साहिबगंज: सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न आवास योजनाएं चला रही है। इसके बावजूद कई परिवार आज भी बुनियादी आवास सुविधा के इंतजार में हैं। ऐसा ही एक मामला झारखंड के साहिबगंज जिले से सामने आया है, जहां आवास योजना में नाम आने के करीब दो साल बाद भी एक जरूरतमंद परिवार को पक्का मकान नहीं मिल सका है।
मंडरो प्रखंड की बसाहा पंचायत के कोद टोला गांव निवासी फागु हेंब्रम अपनी दूसरी पत्नी के साथ बांस, पत्तों, मिट्टी और प्लास्टिक से बनी झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। परिवार को उम्मीद थी कि आवास योजना का लाभ मिलने के बाद उनका अपना पक्का घर होगा, लेकिन अब तक यह सपना पूरा नहीं हो सका है।
बांस और पत्तों की झोपड़ी में गुजर रही जिंदगी
फागु हेंब्रम का घर बांस और पत्तों से बना है। दीवारों पर मिट्टी का लेप है, जबकि छत को ताड़ के पत्तों और प्लास्टिक से ढका गया है। ऐसे अस्थायी घर में परिवार को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। बारिश और तेज हवा के दौरान परेशानियां बढ़ जाती हैं। ठंड के मौसम में भी परिवार को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
फागु हेंब्रम के अनुसार, करीब दो साल पहले आवास योजना में उनका नाम शामिल हुआ था। इससे उन्हें उम्मीद जगी थी कि जल्द ही परिवार को पक्का मकान मिल जाएगा। हालांकि, योजना में नाम आने के बावजूद अब तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया है।
सात महीने पहले जमा किए गए जरूरी कागजात
आवास योजना का लाभ नहीं मिलने के मामले में वार्ड सदस्य ने बताया कि करीब सात महीने पहले लाभुक के सभी जरूरी दस्तावेज जमा करा दिए गए थे। इसके अलावा, फागु हेंब्रम को बैंक जाकर अपने खाते की जांच कराने के लिए भी कहा गया था।
वहीं, फागु हेंब्रम का कहना है कि उनके बैंक खाते में अब तक आवास योजना की राशि नहीं आई है। राशि नहीं मिलने के कारण मकान का निर्माण शुरू नहीं हो पा रहा है।
जांच के बाद स्पष्ट होगी राशि नहीं मिलने की वजह
वार्ड सदस्य के अनुसार, लाभुक के खाते में राशि नहीं आने के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल, परिवार पक्के मकान की उम्मीद लगाए बैठा है।
यह मामला आवास योजनाओं के क्रियान्वयन और जरूरतमंद लाभुकों तक समय पर सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी मामले की जांच कर फागु हेंब्रम को आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

