नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ठोस नतीजों की उम्मीदों के बीच समाप्त हो गया है। सम्मेलन के दूसरे और आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा कि टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स का हथियार के रूप में इस्तेमाल करना गलत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम दुनिया के विकास पर असर डालते हैं। पीएम मोदी ने दुनिया के सामने मौजूद संकटों और उनसे निपटने के उपायों के बारे में भी अपनी बात रखी।
भारत ने ब्रिक्स के तमाम प्रयासों को चार स्तंभों पर केंद्रित किया है, जिनके नाम लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता हैं। हाल के दिनों में दुनिया ने सप्लाई चेन के संकट को देखा है। भोजन, ऊर्जा सुरक्षा, बुनियादी ढांचा और उत्पादन नेटवर्क में सप्लाई चेन के महत्व को देखते हुए सप्लाई चेन रेजिलियंस फ्रेमवर्क का प्रस्ताव रखा गया। इसका मकसद आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाना और भविष्य के संकटों के लिए तैयार रहना है।
दूसरी तरफ तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था में तकनीक के महत्व को पहचानते हुए ब्रिक्स को इनोवेशन इकोसिस्टम से जोड़ने के लिए सहयोग की जरूरत पर जोर दिया गया। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार में तकनीक और इनोवेशन इकोसिस्टम को जोड़ने का प्रस्ताव सामने आया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच तकनीकी साझेदारी और नवाचार को बढ़ावा देना है।
व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए पेपरलेस व्यापार और डिजिटल सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल यानी सहयोग पर जोर दिया गया है। इससे व्यापार प्रक्रियाएं आसान, पारदर्शी और तेज बन सकती हैं। सम्मेलन में चौथे स्तंभ के रूप में स्थिरता को प्रमुखता दी गई। बिजनेस की स्थिरता को बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, ट्रांसपोर्टेशन और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा का होना जरूरी माना गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को आम लोगों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया। उनका मानना है कि इस तरह के मंचों का लाभ सिर्फ सरकारों और बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम नागरिकों तक भी पहुंचना चाहिए। सम्मेलन में सहयोग, नवाचार और स्थिरता के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों से मिलकर निपटने की दिशा में साझा प्रयासों पर सहमति बनी। कुल मिलाकर, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ने दुनिया के सामने मौजूद आर्थिक और तकनीकी चुनौतियों के बीच सहयोग बढ़ाने का संदेश दिया है।



