-विधानसभा अध्यक्ष का मेरे प्रति जो व्यवहार रहा है, उस पर में विरोध दर्ज करता हूं
रांची। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष का मेरे प्रति जो व्यवहार रहा है, उस पर मैं विरोध दर्ज कराता हूं। उन्होंने कहा कि मैं तो पार्लियामेंट में भी रहा हूं, पर वहां भी मैंने देखा है कि अगर कोई सीनियर सांसद होते हैं, अगर वह हाथ उठाते हैं, या बोलने के लिए वे खड़े होते हैं, तो अध्यक्ष उनकी बातों को दो मिनट या एक मिनट ही सही, लेकिन उनको बोलने का अवसर देते हैं। लेकिन आज सभी ने देखा कि मैंने एक बार नहीं, दो-तीन बार बोलने के लिए हाथ उठाया, उसके बाद मैंने हाथ नीचे भी नहीं किया, काफी देर उठाये रखा, ताकि विधानसभा अध्यक्ष के संज्ञान में आये। लेकिन इसके बाद भी सभी ने देखा कि मुझे बोलने का अवसर नहीं दिया गया। विधानसभा नेता और प्रतिपक्ष के बोलने के बाद भी, कुछ लोगों को अध्यक्ष ने बोलने का मौका दिया। मैं किसी का नाम नहीं ले रहा हूं, अगर किसी को बोलने का मौका नहीं मिलता, तब भी समझ में आता कि विधानसभा अध्यक्ष ने किसी को बोलने का मौका नहीं दिया, तो आप उसे दुर्भावना कैसे कह सकते हो। लेकिन औरों को बोलने का मौका देना और बाबूलाल मरांडी को मौका नहीं देना, यह क्या दर्शाता है। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह घटना पहली दफा नहीं हुई है। पहले भी ऐसा हो चुका है, जब मुझे कई मौकों पर बोलने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वह आज अंदर से काफी दुखी हैं। पीड़ित महसूस कर रहे हैं। अगर स्पीकर हमें पार्टी के नहीं मानते मुझे उसकी कोई चिंता नहीं। लेकिन जनता ने हमें चुना है और हम एक विधायक हैं और विधायक के नाते राज्य में अगर कोई भी ऐसे बड़े कानून बनते हैं, या सरकार बनती है, तो हम सुझाव देने के हकदार हैं। जनता ने हमें इसीलिए चुन करके विधानसभा भेजा है। लेकिन झारखंड की जनता की भावनाओं के साथ जुड़ा हुआ मुद्दा और जिस पर मैंने दो तीन बार हाथ उठाया, आप सब लोग क्लिप उसको देख लेंगे और इसके बाद भी अध्यक्ष जी का बिल्कुल नजरअंदाज करना यह अपमानजनक है। मुझे लगता है कि पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित होकर विधानसभा के अध्यक्ष यह काम कर रहे हैं। यह लोकतंत्र के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है, गलत है। इसका मैं पहले तो विरोध और प्रोटेस्ट दर्ज करता हूं।
मैं अंदर से काफी दुखी हूं, पीड़ित और अपमानित महसूस कर रहा हूं: बाबूलाल मरांडी
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