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    Home»देश»एसआईआर के विरोध में नहीं, लेकिन समय-सीमा बढ़नी चाहिये : मायावती
    देश

    एसआईआर के विरोध में नहीं, लेकिन समय-सीमा बढ़नी चाहिये : मायावती

    shivam kumarBy shivam kumarDecember 9, 2025Updated:December 9, 2025No Comments4 Mins Read
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    लखनऊ। संसद में चुनाव सुधार को लेकर चर्चा हो रही है। इसकाे लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्हाेंने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया में अन्य सुधार लाने के साथ-साथ तीन खास सुधार लाना बहुत जरूरी हैं।

    मायावती ने मंगलवार को साेशल मीडिया एक्स पर लिखा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर जो पूरे देश में प्रक्रिया चल रही है बसपा उसके विरोध में नहीं है। लेकिन बसपा का यह कहना है कि इस सम्बन्ध में मतदाता सूची में नाम भरने की जो भी प्रक्रिया होनी है, उसके लिए जो समय सीमा निर्धारित की गई है वो बहुत ही कम है। इसकी वजह से बीएलओ के ऊपर भी काफी दबाव है। काम के दबाव के वजह से कई बीएलओ अपनी जान भी गवां चुके हैं। जहां करोड़ों मतदाता हैं वहां बीएलओ को उचित समय मिलना ही चाहिये। खासतौर उस प्रदेश में जहां जल्दी ही कोई भी चुनाव नहीं है।

    उत्तर प्रदेश में लगभग 15.40 करोड़ से भी ज्यादा मतदाता हैं और अगर वहां एसआईआर का कार्य जल्दबाजी में पूरा करने की कोशिश की जायेगी तो इसका नतीजा यह होगा कि अनेकों वैध-मतदाता खासतौर पर जो गरीब हैं और काम करने के सिलसिले में बाहर गये हैं, तो फिर उनका नाम मतदाता सूची से रह जायेगा और मतदान से वंचित रह जाएंगे। जो कि पूर्ण रूप से अनुचित होगा।

    ऐसे में एसआईआर की प्रक्रिया को पूरी करने में जल्दबाजी ना करते हुए उचित समय दिया जाना चाहिये, वर्तमान में दी गई समय सीमा को बढ़ाना चाहिये। इसके साथ ही उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार चुनाव आयोग ने निर्देश जारी किये हैं। ऐसे लोग जिनका कोई भी आपराधिक इतिहास है उन्हें अपने हलफनामें में इसका अपने आपराधिक इतिहास का पूरा ब्योरा देना होगा और इसके साथ-साथ स्थानीय अखबारों में भी इसका पूरा विवरण भी प्रकाशित करना होगा तथा जिस राजनैतिक पार्टी से वे चुनाव लड़ रहे हैं, उस राजनैतिक पार्टी की भी जिम्मेदारी होगी कि वह इस सूचना को अपने स्तर से भी राष्ट्रीय अखबारों में भी प्रकाशित करेगी।

    उनका का कहना है कि अक्सर यह पाया गया है कि जिस व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया जाता है उनमें से कुछ लोग अपना आपराधिक इतिहास पार्टी को नहीं बतातें हैं तथा कुछ लोगों के संबंध में स्क्रूटनी के समय ही पार्टी को इसका पता लग पाता है, जिसकी वजह से इसकी जिम्मेवारी पार्टी के ऊपर आ जाती है और वैसे भी ऐसे प्रत्याशियों के आपराधिक इतिहास को राष्ट्रीय अखबारों में छपवाने की जिम्मेवारी पार्टी के ऊपर डाली गयी है।

    जबकि इस संबंध में हमारी पार्टी का यह सुझाव है कि आपराधिक छवि वाले प्रत्याशियों के संबंध में सभी औपचारिकताएं पूरी करने की जिम्मेदारी उन्हीं पर डालनी चाहिये ना कि पार्टी के ऊपर होनी चाहिये। अगर आगे चलकर यह मालूम होता है कि किसी प्रत्याशी ने अपना आपराधिक इतिहास छुपाया है तो इससे सम्बंधित हर प्रकार की जिम्मेदारी भी उसी पर आनी चाहिये ना कि पार्टी के ऊपर। इसके इलावा हमारी पार्टी का यह भी सुझाव है कि ईवीएम को लेकर लगातार उठती गड़बड़ियों की शिकायत जो चुनाव के दौरान और उसके बाद व्यक्त की जाती है उसे दूर करने के लिए और चुनाव प्रक्रिया में सभी का पूर्ण रूप से विश्वास पैदा करने के लिए अब ईवीएम के द्वारा वाेट डलवाने की जगह पुनः बैलेट पेपर से ही वोटर डलवाने की प्रक्रिया लागू की जाये और अगर किसी वजह से ऐसा अभी नहीं किया जा सकता है तो कम से कम वीवीपैट के डब्बे में जो वोट डालते समय पर्ची गिरती है उन सभी पर्चियों की गिनती सभी बूथों में करके ईवीएम के वोटों से मिलान किया जाये।

    ऐसा ना करने का जो कारण इलेक्शन कमीशन द्वारा बताया जाता है, कि इसमें काफी समय लग जायेगा जबकि इनका यह तर्क बिलकुल भी उचित नहीं है। क्योंकि अगर सिर्फ कुछ और घन्टे गिनती में लग जाते हैं तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिये, जबकि वोट डालने की चुनाव प्रक्रिया महीनों चलती है। और यह इसलिए भी जरूरी है कि इससे देश की आमजनता का चुनाव प्रक्रिया में विश्वास बढ़ेगा तथा इस प्रकार के जो अनेकों प्रकार के सन्देह उत्पन्न होते हैं उनपर भी पूर्ण विराम लगेगा, जो देश हित में होगा।

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    shivam kumar

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