कोलकाता। राज्य परिवहन विभाग के विशेष सचिव अनिंद्य सेनगुप्ता ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में बुधवार को एक हलफनामा पेश किया। उन्होंने कहा कि राज्य की निजी बसें और मिनी बसें सरकार द्वारा चार साल पहले तय किया गया किराया लेंगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई अतिरिक्त किराया नहीं लिया जाए। अगर कहीं अतिरिक्त किराया लिया जाएगा तो कड़ी कार्रवाई होगी। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी में होगी। महामारी के बाद कोलकाता की सड़कों पर चलने वाली बसों में यात्रियों से अतिरिक्त किराया वसूलने के मामले लगातार सामने आते रहे है।

ऐसी ही कई शिकायतों को देखते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। उस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य से हलफनामा मांगा था। इसलिए परिवहन विभाग के विशेष सचिव द्वारा शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है। राज्य ने बसों का न्यूनतम किराया सात रुपये और मिनी बसों में न्यूनतम आठ रुपये करने की घोषणा की है।

कुछ दिन पहले राज्य ने मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ के समक्ष एक हलफनामा दायर किया था। परिवहन विभाग का दावा था कि कहीं कोई अतिरिक्त किराया नहीं लिया जा रहा है। हलफनामे में उन्होंने कोर्ट को बताया कि बसों से तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव अलापन बनर्जी द्वारा 2018 में तय किए गए किराए के हिसाब से किराया लिया जाएगा। कई दिन पहले विशेष सचिव ने राज्य के परिवहन सचिव और निदेशक को अतिरिक्त किराया वसूलने के मामले में कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

परिवहन विभाग के विशेष सचिव ने कोर्ट को बताया कि राज्य के सभी जिलाधिकारियों और परिवहन विभाग के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को अधिक किराए की शिकायतें मिलने पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें याद दिलाने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित किराया सूची भेजी गई है। उच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार के हलफनामे के मुताबिक अभियोजन पक्ष पूरे मामले को देखेगा। इस निर्देश के विपरीत पाए जाने पर कोर्ट की अवमानना का मामला दायर किया जा सकता है।

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