नई दिल्ली। एसआईआर (SIR) विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार (25 सितंबर 2026) को देशभर में विरोध मार्च निकाला। कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के कार्यालयों तक प्रदर्शन किया और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए गए सभी फैसलों और वोटर लिस्ट में हुए बदलावों की स्वतंत्र जांच की भी मांग की है।

वेणुगोपाल बोले- ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह के आरोप

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बुधवार को हुए बड़े खुलासों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार का ‘देशद्रोह’ खुलकर सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हमारे लोकतंत्र के खिलाफ किए गए कामों के लिए गिरफ्तार किया जाना चाहिए। वेणुगोपाल ने साफ कहा कि कांग्रेस का विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार को पद से नहीं हटाया जाता, जेल नहीं भेजा जाता और पार्टी की सभी मांगें पूरी नहीं होतीं।

28 सितंबर को डिस्ट्रिक्ट कलेक्ट्रेट तक मार्च

कांग्रेस ने ऐलान किया है कि देश की सभी डिस्ट्रिक्ट कांग्रेस कमेटियां (DCCs) 28 सितंबर को अपने-अपने जिला कलेक्ट्रेट तक बड़े प्रोटेस्ट मार्च करेंगी। पार्टी का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे करोड़ों मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाया गया।

प्रमोद तिवारी का बीजेपी पर हमला

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी बेशर्मी से चुनाव आयोग का बचाव कर रही है। उन्होंने कहा, “यह दो गलत काम करने वालों का गठजोड़ है। लोगों की अदालत में ट्रायल शुरू हो गया है और जनता का फैसला किसी भी कानून से परे है। भारत के लोगों का गुस्सा ज्ञानेश कुमार और बीजेपी के खिलाफ फूट पड़ा है।”

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी हंगामा

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के दूसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने सदन के अंदर मुख्य चुनाव आयुक्त के तुरंत इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और बैनर लहराए।

पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने मांगी आजाद जांच

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और इसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोप है कि एसआईआर एक्सरसाइज ने 13 करोड़ मतदाताओं को हटा दिया, जिनमें से बंगाल के अनुभव के अनुसार 93 फीसदी हटाए गए मतदाता वैध और पात्र थे। कुरैशी के मुताबिक, इससे साफ है कि कुछ और बातें काम कर रही हैं।
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