रामगढ़। व्यवहार न्यायालय के मुख्य द्वार पर मुख्यालय डीएसपी संजीव मिश्रा और अधिवक्ता भैरव ठाकुर के बीच उभरे विवाद का पटाक्षेप गुरुवार को हो गया। एसपी के निर्देश पर मुख्यालय डीएसपी अधिवक्ताओं के पास पहुंचकर सबकुछ का निपटारा कर लिया। इस दौरान मुख्यालय डीएसपी ने अधिवक्ता को गले लगाकर विवाद का पटाक्षेप कर दिया। एक दूसरे ने अनजाने में हुई अपनी अपनी ग़लतियों को माना और भविष्य में दुबारा नहीं होने का वचन दिया। जिसके बाद सभी अधिवक्ताओं ने डीएसपी के सरल स्वभाव का सराहना किया। साथ ही भविष्य में एक दूसरे के साथ मिलकर रहने की बात कही।
क्या है घटनाक्रम
जानकारी के अनुसार नित्यदिन की तरह बुधवार को भी कोर्ट का काम निपटाने सुबह 11:30 बजे पहुंचे। इसी दौरान अपना वाहन को व्यवहार न्यायालय के मुख्य द्वार के सामने सड़क के किनारे पार्क कर रहे थे। इसी बीच मुख्यालय डीएसपी संजीव कुमार मिश्रा अपने कार्यालय जा रहे थे। तभी वाहन पार्क कर रहे अधिवक्ता भैरव ठाकुर के पास आकर रुके और सड़क गाड़ी खड़ा करने की बात बोलकर उनसे उलझ गये। जिसके बाद दोनों के बीच बात बढ़ गई और दोनों के बीच तूतू मैं मैं हो गई। जिसके बाद अधिवक्ता ने डीएसपी पर दुर्व्यहार करने का आरोपी लगाते हुए ज़िला अधिवक्ता संघ से शिकायत कर मामले की जानकारी रामगढ़ एसपी को दिया। इधर अधिवक्ता के साथ हुए दुर्व्यवहार के कारण अधिवक्ताओं का पारा गरम हो गया और पीड़ित के साथ व्यवहार न्यायालय के मुख्य द्वार के सामने सड़क को जाम कर दिया। साथ ही पुलिस प्रशासन और मुख्यालय डीएसपी के खिलाफ जमकर नारेबाजी था।
क्या हुआ दूसरे दिन
इधर तय रणनीति के तहत अधिवक्ताओं ने घटना के दूसरे दिन एसपी पीयूष पांडेय को आवेदन देकर मामले हस्तक्षेप करने की मांग की। जिसके बाद बार हॉल में एक बैठक रखी गयी। जिसमें सरकारी वकील के अलावा सभी अधिवक्ता शामिल हुए। इसी दौरान एसपी के निर्देश पर मुख्यालय डीएसपी बार हॉल में जुटे सभी अधिवक्ता के पास पहुंचे। जिसके बाद उन्होंने घटित घटना की पूरी कहानी बताई और विवाद को यन्ही समाप्त करने का आग्रह किया। जिसके बाद सभी अधिवक्ताओं ने भी विवाद को निपटारा का मन बना लिया। इसी बीच मुख्यालय डीएसपी ने अधिवक्ता भैरव ठाकुर को गला लगाकर दूरियां को पाट दिया। दोनों ने अपनी ग़लतियों को अनजाने में होने की बात कही। लेकिन भविष्य में ऐसा दुबारा नहीं होने का वचन दिया।
कौन कौन थे बैठक में मौजूद
बैठक में रामगढ़ थाना प्रभारी रोहित कुमार महतो, अधिवक्ता आनंद अग्रवाल, सीताराम महतो, झलकदेव महतो, हरखनाथ महतो, धनंजय यादव, मोईन आरफ़ी, द्वारिका प्रसाद, रवि शंकर प्रसाद, शंभूनाथ प्रसाद, राजेंद्र महतो, नौशाद अहमद, चंद्रिका सिंह, आशुतोष कुमार, महेंद्र महतो, टिकेंद्र महतो, अरविंद गुप्ता, भैरव ठाकुर, ओम चंद नारायण, कमलेश कुमार, बीबी जाहिदा ख़ातून, मिन्नू कुमारी, मंज़ूरी चाकी, ज्योति कुमारी, तेजेंद्र महतो, ऋषि महतो, सुबोध पांडे, शंकर, अतुल रंजन, धीरेश महतो, सुरेश प्रसाद महतो, मुनेश्वर महतो, कृष्ण कन्हाई सहित अन्य उपस्थित थे।