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    Home»विशेष»छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन का खत्म हुआ नापाक साम्राज्य, चला रहा था अंतरराष्ट्रीय रैकेट
    विशेष

    छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन का खत्म हुआ नापाक साम्राज्य, चला रहा था अंतरराष्ट्रीय रैकेट

    shivam kumarBy shivam kumarJuly 22, 2025No Comments10 Mins Read
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    विशेष
    छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन का खत्म हुआ नापाक साम्राज्य, चला रहा था अंतरराष्ट्रीय रैकेट
    देश के दुश्मन का योगी सरकार ने कर दिया हिसाब-किताब फाइनल
    धर्मांतरण, देश के खिलाफ जासूसी, लव जिहाद और आपराधिक घटनाओं का सरगना है छांगुर

    नमस्कार। आजाद सिपाही विशेष में आपका स्वागत है। मैं हूं राकेश सिंह।
    देश की राजनीतिक गतिविधियों के शोरगुल के बीच यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक ऐसे सामाजिक कोढ़ को खत्म करने का बड़ा काम किया है, जिसे धर्मांतरण कहा जाता है। बलरामपुर में पिछले कई वर्षों से चल रहे छांगुर बाबा के इस धर्मांतरण के रैकेट का पदार्फाश होने के बाद अब जो जानकारियां सामने आ रही हैं, उससे पता चल रहा है कि यह रैकेट कितना व्यापक आकार ले चुका था और सीधे-सीधे भारत के बहुसंख्यक समाज के अस्तित्व पर हमले की साजिश रच रहा था। छांगुर पीर का यह ठिकाना उसके अंतरराष्ट्रीय रैकेट का केंद्र था और इसके जरिये उसने अलग-अलग तरीके से लाखों लोगों का धर्मांतरण कराया था। छांगुर बाबा का असली नाम जलालुद्दीन है और उसने पूरी दुनिया में अपने एजेंट नियुक्त कर रखे थे। छांगुर पीर के नाम से चर्चित इस सरगना ने न केवल धर्मांतरण का रैकेट चलाया, बल्कि देश के खिलाफ जासूसी भी करता था और आपराधिक घटनाओं में भी इसकी संलिप्तता पायी गयी है। छांगुर बाबा के खिलाफ अब यूपी एटीएस के साथ इडी ने भी जांच शुरू की है और इसके नेटवर्क के बारे में हर रोज नयी-नयी जानकारियां सामने आ रही हैं। इस शातिर दिमाग मौलाना का काला चिट्ठा पढ़ कर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्या है छांगुर बाबा का काला चिट्ठा और कितना फैला था इसका नेटवर्क, बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।

    उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में पिछले कुछ दिनों से जारी एक प्रशासनिक कार्रवाई ने देश के भीतर पिछले कई वर्षों से चल रहे एक खतरनाक रैकेट का पदार्फाश किया है। धर्मांतरण के इस पूरे नेटवर्क को यूपी की योगी सरकार ने ध्वस्त कर छांगुर बाबा के काले साम्राज्य को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।

    धर्मांतरण का रैकेट चलाता था छांगुर बाबा
    जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में बड़े पैमाने पर अवैध धर्मांतरण का धंधा चलाने वाला साजिशकर्ता है। वह खुद को ‘हाजी पीर जलालुद्दीन’, ‘पीर बाबा’ या ‘हजरत पीर’ कहलवाना पसंद करता था। छांगुर पीर के खिलाफ हिंदू लड़के-लड़कियों, गरीब और असहाय लोगों को बहला-फुसलाकर जबरन धर्मांतरण कराने और उनकी संपत्ति हड़पने के कई आरोप सामने हैं। इतना ही नहीं, छांगुर पीर को धर्मांतरण का नेटवर्क चलाने के लिए विदेशों से भी फंडिंग भी मिलती थी। छांगुर पीर के 10, 20 नहीं, बल्कि 40 से अधिक ऐसे बैंक खाते सामने आये, जिनमें लाखों-करोड़ों की राशि केवल हिंदुओं का धर्मांतरण और लड़कियों को बेचने के लिए जमा थी।

    गिरोह के रूप में काम करता था छांगुर बाबा
    छांगुर पीर अपना नेटवर्क बढ़ाने के लिए मुस्लिम के अलावा हिंदुओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने गिरोह का सदस्य बना लेता था और उनको राजा-रानी की तरह जिंदगी जीना, दौलत, लग्जरी गाड़ियां आदि का लालच देता था। छांगुर पीर के गिरोह में जिन हिंदुओं ने इस्लाम कबूल किया, वो लोग फिर अन्य हिंदुओं का ब्रेनवॉश कर इस्लाम कबूल करने के लिए प्रेरित करते थे और पैसे देते थे। धर्मांतरण मामले में जिन हिंदुओं ने छांगुर का आॅफर स्वीकार किया, उनको गिरोह में शामिल किया गया, लेकिन जिन हिंदुओं ने इसका विरोध किया, उनकों या तो धमकी दी गयी या फिर उन्हें मार दिया गया।

    ऐसे चालू किया छांगुर पीर ने धर्मांतरण का धंधा
    जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर पहले फेरीवाला था और गांव-गांव जाकर कपड़े और फिर अंगूठी और नग बेचता था। 2020 में कोरोना काल के दौरान मुंबई जाने पर छांगुर पीर की मुलाकात नवीन घनश्याम रोहरा और उसकी पत्नी नीतू रोहरा से हुई। नीतू और नवीन एक सिंधी परिवार से थे और मुंबई में उनकी 158 करोड़ की संपत्ति थी। सबसे पहले तो छांगुर पीर ने उन दोनों हिंदुओं का ब्रेनवॉश किया, जिसके बाद उन्होंने अपनी सारी संपत्ति छांगुर को बेच दी और बलरामपुर के मधुपुर गांव आकर छांगुर के साथ रहने लगे। नवीन और नीतू (जिन्हें बाद में नसरीन नाम दिया गया) के कारण ही छांगुर अमीर हुआ और धर्मांतरण का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर सका।

    ऐसे बनाया गिरोह और ये लोग हैं शामिल
    छांगुर पीर ने धर्मांतरण के लिए एक संगठित गिरोह बनाया था। इस गिरोह में उसके बेटे महबूब, भतीजा सबरोज, साले का बेटा शहाबुद्दीन, गोंडा का रिश्तेदार रमजान और बलरामपुर का रसीद शामिल थे। इसके अलावा, नीतू रोहरा उर्फ नसरीन और उसका पति नवीन रोहरा भी इस गिरोह के प्रमुख सदस्य थे। नसरीन छांगुर पीर की गतिविधियों का पूरा हिसाब-किताब रखती थी और धर्मांतरण के खेल को अंजाम देने के लिए स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करती थी। छांगुर पीर खुद कीपैड मोबाइल रखता था। नवीन, छांगुर और नसरीन को लग्जरी गाड़ियों में घुमाता था। जांच में पता चला है कि धर्मांतरण का यह नेटवर्क पूरे भारत के अलावा विदेशों में फैला हुआ था।

    अलग-अलग तरीके अपनाता था
    जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर धर्मांतरण के लिए कई तरीके अपनाता था। इनमें पहला था प्रेमजाल और निकाह। इसके तहत मुस्लिम युवक हिंदू लड़कियों को ‘अमित’ या ‘रुद्र शर्मा’ जैसे नाम बताकर प्रेमजाल में फंसाते थे। एक बार संबंध स्थापित होने पर हिंदु लड़कियों का ब्रेनवॉश कर उन्हें दरगाह ले जाकर धर्मांतरण करवाया जाता था और फिर निकाह होता था। लखनऊ की रहने वाली गुंजा गुप्ता को एक मुस्लिम लड़के ने अमित बनकर प्रेमजाल में फंसाया और उसको दरगाह ले जाकर ब्रेनवॉश कर अलीना अंसारी बना दिया। औरैया जिले की लड़की को मेराज अंसारी नाम के मुस्लिम युवक ने अपना नाम ‘रुद्र शर्मा’ बताकर प्रेमजाल में फंसाया और छांगुर के पास ले जाकर धर्मांतरण करवाने की कोशिश की।
    इस गिरोह का दूसरा तरीका लालच और धमकी देकर धर्मांतरण कराना था। छांगुर पीर और उसके गुर्गे उन लोगों को सबसे पहले निशाना बनाते थे, जो मुख्य तौर पर गरीब और असहाय हैं। इन्हीं लोगों को पैसे, विदेश में नौकरी, बंगले और लग्जरी गाड़ियों का लालच दिया जाता था। अगर कोई व्यक्ति छांगुर पीर के लालच में नहीं फंसता था और इस्लाम कबूल करने से मना कर देता था, तो उसे डराया-धमकाया जाता था। इसके अलाव झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी तक दी जाती थी। एक दलित व्यक्ति ने जब छांगुर पीर से मजदूरी मांगी, तो उसे काम देने की बजाय इस्लाम कबूल करने के लिए कहा गया। मालती देवी ने जब धर्मांतरण से इनकार किया, तो छांगुर पीर ने उस महिला पर चोरी का झूठा आरोप लगाकर पुलिस में शिकायत कर दी थी। इस तरह जो लोग छांगुर पीर की बात नहीं मानते थे, उन्हें परेशान किया जाता था। गिरोह के लोग ब्रेनवॉश और प्रचार भी करते थे। छांगुर पीर ने खुद की एक ‘शिजर-ए-तैयबा’ नामक किताब छपवायी, जिसमें ब्रेनवॉश कैसे किया जाता है, इसकी सारी जानकारी थी। यह किताब इस्लाम का प्रचार करती थी और इसमें ऐसे लोगों का जिक्र था, जो इस्लाम के लिए अपनी जान दे सकते थे।
    छांगुप पीर ने धर्मांतरण के लिए जाति के अनुसार फीस तय कर रखी थी। धर्मांतरण के लिए लड़कियों की जाति के हिसाब से एक फीस तय थी। ब्राह्मण, क्षत्रिय, सरदार लड़कियों के लिए 15-16 लाख, पिछड़ी जाति की लड़कियों के लिए 10-12 लाख और अन्य जातियों के लिए 8-10 लाख की रकम तय थी।
    जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर सिर्फ धर्मांतरण ही नहीं करवाता था, बल्कि वह सरकारी जमीन पर भी गैर-कानूनी तरीके से कब्जा करता था। वह कागजात में बदलाव करके जमीन को अपनी या अपने लोगों के नाम करवा लेता था। छांगुर पीर ने कुंडवा नाम के एक सरकारी तालाब को पूरी तरह से भरवा दिया था। तालाब को भरने के बाद उसने उस जगह पर अवैध तरीके से जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े बना दिये और उन्हें बेच दिया। यह सब सरकारी नियमों के खिलाफ था। छांगुर पीर अपने गैर-कानूनी कामों को छुपाने के लिए कुछ खास और कोड वर्ड का इस्तेमाल करता था, ताकि बाहर के लोग उसकी बातों को समझ न पायें। जब वह लड़कियों को अपने जाल में फंसाने की बात करता था, तो उन्हें ’प्रोजेक्ट’ कहता था। किसी के धर्मांतरण की प्रक्रिया को वह ‘मिट्टी पलटना’ कहता था। इसके अलावा यदि छांगुर पीर से कोई मिलने आता था तो इसे ‘दीदार करना’ कहा जाता था। किसी का ब्रेनवॉश करने या उसे अपने विचारों में ढालने को ‘काजल करना’ कहा जाता था। ये कोड वर्ड इसलिए इस्तेमाल किये जाते थे, ताकि छांगुर पीर के गलत काम किसी को आसानी से समझ न आयें और वह अपनी साजिशें चुपचाप चलाता रहे।

    इसाई मिशनरियों और आइएसआइ कनेक्शन
    यूपी एटीएस की जांच में सामने आया है कि छांगुर पीर अवैध धर्मांतरण के लिए नेपाल सीमा से सटे सात जिलों में सक्रिय कुछ इसाई मिशनरियों की मदद लेता था। वह इन मिशनरियों के स्वयंसेवकों से गरीब परिवारों की जानकारी लेकर उन्हें निशाना बनाता था। इसके अलावा छांगुर पीर के पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ से भी कनेक्शन सामने आये हैं। छांगुर पीर ‘मिशन आबाद’ का हिस्सा था, जिसके तहत धर्मांतरण के बदले उसे विदेश से पैसा मिलता था।

    एक सौ करोड़ की विदेशी फंडिंग ली है
    यूपी एटीएस की जांच के मुताबिक इस धर्मांतरण नेटवर्क को विदेशों से एक सौ करोड़ से अधिक की फंडिंग मिली है। गिरोह के पास 40 से अधिक बैंक खाते हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर लेन-देन हुआ है। खास तौर पर खाड़ी देशों से फंडिंग आने की बात सामने आयी है। छांगुर पीर ने सामाजिक संगठनों जैसे आस्वी इंटरप्राइजेज, आस्वी चैरिटेबल ट्रस्ट, आसिपिया हसनी हुसैनी कलेक्शन, बाबा ताजुद्दीन आस्वी बुटीक के नाम पर बैंक खाते खुलवाये और इनमें चंदा जुटा कर विदेशों में पैसा भेजा। छांगुर पीर इन पैसों का इस्तेमाल हिंदुओं का धर्मांतरण करने, लग्जरी गाड़ियां, बंगले और शोरूम खरीदने में करता था।

    पीड़ितों की सही संख्या का पता नहीं
    इस मामले के कुल पीड़ितों की संख्या स्पष्ट नहीं है, क्योंकि हर दिन एक नया खुलासा छांगुर पीर के खिलाफ सामने आ रहा है। यूपी एटीएस की गणना के अनुसार अब तक प्रदेश में हजारों हिंदुओं को मुस्लिम बनाया जा चुका है। 2022 में एक दलित व्यक्ति ने छांगुर पीर पर आरोप लगाया था कि उसने मजदूरी मांगने पर इस्लाम कबूल करने को कहा और ना करने पर धमकी दी थी। हाल ही में लखनऊ में 12 लोगों की घर वापसी करवायी गयी है, जिनका बलरामपुर के जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर ने धर्मांतरण करवाया था। इनमें मंडवी शर्मा (जैनब), सोनू रानी, मालती, रीना, पल्लवी, हरजीत कश्यप जैसे नाम शामिल थे। हरजीत कश्यप ने बताया कि छांगुर पीर ने नागपुर में सुपरवाइजर की नौकरी दिलाने का झांसा देकर धर्मांतरण कराया था और विरोध करने पर दो मुकदमे दर्ज करा दिये थे।

    नसरीन के साथ लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया
    यूपी एटीएस ने जलालुद्दीन उर्फ छांगुर पीर को उसकी सहयोगी नीतू रोहरा उर्फ नसरीन के साथ लखनऊ के एक होटल से गिरफ्तार किया, जहां वे 70 दिनों से मियां-बीवी बनकर रह रहे थे। छांगुर पीर की बलरामपुर के मधुपुर गांव स्थित आलीशान कोठी पर यूपी सरकार द्वारा बुलडोजर चलाया गया, क्योंकि इसे सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाया गया था।

    मुख्यमंत्री का सख्त रुख
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छांगुर की गतिविधियों को राष्ट्र विरोधी बताया है और आदेश दिया है कि आरोपित और उसके गिरोह से जुड़े सभी अपराधियों की संपत्तियां जब्त की जायेंगी और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी। इस पूरे रैकेट की यूपी एटीएस, पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (इडी) जांच कर रही हैं। इडी ने मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया है और छांगुर पीर और उसके साथियों से पूछताछ जारी है।

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