जमशेदपुर: जमशेदपुर में बुधवार को कोल्हान प्रमंडल की समीक्षा बैठक में शामिल होने पहुंचीं शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव विभाग की सचिव आराधना पटनायक से पूरी तरह खफा दिखींं। साफ तौर पर नाम लेकर कहा कि निर्णय लेना सरकार का काम है, शिक्षा सचिव का नहीं। हां, यह जरूर है कि सचिव वैकल्पिक योजनाओं के बारे में सुझाव दे सकती हैं। डॉ यादव ने शिक्षा सचिव पर तंज कसते हुए कहा कि काम नहीं करने वाले अफसर ट्रांसफर करवा लें। लापरवाह अफसरों को सरकार वीआरएस देगी। कहा कि जो अफसर काम नहीं करना चाहते, वे काम छोड़ दें या फिर वीआरएस ले लें। सरकार किसी भी हाल में लापरवाह अफसर को बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकार का एकमात्र सूत्र है-काम करें या वीआरएस लें।
मंत्री ने अफसरशाही पर भड़कते हुए कहा कि यहां अफसर ही फैसले ले लेते हैं। उन्हें यह पता होना चाहिए कि फैसला लेने और निर्देश देने का काम मंत्री के जिम्मे होता है। अफसर सिर्फ राज्य की बेहतरी के लिए विकल्प सुझा सकते हैं। कहा कि विभाग के मंत्री सचिव को निर्देश देते हैं। वहीं सचिव का काम है कि संबंधित विषय पर आॅप्शन बतायें। सचिव यह तय नहीं कर सकता कि अमुक काम ही किया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि सचिव से आॅप्शन मिलने के बाद हम वही करते हैं, जो जनहित में होता है। उन्होंने कहा कि जनता से मंत्रियों को मिलना होता है। जनता के सवालों के जवाब भी मंत्रियों को ही देने होते हैं।
वैकल्पिक व्यवस्था तक डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई : शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव ने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक झारखंड के डिग्री कॉलेजों में इंटर की पढ़ाई जारी रहेगी। सरकार किसी को भी शिक्षा से वंचित नहीं करना चाहती है। डिग्री कॉलेजों से इंटर की पढ़ाई बंद करने की दिशा में काम कर रही है। प्लस टू स्कूल खोले जा रहे हैं। जब यह व्यवस्था पूरी तरह पटरी पर आ जायेगी, तब डिग्री कॉलेजों से इंटर की पढ़ाई बंद हो जायेगी।
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