विशेष संवाददाता
रांची। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को चाइबासा में विजय संकल्प महारैली को संबोधित करने के अलावा पार्टी को जबरदस्त खुराक पिला दी। उनके झारखंड दौरे के कई मायने हैं। यदि एक वाक्य में कहा जाये, तो वह चाइबासा की विजय संकल्प महारैली में अपने 28 मिनट के संबोधन में झारखंड की 14 सीटों को नाप गये। उन्होंने साफ कर दिया कि इस बार भाजपा का लक्ष्य राज्य की सभी संसदीय सीटें जीतना है। उनकी झारखंड यात्रा से यह भी साफ हुआ कि पिछले विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार को भाजपा ने सबक के रूप में लिया है। इसलिए इस बार उसका ध्यान सिंहभूम और राजमहल संसदीय सीटों के अलावा विधानसभा की आदिवासी बहुल सीटों पर है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित 28 सीटों में से महज दो सीटें मिली थीं। इस स्थिति में सुधार के लिए अमित शाह ने प्रदेश भाजपा को टास्क दिया। उन्होंने जिस तरह से सरकार बदलने और कमल खिलाने की बात की, वह इस बात का संकेत है कि अमित शाह कुछ भी भूले नहीं हैं।
बाद में कोर कमेटी की बैठक में अमित शाह ने जीत के मंत्र भी बताये। साथ ही चाइबासा में पार्टी को जीत दिलाने की जिम्मेदारी उन्होंने अर्जुन मुंडा को सौंपी। बैठक में विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के कारणों पर मंथन किया गया और इस बार कोई चूक नहीं हो, इसकी रणनीति तय की गयी।
अमित शाह ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव का एजेंडा भी चाइबासा से तय कर दिया। अपने संबोधन में जिस तरह उन्होंने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया, उससे साफ हो गया कि भाजपा अब इसी को लेकर मैदान में जायेगी। इसके अलावा आदिवासी अस्मिता के नाम पर भी भाजपा वोट मांगेगी। अमित शाह के दौरे का कितना असर पड़ेगा, वह तो आगे आने वाले दिनों में दिखेगा, लेकिन इतना तय है कि उन्होंने भाजपा में नयी ऊर्जा का संचार जरूर कर दिया है।

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