रांची। झारखंड की राजनीति में सरकारी आवास को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव और बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद का धुर्वा स्थित सरकारी आवास जिला प्रशासन ने खाली करा लिया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से नाराज अंबा प्रसाद ने आवास के बाहर ही टेंट लगाकर विरोध जताया। छोटी दिवाली के दिन उन्होंने टेंट में दीये जलाए और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

मामला एचईसी परिसर स्थित सेक्टर-3 के सरकारी आवास संख्या F-44 का है। अंबा प्रसाद को यह आवास विधायक रहते हुए आवंटित किया गया था। बताया जा रहा है कि विधानसभा के समीप नए विधायक आवास बनने के बाद पुराने आवासों को दूसरे अधिकारियों को आवंटित किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत भवन निर्माण विभाग ने करीब 10 दिन पहले इस आवास को आईपीएस अधिकारी क्रांति गडिदेशी के नाम आवंटित कर दिया था।

अंबा की गैरमौजूदगी में खाली कराया गया आवास

7 नवंबर को जिला प्रशासन की टीम मजिस्ट्रेट मो. जफर हसनात की मौजूदगी में आवास खाली कराने पहुंची। उस समय अंबा प्रसाद या उनके परिवार का कोई सदस्य वहां मौजूद नहीं था। इसके बाद केयरटेकर की उपस्थिति में आवास खाली कराने की प्रक्रिया पूरी की गई। प्रशासन ने आवास में रखे सामान की सूची भी तैयार की।

प्रशासन का कहना है कि अंबा प्रसाद को पहले भी कई बार आवास खाली करने के लिए नोटिस दिया गया था। अंतिम नोटिस 2 नवंबर 2026 को जारी किया गया था और इसकी सूचना व्हाट्सऐप के माध्यम से भी दी गई थी। प्रशासन के मुताबिक, नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद कार्रवाई की गई।

आवास के बाहर टेंट लगाकर जताया विरोध

सरकारी आवास खाली कराए जाने से नाराज अंबा प्रसाद ने उसी मकान के बाहर टेंट लगवा लिया। उन्होंने छोटी दिवाली के दिन टेंट में ही दीप जलाए और मीडिया से बातचीत में अपनी नाराजगी जाहिर की।

अंबा प्रसाद ने सवाल उठाया कि दिवाली जैसे त्योहार के ठीक पहले उन्हें इस तरह आवास से बाहर क्यों किया गया? उन्होंने कहा कि त्योहार के दिन आखिर वह कहां जाएं। उनके अनुसार, परिवार में पहले से दिवाली की तैयारियां चल रही थीं और अचानक हुई इस कार्रवाई से परिवार को परेशानी का सामना करना पड़ा।

अंबा प्रसाद ने लगाया भेदभाव का आरोप

कांग्रेस नेत्री ने आरोप लगाया कि राज्य में कई पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री अब भी सरकारी आवासों में रह रहे हैं, लेकिन उनके मामले में ही जल्दबाजी में कार्रवाई की गई। उन्होंने इसे भेदभावपूर्ण और अमानवीय बताते हुए कहा कि उन्हें चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

अंबा प्रसाद ने यह भी कहा कि उन्हें आवास खाली कराने का नोटिस नहीं मिला। उन्होंने पूरे मामले को कांग्रेस पार्टी के संज्ञान में लाने की बात कही और उम्मीद जताई कि पार्टी इस मामले में उनका साथ देगी।

प्रशासन ने क्या दी सफाई?

दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि आवास पहले ही एक अधिकारी के नाम आवंटित किया जा चुका था। अंबा प्रसाद को कई बार आवास खाली करने के लिए कहा गया था। अंतिम नोटिस 2 नवंबर को जारी किया गया था। प्रशासन के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही आवास खाली कराने की कार्रवाई की गई।

फिलहाल इस मामले ने झारखंड की सियासत में राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। दिवाली से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई और अंबा प्रसाद के विरोध के बाद सरकार की आवास आवंटन नीति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

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