रांची: झारखंड सरकार के गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी बनकर पुलिस अधिकारियों पर कथित तौर पर धौंस जमाने वाले एक व्यक्ति को पिठोरिया थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान अरुण कुमार अग्रवाल (52) के रूप में हुई है। वह खुद को अजय कुमार, अंडर सेक्रेटरी होम बताकर अधिकारियों से संपर्क करता था। उसके पास से फर्जी पहचान पत्र, सरकारी कार पास और विभिन्न विभागों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं।

एक साल से खुद को बता रहा था अंडर सेक्रेटरी

पुलिस के मुताबिक, आरोपी करीब एक साल से पिठोरिया थाना प्रभारी को फोन कर खुद को गृह विभाग का अंडर सेक्रेटरी बताता था। वह कथित तौर पर कहता था कि उसकी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से बात होती है और उसी की सिफारिश पर थाना प्रभारी की पोस्टिंग हुई है।

पुलिस का आरोप है कि वह छोटे-मोटे मामलों में गैरकानूनी काम कराने का दबाव बनाता था और अपने प्रभाव का हवाला देकर पुलिस अधिकारियों को प्रभावित करने की कोशिश करता था।

चंदवे में पहुंची पुलिस, कार देखकर हुआ शक

21 सितंबर को आरोपी ने थाना प्रभारी को फोन कर चंदवे स्थित अपने घर के बाहर कुछ लोगों के हंगामा करने की जानकारी दी। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहां आरोपी की कार देखकर पुलिस को संदेह हुआ।

पुलिस के अनुसार, कार के डैशबोर्ड पर लाल-नीले रंग का पुलिस लोगो वाला बोर्ड लगा था। विंडशील्ड पर गृह विभाग और झारखंड सरकार से संबंधित कार पास और स्टीकर भी लगे हुए थे। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को दस्तावेजों के साथ थाने बुलाया।

ID मांगी तो खुल गई पोल

22 सितंबर को आरोपी पिठोरिया थाना पहुंचा। पुलिस ने उससे गृह विभाग का आधिकारिक पहचान पत्र मांगा, लेकिन वह वैध सरकारी ID प्रस्तुत नहीं कर सका।

इसके बाद पुलिस ने गृह विभाग से सत्यापन कराया। जांच में सामने आया कि अजय कुमार नाम का कोई व्यक्ति गृह विभाग में अंडर सेक्रेटरी के पद पर तैनात नहीं है। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी ने अपनी पहचान अरुण कुमार अग्रवाल के रूप में बताई।

कार से मिले फर्जी ID और सरकारी दस्तावेज

पुलिस के अनुसार, आरोपी की कार और मोबाइल फोन की जांच में कई आपत्तिजनक सामग्री मिली। इनमें गृह विभाग और झारखंड पुलिस के नाम से बने फर्जी पहचान पत्र, राजभवन और मंत्रालय के कार पास तथा विभिन्न सरकारी दस्तावेजों की प्रतियां शामिल हैं।

पुलिस ने दो मोबाइल फोन और ब्रेजा कार भी जब्त की है। बरामद सामग्री में कथित तौर पर अजय कुमार, अवर सचिव गृह विभाग और अजय कुमार, डीएसपी (स्पेशल ब्रांच) के नाम से बने फोटोयुक्त पहचान पत्र भी शामिल हैं।

गोपनीय दस्तावेज मिलने की भी बात

तलाशी के दौरान पुलिस को गृह विभाग और विशेष शाखा से जुड़े कुछ दस्तावेजों की प्रतियां भी मिली हैं। इनमें नक्सली संगठनों से संबंधित पुरस्कार राशि और पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति से जुड़े दस्तावेज शामिल होने की बात सामने आई है।

पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपी के पास ये दस्तावेज कैसे पहुंचे और उसने इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया। साथ ही, उसके मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल सामग्री की भी जांच की जा रही है।

ट्रैफिक पुलिस से बचने के लिए लगाता था लोगो!

पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी ने बताया कि कार पर पुलिस का लोगो लगाने से ट्रैफिक पुलिस उसे नहीं रोकती थी और पार्किंग शुल्क से भी बच जाता था। मंत्रालय से जुड़े कार पास और स्टीकर के जरिए वह सरकारी परिसर में प्रवेश के दौरान रोक-टोक से बचने की कोशिश करता था।

Official Secrets Act के तहत भी केस

इस मामले में पिठोरिया थाना कांड संख्या 97/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के अलावा Official Secrets Act, 1923 की धारा 3, 5 और 6 के तहत भी मामला दर्ज किया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

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