यरुशलम: इजरायल के आम चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर उलझी हुई नजर आ रही है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। ताजा एग्जिट पोल में दोनों खेमे बहुमत के आंकड़े से पीछे हैं। ऐसे में अगली सरकार के गठन को लेकर बातचीत लंबी खिंच सकती है।

इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है। अलग-अलग टीवी चैनलों के एग्जिट पोल में नेतन्याहू और विपक्षी गठबंधन के बीच सीटों के अनुमान में अंतर है, लेकिन किसी भी खेमे को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा।

एग्जिट पोल में क्या है तस्वीर?

इजरायल के प्रमुख टीवी चैनलों के अनुमानों में नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन लगभग 51 से 52 सीटों पर दिखाई दे रहा है। वहीं, गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को करीब 49 से 51 सीटें मिलने का अनुमान है। अरब दलों को संयुक्त रूप से लगभग 17 से 18 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।

इन आंकड़ों के मुताबिक, सरकार बनाने के लिए दोनों प्रमुख गठबंधनों को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी। हालांकि, एग्जिट पोल अंतिम चुनाव परिणाम नहीं होते। वास्तविक तस्वीर मतगणना पूरी होने और आधिकारिक नतीजे घोषित होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती

बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेताओं में शामिल हैं। इस चुनाव में उन्हें सुरक्षा, युद्ध और सरकार के कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों का सामना करना पड़ा।

नेतन्याहू ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए दक्षिणपंथी सरकार बनाने की जरूरत पर जोर दिया। दूसरी ओर, विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट ने दावा किया कि जनता ने नेतन्याहू के नेतृत्व के खिलाफ अपना मत दिया है।

हालांकि, विपक्ष को बढ़त मिलने के शुरुआती अनुमानों के बाद बाद के एग्जिट पोल में मुकाबला लगभग बराबरी पर आ गया। इससे नेतन्याहू की सत्ता जाने की संभावना के साथ-साथ उनके दोबारा सरकार बनाने की संभावनाएं भी खुली हुई हैं।

सरकार गठन में अरब दलों की भूमिका अहम

इस चुनाव में अरब दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। एग्जिट पोल में इन दलों को अच्छी संख्या में सीटें मिलने का अनुमान है। यदि नेतन्याहू और विपक्षी गठबंधन में से कोई भी 61 सीटों का समर्थन नहीं जुटा पाता, तो छोटे दल सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, विपक्षी गठबंधन के कुछ नेताओं ने अरब दलों के साथ सरकार बनाने को लेकर पहले आपत्तियां जताई हैं। इससे सरकार गठन की बातचीत और जटिल हो सकती है।

नेतन्याहू ने भी अरब दलों के समर्थन पर निर्भर सरकार बनाने का विरोध किया है। ऐसे में दोनों खेमों के लिए बहुमत जुटाना आसान नहीं होगा।

दो दशक से ज्यादा समय में सबसे अधिक मतदान

इजरायल के केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान प्रतिशत लगभग 77.7 फीसदी रहा। यह दो दशक से अधिक समय में सबसे ऊंचे मतदान स्तरों में से एक है। चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाताओं की भागीदारी ने इसकी अहमियत को और बढ़ा दिया है।

यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले और उसके बाद गाजा, लेबनान तथा ईरान से जुड़े युद्धों के बाद पहला आम चुनाव है। सुरक्षा नीति, सरकार की जवाबदेही और देश के भविष्य को लेकर मतदाताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

अब क्या होगा?

यदि कोई गठबंधन स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं करता, तो इजरायल में सरकार बनाने के लिए राजनीतिक दलों को आपसी बातचीत करनी होगी। राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग उस उम्मीदवार को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास संसद में पर्याप्त समर्थन जुटाने की बेहतर संभावना होगी।

ऐसे में आने वाले दिनों में गठबंधन की बातचीत, छोटे दलों का रुख और अंतिम चुनाव परिणाम बेहद महत्वपूर्ण होंगे। फिलहाल, इजरायल की राजनीति में अनिश्चितता बनी हुई है और यह तय नहीं है कि नेतन्याहू सत्ता में बने रहेंगे या विपक्ष नई सरकार बनाने में सफल होगा।

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