सुनील कुमार
लातेहार। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की तेतरियाखाड़ कोलियरी में पिछले 10 मई से सभी तरह का उत्पादन ठप पड़ा है। वहां न तो ओबी और न तो कोयले का उत्पादन हो पा रहा है। पुरानी आउटसोर्सिंग कंपनी मेसर्स अंबे माइनिंग का एक्सटेंशन अवार्ड 10 मई को समाप्त हो चुका है, जबकि नयी कंपनी मेसर्स रामलाल अग्रवाल वहां किसी भी प्रकार का उत्पादन नहीं कर पा रही है। कोलियरी बंद रहने से केंद्र एवं राज्य सरकारों को प्रतिदिन दो करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की वजह से तीन सप्ताह उत्पादन शून्य रहा ही, अब कुछ शर्तों पर काम करने की छूट मिली तो यह कोलियरी कोल इंडिया के कुछ अधिकारियों की दांवपेच में बंद हो गयी। आखिर इस पेंच के कौन किंगपिन है, इसे न तो जिला प्रशासन और ना ही प्रभावित विस्थापित जनता ही पता लगा पा रही है। जिला प्रशासन पूरी तरह कोरोना महामारी संक्रमण को नियंत्रित रखने में अपनी ताकत झोंके हुए हैं, तो दूसरी ओर कोल इंडिया प्रबंधन आंखें मूंद सो रहा है। बताते चलें कि तेतरियाखाड़ ओसीपी से साढ़े सात लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष कोयला उत्पादन का लक्ष्य है, जो प्रतिमाह करीब छह हजार मीट्रिक टन से भी अधिक होता है। वहीं, 11.5 लाख क्यूबिक टन ओबी का उत्पादन प्रतिवर्ष है। जिले की अर्थव्यवस्था की रीढ़ इस कोलियरी में उत्पादन शीघ्र शुरू नहीं हुआ, तो हजारों ट्रक मालिक टैक्स की मार झेलने को विवश होंगे। हालांकि राजहरा एरिया के महाप्रबंधक एमके अग्रवाल का पिछले सप्ताह तबादला होने से नयी आउटसोर्सिंग कंपनी मेसर्स रामलाल अग्रवाल को काम शुरू करने में असहूलियत हुई। लेकिन, सप्ताह दिनों के बीत जाने के बाद भी वहां स्थिति सामान्य नहीं हो पायी है। इधर कोलियरी में ग्रामीणों- विस्थापितों का आंदोलन लगातार जारी है। इसके कारण कंपनी की एचइएमएम (हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी) इंस्टॉल नहीं हो पा रही है ।
बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है : पीओ
तेतरियाखाड़ ओसीपी के परियोजना पदाधिकारी केडी प्रसाद का कहना है कि ओबी एवं कोयले का उत्पादन नहीं होने से बड़ी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इसके साथ ही उन्होंने शीघ्र उत्पादन की संभावना जतायी है।
नये महाप्रबंधक ने योगदान किया
सीसीएल की राजहरा एरिया के नये महाप्रबंधक के पद पर हर्षद दातार ने योगदान दिया है। वह हजारीबाग एरिया से यहां आये हैं।