नई दिल्ली: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के बयान पर तंज कसते हुए खेड़ा ने कहा कि पद्म भूषण तो बहुत छोटी चीज है, उन्हें प्रधानमंत्री ही बना देना चाहिए।
समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्हें कम से कम पद्म भूषण मिलना चाहिए। इसके जवाब में खेड़ा ने मीडिया से बातचीत के दौरान यह व्यंग्य किया।
इस्तीफे की मांग
एसआईआर विवाद के बीच सीईसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली सुप्रीम कोर्ट की याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा उनके अपने हित में होगा। उन्होंने कहा, “उन्हें खुद इस्तीफा दे देना चाहिए। उनकी सुरक्षा, उनके हित, उनके भविष्य की सुरक्षा इसी में है। जब मैं सुरक्षा कहता हूं, तो मेरा मतलब उनके भविष्य की सुरक्षा से है, क्योंकि अगर वह सरकारी गवाह बन जाते हैं तो वह सुरक्षित रहेंगे। नहीं तो, उनका आने वाला समय जेल में बीतेगा।”
VIP वोटर फीचर पर सवाल
खेड़ा ने एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच चुनाव आयोग ने बीएलओ ऐप में ‘मार्क वीआईपी’ फीचर शुरू किया। उन्होंने कहा कि यह फीचर बूथ लेवल अधिकारियों को कुछ मतदाताओं को वीआईपी के तौर पर मार्क करने की सुविधा देता है।
उन्होंने सवाल किया, “ये किस तरह का वीआईपी कल्चर है? पीएम मोदी ने बार-बार खुद को ‘प्रधान सेवक’ बताया और दावा किया कि उनकी सरकार ने वीआईपी कल्चर खत्म कर दिया है। तो फिर किसके कहने पर चुनाव आयोग ऐसा सिस्टम चला रहा है, जो वीआईपी वोटरों और आम वोटरों के बीच फर्क करता है?”
खेड़ा ने दावा किया कि चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया गया था कि वे मंत्रियों और उनके परिवारों, जजों, वकीलों, मशहूर हस्तियों, आईएएस-आईपीएस अफसरों, नौकरशाहों, मीडियाकर्मियों और समाज सेवकों की पहचान वीआईपी के तौर पर करें।
‘अंदर से आवाजें उठ रही हैं’
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा कि सिस्टम के अंदर से चिंताएं सामने आ रही हैं। चुनाव आयोग के अंदर से आवाजें आ रही हैं। सरकार के अंदर से आवाजें उठ रही हैं। अगर मोदी जी और शाह अभी नहीं सुन पा रहे हैं, तो उन्हें अपने कान चेक करवाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि एनडीए गठबंधन में कुछ पार्टियों के यह कहने पर कि भाजपा को जवाब देना चाहिए, “अभी बहुत लोग बोलेंगे। भाजपा के अंदर से भी आवाजें उठेंगी। इंतजार करो।”


