मुंबई: महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी में एक चार मंजिला इमारत के अचानक गिरने से बड़ा हादसा हो गया। बालाजी नगर-गंगारामवाड़ी इलाके में स्थित कोहिनूर अपार्टमेंट के ढहने से अब तक नौ लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं, कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। बचाव दल लगातार राहत और खोज अभियान चला रहे हैं।

ठाणे जिले के उप जिलाधिकारी संदीप माने ने बताया कि हादसे में मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। सभी शवों को इंदिरा गांधी अस्पताल भेजा गया है, जबकि मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

संकरी गलियों के कारण शुरुआती राहत कार्य में अग्निशमन विभाग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बचाव दलों के पहुंचने के लिए पहले रास्ते में मौजूद एक पुरानी चॉल को जेसीबी की मदद से हटाया गया, जिसके बाद अभियान तेज किया जा सका। मौके पर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ठाणे आपदा प्रतिक्रिया बल (टीडीआरएफ), स्थानीय अग्निशमन विभाग और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से बचाव कार्य में जुटी हैं।

घटनास्थल पर डॉग स्क्वॉड, चार फायर इंजन, दो एंबुलेंस और भारी मशीनरी तैनात की गई है। सुरक्षाबल और बचावकर्मी मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

भिवंडी नगर निगम के सहायक आयुक्त अरविंद घोगरे ने बताया कि कोहिनूर अपार्टमेंट का निर्माण वर्ष 2012 में हुआ था। इमारत को पहले ही खतरनाक घोषित किया जा चुका था और महानगरपालिका की ओर से नोटिस भी जारी किया गया था। उन्होंने बताया कि इमारत के एक विंग के भूतल पर क्षतिग्रस्त पिलरों की मरम्मत का काम चल रहा था।

जानकारी के अनुसार, गुरुवार शाम करीब छह बजे इमारत में दरारें दिखाई देने लगी थीं। इसके बाद रात करीब आठ बजे इमारत के झुकने की सूचना मिलने पर प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया। हालांकि, कुछ लोग बाहर नहीं निकल सके और देर रात इमारत पूरी तरह ढह गई।

स्थानीय विधायक महेश चौघुले ने बताया कि एनडीआरएफ, टीडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीमें मिलकर राहत अभियान चला रही हैं। मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना प्रशासन की पहली प्राथमिकता है।

हादसे में प्रभावित एक परिवार के सदस्य अरविंद गुप्ता ने बताया कि वह और उनकी पत्नी समय रहते बाहर निकल गए, लेकिन उनकी बेटी कोमल मलबे में दब गई। अब तक उसका कोई पता नहीं चल सका है, जिससे परिवार चिंतित है।

भिवंडी नगर निगम के महापौर नारायण चौधरी ने बताया कि प्रभावित परिवारों के लिए आसपास के सामुदायिक भवनों और स्कूलों में अस्थायी रहने की व्यवस्था की गई है। साथ ही शहर की अन्य जर्जर और खतरनाक इमारतों को खाली कराने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

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