चेन्नई। तमिलनाडु सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के अपने पहले पूर्ण बजट को अंतिम रूप देने में जुट गई है। मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में लगातार दूसरे दिन विभागवार समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न विभागों की योजनाओं, बजटीय जरूरतों और नई घोषणाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय सरकार पहली बार पूर्ण बजट पेश करने जा रही है, इसलिए इसे सरकार की प्राथमिकताओं और अगले पांच वर्षों के विकास एजेंडे का महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु विधानसभा का अगला सत्र जुलाई के अंतिम सप्ताह या अगस्त के पहले सप्ताह में बुलाया जा सकता है। इसी दौरान वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश किए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए सभी विभागों से योजनाओं और वित्तीय आवश्यकताओं का अंतिम आकलन कराया जा रहा है, ताकि बजट दस्तावेज को समय पर तैयार किया जा सके।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार का बजट सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के चुनावी घोषणा पत्र की प्रमुख घोषणाओं को जमीन पर उतारने वाला हो सकता है। सरकार महिलाओं को प्रति माह 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता देने की योजना और प्रत्येक परिवार को साल में छह रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने जैसे वादों पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि इन योजनाओं को लागू करने से पहले उनके वित्तीय प्रभाव और राजकोषीय बोझ का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है।

शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री विजय ने ग्रामीण विकास और राजमार्ग विभाग के अधिकारियों के साथ लंबी चर्चा की। बैठक में ग्रामीण सड़कों के विस्तार, पंचायत स्तर पर आधारभूत सुविधाओं के विकास, पेयजल, स्वच्छता, रोजगार, संपर्क मार्गों और राजमार्गों के आधुनिकीकरण से जुड़े प्रस्तावों की समीक्षा की गई। साथ ही सड़क निर्माण परियोजनाओं, नए पुलों और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधानों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक विभागवार समीक्षा बैठकों का यह दौर 22 जुलाई तक जारी रहेगा। इस दौरान सभी प्रमुख विभागों की योजनाओं, लंबित परियोजनाओं और आगामी वित्तीय जरूरतों का आकलन किया जाएगा। इन्हीं बैठकों से मिले सुझावों के आधार पर वित्त विभाग अंतिम बजट तैयार करेगा।

सरकार का फोकस अधूरी विकास परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर है। माना जा रहा है कि आगामी बजट में विकास, सामाजिक कल्याण और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देगी।

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