रांची: रांची रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करने की योजना पर काम जारी है। करीब 447 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजना के बीच दुर्गा पूजा के मद्देनजर स्टेशन के दक्षिणी प्रवेश द्वार यानी साउथ गेट को अस्थायी रूप से खोल दिया गया है। यहां दो टिकट काउंटर और चार ऑटोमैटिक टिकट वेंडिंग मशीन (एटीवीएम) शुरू की गई हैं। मोबाइल यूटीएस सहायकों की व्यवस्था भी की गई है, ताकि यात्रियों को अनारक्षित टिकट लेने में सहूलियत हो और मुख्य प्रवेश द्वार पर भीड़ का दबाव कम किया जा सके।
हालांकि, स्टेशन को एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस करने की पूरी योजना अभी निर्माण के दौर में है। ऐसे में सवाल है कि फिलहाल यात्रियों को कितनी राहत मिली है और किन सुविधाओं के लिए उन्हें अभी इंतजार करना होगा।
साउथ गेट खुलने से यात्रियों को क्या फायदा?
दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ के दौरान रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है। इसे देखते हुए रांची रेलवे स्टेशन के दक्षिणी छोर पर वैकल्पिक प्रवेश व्यवस्था शुरू की गई है। इसका उद्देश्य यात्रियों की आवाजाही को अलग-अलग प्रवेश द्वारों के माध्यम से व्यवस्थित करना और मुख्य गेट पर भीड़ कम करना है।
साउथ गेट की ओर दो टिकट बुकिंग काउंटर और चार एटीवीएम शुरू होने से अनारक्षित टिकट लेने वाले यात्रियों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। मोबाइल यूटीएस सहायकों की मदद से भी टिकट लेने की प्रक्रिया आसान बनाने का प्रयास किया गया है।
इस व्यवस्था का लाभ खासकर प्लेटफॉर्म संख्या छह से ट्रेन पकड़ने वाले यात्रियों को मिल सकता है। दक्षिणी प्रवेश द्वार से प्लेटफॉर्म छह तक पहुंचने की सुविधा होने के कारण उन्हें मुख्य प्रवेश द्वार की ओर जाने की जरूरत कम पड़ेगी। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि भीड़ के समय प्रवेश मार्ग और टिकटिंग व्यवस्था कितनी सुचारु रहती है।
सुरक्षा के लिए स्कैनिंग मशीन की व्यवस्था
त्योहारों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण रेलवे के सामने बड़ी चुनौती होती है। साउथ टर्मिनल की ओर आने वाले यात्रियों के सामान की जांच के लिए स्कैनिंग मशीन की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही स्टेशन परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भीड़ के दौरान यात्रियों को प्रवेश द्वार से प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में परेशानी न हो, इसके लिए आवाजाही का प्रबंधन जरूरी है। ट्रेनों में चढ़ने और उतरने के समय प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करना भी अहम होगा।
वेटिंग हॉल से फूड कोर्ट तक की योजना
रांची रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास का उद्देश्य केवल आधुनिक इमारत तैयार करना नहीं, बल्कि यात्रियों को एक ही परिसर में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है। परियोजना के तहत आधुनिक यात्री प्रतीक्षालय, वातानुकूलित वेटिंग हॉल, फूड कोर्ट, कैफेटेरिया और एग्जीक्यूटिव लाउंज जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
यात्रियों के ठहरने के लिए 100 बेड की डॉरमेट्री प्रस्तावित है। इसमें महिला और पुरुष यात्रियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था की योजना है। इसके अलावा स्वच्छ शौचालय, शिशु को दूध पिलाने के लिए अलग कक्ष और दुकानों जैसी सुविधाएं भी परियोजना का हिस्सा हैं।
इन सुविधाओं का पूरा लाभ निर्माण कार्य और संबंधित व्यवस्थाओं के पूरा होने के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल, साउथ गेट पर शुरू की गई सुविधाएं त्योहार के दौरान यात्रियों को तत्काल राहत देने के उद्देश्य से उपलब्ध कराई गई हैं।
लिफ्ट, एस्केलेटर और पार्किंग से आसान होगी आवाजाही
स्टेशन पुनर्विकास परियोजना में यात्रियों की आवाजाही को सुगम बनाने पर भी जोर है। लिफ्ट और एस्केलेटर जैसी सुविधाओं से बुजुर्गों, दिव्यांगों और भारी सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
इसके साथ ही पार्किंग, प्रवेश और निकास मार्गों को बेहतर बनाने की योजना है। ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान की जानकारी देने वाले डिजिटल डिस्प्ले और निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे भी आधुनिक स्टेशन व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
परियोजना के उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पुनर्विकास के बाद स्टेशन को एक समय में 35 हजार से अधिक यात्रियों को संभालने योग्य बनाने का लक्ष्य है। लेकिन इसके लिए केवल भवन निर्माण पर्याप्त नहीं होगा। संपर्क मार्ग, पार्किंग, संकेतक, सुरक्षा और प्लेटफॉर्म तक पहुंचने की व्यवस्था का प्रभावी संचालन भी जरूरी होगा।
दिसंबर 2026 तक दक्षिणी टर्मिनल पूरा करने का लक्ष्य
फिलहाल, दुर्गा पूजा को देखते हुए दक्षिणी टर्मिनल को अस्थायी रूप से खोला गया है। यहां कुछ यात्री सुविधाएं शुरू कर दी गई हैं, जबकि पुनर्विकास का काम अभी जारी है। संपर्क मार्ग और अन्य निर्माण कार्य पूरे होने के बाद इस हिस्से का अधिक व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दक्षिणी टर्मिनल का निर्माण दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। रांची रेल मंडल की सीनियर डीसीएम श्रेया सिंह ने बताया कि रेल मंत्रालय के निर्देशों के तहत यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए काम किया जा रहा है। दुर्गा पूजा को देखते हुए अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं और साउथ टर्मिनल को अस्थायी रूप से खोला गया है।
उन्होंने कहा कि स्टेशन के पुनर्विकास का काम अभी जारी है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद यात्रियों को प्रस्तावित सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
क्या अभी से एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं?
रांची रेलवे स्टेशन को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करने की योजना से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। साउथ गेट खुलने, टिकट काउंटर और एटीवीएम शुरू होने से त्योहार के दौरान भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, फिलहाल पूरे स्टेशन को एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस नहीं माना जा सकता, क्योंकि पुनर्विकास का काम जारी है। स्टेशन की वास्तविक उपयोगिता इस बात से तय होगी कि यात्रियों को टिकट लेने, प्लेटफॉर्म तक पहुंचने, ट्रेन पकड़ने, पार्किंग और सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतों में कितनी सहूलियत मिलती है।
फिलहाल, रांची रेलवे स्टेशन बदलाव के दौर में है। इसकी नई पहचान केवल आधुनिक और भव्य भवन से नहीं, बल्कि यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और उनके प्रभावी संचालन से तय होगी।



