रांची। झारखंड की प्रशासनिक मशीनरी इन दिनों अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रही है। राज्य में आईएएस (IAS) कैडर के स्वीकृत 224 पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 172 अफसर ही कार्यरत हैं, जिसके कारण 52 पद रिक्त पड़े हुए हैं। अधिकारियों की इस कमी ने राज्य के विकास कार्यों और नीति निर्धारण की गति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

2025 में सेवानिवृत्ति की झड़ी चालू वर्ष 2025 राज्य प्रशासन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। इस साल मुख्य सचिव अलका तिवारी समेत कुल 11 वरिष्ठ अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। साल के अंत तक यानी 31 दिसंबर को तीन और अधिकारी—अंजनी कुमार मिश्रा, शेखर जमुआर और पवन कुमार भी सेवानिवृत्त हो जाएंगे। अधिकारियों की घटती संख्या के बीच कई विभागों का जिम्मा अतिरिक्त प्रभार (Additional Charge) के सहारे चल रहा है।

केंद्रीय प्रतिनियुक्ति और स्टडी लीव का असर रिक्तियों का एक बड़ा कारण अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना भी है। वर्तमान में झारखंड कैडर के 16 प्रभावशाली अधिकारी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सचिव, एडिशनल सेक्रेट्री और डायरेक्टर जैसे अहम पदों पर सेवाएं दे रहे हैं। इनमें शैलेश कुमार सिंह, निधि खरे और सुनील वर्णवाल जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा, रवि शंकर शुक्ला और दिव्यांशु झा जैसे युवा अधिकारी उच्च शिक्षा के लिए फॉरेन स्टडी लीव पर हैं।

ब्यूरोक्रेसी के इस “खालीपन” की वजह से राज्य के कई महत्वपूर्ण विभागों में सचिव स्तर के अधिकारियों की कमी महसूस की जा रही है, जिसका सीधा असर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ रहा है।

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