नई दिल्लीः 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन समेत कई शीर्ष नेता नई दिल्ली पहुंचे हैं। इन विदेशी मेहमानों की सुरक्षा भारत के लिए बड़ी जिम्मेदारी है। इसके लिए भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ संबंधित देशों की क्लोज-प्रोटेक्शन टीमों ने मिलकर बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है।

दिल्ली में एयरपोर्ट, होटल, भारत मंडपम, काफिले के मार्गों और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। इस अभियान में हजारों सुरक्षाकर्मियों के साथ एनएसजी, अर्धसैनिक बल, दिल्ली पुलिस, खुफिया एजेंसियां और आपातकालीन सेवाएं शामिल हैं।

तीन परतों में होती है विदेशी नेताओं की सुरक्षा

विशेष सुरक्षा समूह के पूर्व अधिकारी आनंद निंबाड़िया के अनुसार, विदेशी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा सामान्य तौर पर तीन प्रमुख परतों में बंटी होती है—

  1. क्लोज-प्रोटेक्शन टीम: यह सबसे अंदरूनी सुरक्षा घेरा होता है, जो संबंधित विदेशी नेता के साथ हर समय मौजूद रहता है।

  2. मध्य सुरक्षा परत: यह होटल, आयोजन स्थल और आवाजाही के दौरान नजदीकी क्षेत्र की सुरक्षा संभालती है।

  3. बाहरी सुरक्षा परत: इसमें सड़क, सार्वजनिक स्थान, आयोजन स्थल के आसपास का इलाका और व्यापक सुरक्षा माहौल भारतीय एजेंसियों के नियंत्रण में रहता है।

विदेशी सुरक्षा टीमें अपने नेताओं की सुरक्षा जरूरतों और संभावित खतरों से जुड़ी जानकारी भारतीय एजेंसियों के साथ साझा करती हैं। वहीं, भारतीय एजेंसियां स्थानीय सुरक्षा, खुफिया इनपुट और आपातकालीन संसाधनों की जानकारी उपलब्ध कराती हैं।

मेहमानों के आने से पहले शुरू हो जाती है तैयारी

विदेशी नेताओं की सुरक्षा उनके भारत पहुंचने के बाद ही शुरू नहीं होती। संबंधित देशों की एडवांस सिक्योरिटी टीमें पहले ही भारत पहुंचकर होटल, आयोजन स्थल, यात्रा मार्ग, प्रवेश और निकासी व्यवस्था तथा आपातकालीन प्रक्रियाओं का निरीक्षण करती हैं।

रूसी और चीनी सुरक्षा टीमें भी अपने राष्ट्रपतियों के ठहरने वाले होटलों में पहले से पहुंचकर भारतीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही थीं। होटलों में कर्मचारियों और प्रवेश व्यवस्था की जांच के साथ-साथ इमारतों के विभिन्न हिस्सों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

पुतिन, शी जिनपिंग और पेज़ेशकियन की सुरक्षा में खास सतर्कता

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सुरक्षा के लिए रूसी एडवांस टीम भारतीय एजेंसियों के साथ मिलकर होटल, काफिले और आवाजाही से जुड़ी तैयारियों में शामिल है। उनके प्रतिनिधिमंडल का काफिला भी सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सुरक्षा में भारत और चीन के बीच संवेदनशील संबंधों को देखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। दिल्ली पुलिस की विशेष इकाइयां, स्थानीय पुलिस और चीनी सुरक्षा अधिकारी आपसी तालमेल से काम कर रहे हैं। उनके ठहरने की जगह और आवाजाही वाले मार्गों पर निगरानी बढ़ाई गई है।

वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन की सुरक्षा भी ईरानी सुरक्षा दस्ते और भारतीय एजेंसियों के समन्वय पर आधारित है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव को देखते हुए उनके दौरे के दौरान खुफिया जानकारी और संभावित खतरे का आकलन विशेष महत्व रखता है।

काफिले के रास्तों पर विशेष निगरानी

विदेशी नेताओं की सुरक्षा में उनके काफिले के मार्गों की सुरक्षा सबसे अहम हिस्सों में से एक होती है। दिल्ली पुलिस ने शिखर सम्मेलन से जुड़ी आवाजाही के कारण प्रभावित होने वाले कई प्रमुख मार्गों की पहचान की है।

इन मार्गों पर—

  • सीसीटीवी कैमरों से निगरानी

  • संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की जांच

  • अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती

  • ड्रोन गतिविधियों पर नजर

  • ट्रैफिक प्रबंधन

  • पड़ोसी राज्यों के साथ खुफिया समन्वय

जैसे कदम उठाए गए हैं। काफिले के मार्गों पर सुरक्षा रिहर्सल भी की गई है, ताकि आवाजाही के दौरान किसी भी तरह की बाधा से निपटा जा सके।

भारत मंडपम और होटलों में एंटी-सैबोटेज जांच

ब्रिक्स सम्मेलन के मुख्य आयोजन स्थल भारत मंडपम और विदेशी नेताओं के होटलों में प्रवेश नियंत्रण, एंटी-सैबोटेज जांच और लगातार निगरानी की व्यवस्था की गई है। सुरक्षा जांच के लिए दिल्ली पुलिस की 100 से अधिक K9 डॉग स्क्वायड टीमों को भी तैनात किया गया है।

आयोजन स्थल और होटलों में एनएसजी तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों की भागीदारी से मॉक ड्रिल भी की गई है। इसका उद्देश्य किसी आपात स्थिति में अलग-अलग एजेंसियों के बीच तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

कमांड रूम और आपातकालीन तालमेल पर जोर

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इतने बड़े आयोजन में केवल जवानों की तैनाती पर्याप्त नहीं होती। सबसे महत्वपूर्ण होता है—खुफिया जानकारी का सही समय पर आदान-प्रदान और आपातकालीन स्थिति में तेज समन्वय।

भारत मंडपम, दिल्ली पुलिस मुख्यालय और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर कमांड रूम बनाए गए हैं। इन केंद्रों से काफिलों की आवाजाही, आयोजन स्थल, होटल और आसपास के सुरक्षा माहौल पर नजर रखी जा रही है।

पूर्व एसपीजी अधिकारी आनंद निंबाड़िया के अनुसार, विदेशी सुरक्षा टीमें अपने नेताओं की कमजोरियों और सुरक्षा जरूरतों को बेहतर समझती हैं, जबकि भारतीय एजेंसियां स्थानीय परिस्थितियों, खुफिया तंत्र और आपातकालीन संसाधनों से परिचित होती हैं। इसलिए सुरक्षा अभियान की सफलता दोनों पक्षों के बीच लगातार तालमेल पर निर्भर करती है।

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