रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते ने अब झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने निचली अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में नियमित जमानत याचिका दाखिल की है। याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी निर्धारित नहीं हुई है।

इससे पहले रांची स्थित सीआईडी की विशेष अदालत ने 5 सितंबर को एल. खियांग्ते की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इससे पहले 3 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

बचाव पक्ष ने कहा- कोई ठोस साक्ष्य नहीं

निचली अदालत में सुनवाई के दौरान खियांग्ते की ओर से दलील दी गई थी कि जांच के दौरान उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा था कि जांच एजेंसी की छापेमारी के दौरान उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक दस्तावेज या सामग्री बरामद नहीं हुई। इन्हीं आधारों पर अदालत से जमानत देने की मांग की गई थी।

CID ने TDPL को परीक्षा का काम देने में भूमिका का लगाया आरोप

दूसरी ओर, सीआईडी ने जांच के दौरान एल. खियांग्ते की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, परीक्षा आयोजित कराने का काम टीडीपीएल नामक निजी कंपनी को दिए जाने में खियांग्ते की भूमिका थी। सीआईडी का आरोप है कि कंपनी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर सवाल थे और इसकी जानकारी होने के बावजूद उचित कार्रवाई नहीं की गई।

जांच एजेंसी ने खियांग्ते पर टीडीपीएल से कथित तौर पर करीब दो करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप भी लगाया है। ये सभी आरोप जांच का हिस्सा हैं और मामले में अदालत के अंतिम निर्णय तक इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाएगा।

10 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी

सीआईडी ने एल. खियांग्ते को 10 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। जेपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान उनका नाम सामने आया था।

अब हाई कोर्ट में दाखिल जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद यह तय होगा कि एल. खियांग्ते को इस मामले में राहत मिलती है या नहीं।

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