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    Home»अन्य खबर»इतिहास के पन्नों में 13 अगस्तः अहिल्याबाई ‘महारानी’ ही नहीं, न्याय की देवी भी हैं
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    इतिहास के पन्नों में 13 अगस्तः अहिल्याबाई ‘महारानी’ ही नहीं, न्याय की देवी भी हैं

    shivam kumarBy shivam kumarAugust 12, 2024No Comments7 Mins Read
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    देश-दुनिया के इतिहास में 13 अगस्त की तारीख तमाम अहम वजह से दर्ज है। यह तारीख महारानी अहिल्याबाई के कारण मालवा-निमाड़ और महाराष्ट्र के लिए खास है।

    महाराष्ट्र सरकार पिछले साल महारानी अहिल्याबाई के सम्मान में अहमदनगर का नाम बदलकर अहिल्या नगर कर चुकी है। अहिल्याबाई प्रसिद्ध सूबेदार मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव होलकर की पत्नी थीं। अहिल्याबाई किसी बड़े राज्य की रानी नहीं थीं। उनका कार्यक्षेत्र अपेक्षाकृत सीमित था। फिर भी उन्होंने जो कुछ किया, उससे आश्चर्य होता है। महारानी अहिल्याबाई होलकर मालवा साम्राज्य की मराठा होलकर महारानी थीं। उनका जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के छौंड़ी ग्राम में हुआ था। उनके पिता मंकोजी राव शिंदे, अपने गांव के पाटिल थे। उस समय महिलाएं स्कूल नहीं जाती थीं, लेकिन अहिल्याबाई के पिता ने उन्हें लिखने -पढ़ने लायक पढ़ाया।

    अहिल्याबाई के पति खांडेराव होलकर 1754 के कुम्भेर युद्ध में शहीद हुए थे। 12 साल बाद उनके ससुर मल्हार राव होलकर की भी मृत्यु हो गई। इसके एक साल बाद ही उन्हें मालवा साम्राज्य की महारानी का ताज पहनाया गया। वह हमेशा से ही अपने साम्राज्य को मुस्लिम आक्रमणकारियों से बचाने की कोशिश करती रहीं, बल्कि युद्ध के दौरान वह खुद अपनी सेना में शामिल होकर मोर्चा संभालती थीं। उन्होंने तुकोजीराव होलकर को अपनी सेना के सेनापति के रूप में नियुक्त किया था। रानी अहिल्याबाई ने अपने साम्राज्य महेश्वर और इंदौर में काफी मंदिरों का निर्माण कराया था।

    इंदौर के साथ पूरे मालवा-निमाड़ में रानी अहिल्या बाई की कहानियां जर्रे-जर्रे में बसी हैं। वे न सिर्फ परम शिव भक्त थीं बल्कि अपनी प्रजा का भी बहुत ख्याल रखती थीं। मालवा की रानी देवी अहिल्याबाई होलकर प्रतिदिन 11 हजार पार्थिव शिवलिंग का पूजन करती थीं। मिट्टी से शिवलिंग बनाते वक्त वे हरेक शिवलिंग में अनाज के दाने या यूं कहें बीज रख देती थीं। पूजा के बाद शिवलिंगों को नर्मदा नदी में विसर्जित कर दिया जाता था। शिवलिंग में बीज इसलिए रखा जाता था कि जब मिट्टी नदी के तल में जाए तो वहां रह रहे जीवों का पोषण उसमें रखे बीज से हो। यदि बीज बहाव से किनारे पर आ जाए तो वह अंकुरित होकर हरियाली बढ़ा सके। 26 वर्ष तक शासन करने वाली अहिल्याबाई होलकर ने राजनीति, धर्म और न्याय व्यवस्था के लिए जितने कार्य किए हैं, उतना ही योगदान प्रकृति के संरक्षण में भी दिया।

    इतिहासकारों का कहना है कि अहिल्याबाई ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें खेत की मेड़ पर 20-20 छायादार और फलदार पौधे लगाने का आदेश दिया था। इनमें नीबू, गुलर, बरगद, पीपल, आम, इमली को प्राथमिकता दी। इससे मृदा का क्षरण भी नहीं होता और कृषकों को पेड़ों के फलों को बेचकर प्राप्त होने वाली राशि मिलती थी। वह मछली, पशु-पक्षी, नदी, तालाब, कुएं-बावड़ी, पेड़-पौधे यहां तक कि मिट्टी के संरक्षण की तक बात करती थीं।

    मालवा की महारानी देवी अहिल्याबाई होलकर को न्याय की देवी कहा जाता है। वह न्याय की ऐसी मूर्ति थी कि अपने बेटे मालोजीराव को भी सजा-ए-मौत का फरमान सुनाने से भी नहीं हिचकीं। उन्होंने अपने बेटे के हाथ-पैर बांधकर रथ के नीचे कुचलवाने का आदेश दिया था। कोई सारथी जब रथ चलाने को तैयार नहीं हुआ तो महारानी देवी अहिल्याबाई खुद सारथी बन रथ पर चढ़ गई थीं।

    हुआ यूं था कि मालोजीराव अपने रथ से राजबाड़ा के पास से गुजर रहे थे। उसी दौरान मार्ग के किनारे गाय का छोटा सा बछड़ा भी खड़ा था। जैसे ही मालोराव का रथ वहां से गुजरा अचानक कूदता-फांदता बछड़ा रथ की चपेट में आ गया और बुरी तरह घायल हो गया। थोड़ी देर में तड़प-तड़प कर उसकी वहीं मौत हो गई। इस घटना को नजरअंदाज कर मालोजीराव आगे बढ़ गए। इसके बाद गाय अपने बछड़े की मौत पर वहीं बैठ गई। वो अपने बछड़े को नहीं छोड़ रही थी। कुछ ही देर बाद वहां से अहिल्याबाई गुजरीं। तभी उन्होंने बछड़े के पास बैठी हुई एक गाय को देखा, तो रुक गईं। उन्हें जानकारी दी गई। बछड़े की कैसे मौत हुई कोई बताने को तैयार नहीं था। अंततः किसी ने डरते हुए उन्हें बताया कि मालोजी के रथ की चपेट में बछड़ा मर गया। यह घटनाक्रम जानने के बाद अहिल्याबाई ने दरबार में मालोजी की पत्नी मेनाबाई को बुलाकर पूछा कि यदि कोई व्यक्ति किसी की मां के सामने उसके बेटे का कत्ल कर दे तो उसे क्या दंड देना चाहिए? मेनाबाई ने तुरंत जवाब दिया कि उसे मृत्युदंड देना चाहिए। इसके बाद अहिल्याबाई ने आदेश दिया कि उनके बेटे मालोजीराव के हाथ-पैर बांध दिए जाएं और उन्हें उसी प्रकार से रथ से कुचलकर मृत्युदंड दिया जाए, जिस प्रकार गाय के बछड़े की मौत हुई थी। राजबाड़ा के पास जिस स्थान पर यह घटना हुई थी, उस जगह को आज सभी लोग आड़ा बाजार के नाम से जानते है।

    होलकर राज्य की निशानी और देवी अहिल्याबाई के शासन में बनवाई गईं चांदी की दुर्लभ मुहरें अब भी मल्हार मार्तंड मंदिर के गर्भगृह में रखी हुई हैं। इन मुहरों का उपयोग अहिल्या के समय में होता था। अहिल्याबाई के आदेश के बाद मुहर लगाई जाती थी, आदेश पत्र शिव का आदेश ही माना जाता था। छोटी-बड़ी चार तरह की मुहरें अब भी मंदिर में सुरक्षित हैं। महारानी अहिल्याबाई होलकर सफल दायित्वपूर्ण राजशाही का संचालन करते हुए 13 अगस्त, 1795 को दुनिया को अलविदा कह गईं। नर्मदा तट पर स्थित महेश्वर के किले में उन्होंने अंतिम सांस ली।

    महत्वपूर्ण घटनाचक्र

    1784ः भारत में प्रशासनिक सुधारों के लिए पिट्स इंडिया विधेयक ब्रिटिश संसद में पेश।

    1892ः अमेरिकी समाचार पत्र एफ्रो-अमेरिकन का बाल्टीमोर से प्रकाशन शुरू।

    1902ः इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को एक विकेट से हराकर ओवल की प्रसिद्ध जीत दर्ज की।

    1913ः इंग्लैंड के हैरी ब्रेअर्ली और शेफील्ड ने स्टेनलेस स्टील का आविष्कार किया।

    1951ः भारत में निर्मित पहले विमान हिन्दुस्तान ट्रेनर 2 ने पहली उड़ान भरी।

    1956ः भारत की लोकसभा में राष्ट्रीय राजमार्ग विधेयक पारित।

    1977ः अंतरिक्ष शटल के पहले ग्लाइडर का परीक्षण।

    1993ः वाशिंगटन में इजराइल एवं फिलिस्तीन के बीच शांति समझौता।

    1993ः थाईलैंड के नाखोन रचासिमा में होटल ढह जाने से 114 लोग मारे गए।

    1994ः संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच जिनेवा में परमाणु निरस्त्रीकरण के संबंध में ऐतिहासिक सहमति।

    1999ः तसलीमा नसरीन की नई पुस्तक ‘आमार मऐबेला’ (मेरा बचपन) पर बांग्लादेश सरकार ने प्रतिबंध लगाया।

    1999ः स्टेफी ग्राफ का टेनिस से संन्यास।

    2000ः रोनाल्ड वेनेशिअन सूरीनाम के नए राष्ट्रपति नियुक्त।

    2002ः इंटरपोल ने नेपाल के आठ माओवादी आतंकवादियों की तलाश के लिए रेड कार्नर नोटिस जारी किया।

    2004ः ग्रीस के एथेंस में 28वें ओलंपिक खेल शुरू।

    2005ः श्रीलंका के विदेशमंत्री लक्ष्मण कादिरगमर की हत्या के बाद इमरजेंसी लागू।

    2008ः विश्व की प्रमुख इस्पात कंपनी टाटा स्टील ने वियतनाम में संयुक्त रूप से इस्पात परिसर के निर्माण के लिए वहां की दो प्रमुख कंपनियों के साथ समझौता किया।

    2015ः इराक के बगदाद में एक ट्रक में बम विस्फोट। 76 लोग मारे गए और 212 अन्य घायल हुए।

    जन्म

    1848ः अंग्रेजी और बंगला भाषा के प्रसिद्ध लेखक रमेश चन्द्र दत्त। उन्हें धन के बहिर्गमन की विचारधारा का प्रवर्तक माना जाता है।

    1952ः भारत की जानी-मानी फिल्म अभिनेत्री।

    1963ः भारतीय अभिनेत्री श्रीदेवी।

    2000ः राष्ट्रमंडल खेल-2022 में चिराग शेट्टी के साथ पुरुष डबल्स का स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी।

    निधन

    1795ः भारत की प्रमुख वीरांगना अहिल्याबाई होल्कर।

    1910ः आधुनिक नर्सिग आन्दोलन की जन्मदाता नर्स फ्लोरेन्स नाइटिंगेल।

    1936ः भारत की प्रसिद्ध महिला क्रांतिकारी भीकाजी कामा।

    2018ः भारत के प्रुखख वामपंथी नेता और लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी।

    महत्वपूर्ण दिवस

    -अहिल्याबाई होल्कर की पुण्य तिथि।

    -महिला क्रांतिकारी भीकाजी कामा की पुण्य तिथि।

    -अंग दान दिवस (भारत)।

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    shivam kumar

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