• नहीं हो सकता गांडेय विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव
• राज्य का सत्ता पक्ष खड़ा करना चाहता है संवैधानिक संकट
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में प्रदेश भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की। पिछले दिनों गांडेय विधानसभा उपचुनाव कराये जाने की स्थिति में उत्पन्न होने वाले संवैधानिक संकट से संबंधित भेजे गये पत्र की चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महामंत्री डॉ प्रदीप वर्मा, बालमुकुंद सहाय भी शामिल थे।

मीडिया से बात करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सत्तापक्ष के एक विधायक जो गांडेय विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दबाव देकर इस्तीफा करवाया। सरफराज अहमद पूरी तरह स्वस्थ हैं। वे देश से बाहर भी नहीं जा रहे हैं। ऐसे में उनका इस्तीफा अकारण नहीं हुआ, बल्कि मुख्यमंत्री अपनी जेल यात्रा के पूर्व लालू प्रसाद की तर्ज पर पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड में गांडेय के विधायक द्वारा दिये गये इस्तीफे के तहत उपचुनाव नहीं कराया जा सकता है। सेक्शन 151ए लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत अगर सामान्य चुनाव में एक साल से कम का समय शेष हो, तो उपचुनाव नहीं कराये जा सकते हैं।

कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट किया गया था कि अगर सामान्य चुनाव एक साल के अंदर होना हो, तो उपचुनाव नहीं कराये जा सकते हैं। 8 जनवरी 2023 को उच्चतम न्यायालय द्वारा बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश जिसमें एक साल की अवधि से कम समय रहने पर भी उपचुनाव कराने का आदेश दिया गया था, उसपर रोक लगा दी गयी है।

कहा कि झारखंड में विधानसभा चुनाव दिसंबर 2024 में है। सितंबर-अक्टूबर से प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जिस दिन विधानसभा क्षेत्र के नियुक्त रिटर्निंग अफसर चुनाव आयोग को विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित करके यह सार्वजनिक बता देता है कि किस दल से और कितने निर्दलीय विधायक निर्वाचित हुए हैं। वही तिथि विधायक के निर्वाचन की मानी जाती है।

सत्ताधारी गठबंधन जनता और चुनाव आयोग को दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। श्री मरांडी ने कहा कि राज्यपाल से उनके द्वारा भेजे गये पत्र को चुनाव आयोग को प्रेषित करने का अनुरोध भी किया है।

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