता कहते हैं, चुनाव जीतकर सबसे पहले एनआरसी लागू करेंगे। जो फेक वोटर कार्ड, आधार कार्ड और पैन कार्ड बनाकर रह रहे हैं, वे सब बाहर कर दिये जायेंगे। यहां रहने वाली मुस्लिम आबादी का 60% घुसपैठिया है। जिन आदिवासी लड़कियों ने मुसलमानों से शादी की है, उनके बच्चों को आदिवासियों का दर्जा नहीं देंगे। शादी के बाद जिन लोगों की जमीन कब्जायी गयी है, हम उन्हें वापस लौटायेंगे।