कार्मेल स्कूल: आरोप और उसके खंडन की गुत्थी सुलझाने की चुनौती
आरोप: प्रिंसिपल ने छात्राओं की शर्ट को उतरवाया, प्रिंसिपल : सभी आरोप निराधार
अभिभावक: बच्चियों पर दबाव बनाया, उनके आंसुओं से भी नहीं पसीजा स्कूल प्रबंधन का दिल, कह दिया: उतारो शर्ट
अभिभावक: हमारी बच्चियों की इज्जत नहीं है क्या? कैसे मेरी बेटी शर्म से घर आयी, एक पिता के लिए कितनी पीड़ा का विषय है
सवाल: आखिर इतने सारे अभिभावक अपनी बेटियों को लेकर झूठ क्यों बोलेंगे?
झारखंड की इमेज के लिए खतरनाक हैं कार्मेल स्कूल जैसी घटनाएं
छात्राओं की शर्ट उतरवा, इनर और ब्लेजर में घर भेजना, स्कूल प्रबंधन की दिमागी बीमारी को दर्शाता है
जांच तो हो रही है, लेकिन छात्राओं के आंसुओं को नजरअंदाज करना घातक होगा
प्रिंसिपल की भी सुनें, लेकिन गलत किया है, तो सजा तो मिलनी ही चाहिए, ध्यान दे जांच कमेटी
मम्मी आज मेरे लिए बटर टोस्ट और आॅमलेट बना दो, मैं वही स्कूल में लेकर जाऊंगी, ठीक है बेटी। मां सुबह-सुबह आधी नींद में उठती है, अपनी बेटी के लिए नाश्ता तैयार करती है, उसे स्कूल भेजती है। सभी काम छोड़ कर पिता मोटर साइकिल निकालता है, सबसे पहले अपनी बेटी को स्कूल छोड़ता है, या फिर बस में बिठा देता है। अब माता-पिता मानते हैं कि उन्होंने अपनी बच्ची को सबसे सुरक्षित स्कूल में भेजा है। लेकिन अगर शाम को उसी बच्ची के शरीर पर शर्ट न हो और वह इनर और ब्लेजर में घर पहुंचे तो उस माता-पिता पर क्या गुजरेगी। आप ही बताइये। अगर आप किसी बेटी के पिता हैं या मां हैं, अगर आप अपनी बेटी के साथ ऐसा अनुभव करेंगे, तो आप पर क्या गुजरेगी। जी हां, ऐसी घटना हुई है। यह कहना है उन अभिभावकों का, जिन्होंने अपनी बेटी को सिर्फ इनर और ब्लेजर में स्कूल से घर आते देखा है। क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसा भी कोई स्कूल हो सकता है, जो पेन डे मनाने पर छात्रों की कमीज उतरवा दे और उन्हें इनर और ब्लेजर में घर भेज दे। जी हां, ऐसा ही एक मामला झारखंड के धनबाद के डिगवाडीह स्थित कार्मेल स्कूल में सामने आया है। जैसे ही एक खबर आयी कि झारखंड के धनबाद में एक प्राइवेट स्कूल में करीब 100 छात्राओं की शर्ट्स उतरवायी गयी है और उन्हें बिना शर्ट ही घर भेज दिया गया, ऐसा लगा मानो ये कौन से हैवान झारखंड में पैदा हो गये, जिन्होंने ऐसा घिनौना काम किया है। कार्मेल स्कूल, डिगवाडीह की 20-25 छात्राओं के पैरेंट्स ने 11 जनवरी को डीसी माधवी मिश्रा से मुलाकात कर कार्मेल स्कूल, डिगवाडीह की प्रिंसिपल के खिलाफ शिकायत की थी। पैरेंट्स का आरोप है कि 9 जनवरी को छात्राओं की 10वीं क्लास का अंतिम दिन था। इस पल को यादगार बनाने के लिए बच्चियों ने स्कूल में पेन डे सेलिब्रेट किया। यानि कमीज पर लिख कुछ-कुछ अपनी फीलिंग्स को शेयर किया। एक दूसरे की शर्ट पर बधाई संदेश, मन के भाव और परीक्षा के लिए बेस्ट आफ लक लिखा। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है। हम लोग भी जब छोटे थे, तब हमने भी ऐसा कार्य किया है। पेन डे मनाने के क्रम में अचानक प्रिंसिपल देवाश्री वहां पहुंचीं, बच्चियों को डांटा, छात्राओं की शर्ट उतरवायी और कहा कि इनर वियर और ब्लेजर में ही घर जाओ। अगर ऐसा हुआ है, तो इससे घिनौना कार्य कुछ हो ही नहीं सकता। ऐसे स्कूलों पर ताला लगा देना चाहिए। ऐसी मानसिकता झारखंड की इमेज के लिए कितनी खतरनाक है। ऐसे स्कूल प्रबंधन के लोगों पर जितना हो सके कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। पूरे मामले में क्या कहना है छात्राओं, उनके अभिभावकों और प्रिंसिपल का बता रहे हैं आजाद सिपाही के विशेष संवाददाता राकेश सिंह।
प्रिंसिपल का कहना था शर्ट तो खोलना ही पड़ेगा: अभिभावक
कार्मेल स्कूल में पढ़ रही एक बच्ची के अभिभावक का कहना है कि मेरी बेटी पेन डे सेलिब्रेट कर रही थी, किसी ने प्रिंसिपल को कंप्लेन किया। उसके बाद प्रिंसिपल आयीं और कहा कि सब अपनी-अपनी शर्ट उतारो। उसके बाद दबाव देकर सभी की शर्ट को उतरवाया गया। छात्राओं ने प्रोटेस्ट किया कि वे अपनी शर्ट नहीं उतारेंगी। लेकिन फिर भी प्रिंसिपल का कहना था कि शर्ट तो खोलना ही पड़ेगा। आखिर में डर कर छात्राओं ने शर्ट उतार दिये। उनके साथ में खड़ीं कुछ अभिभावकों का कहना था कि क्लास 11 की लड़कियों को कहा गया कि इनका शर्ट उतार दो। अभिवावकों का कहना था कि कुछ लड़कियों के पास फोन भी थे, जो स्कूल में अलाउड नहीं हैं, शर्ट खोलने से पहले उनके फोन को सीज कर लिया गया। शर्ट उतरवाने के बाद कहा गया कि पैरेंट्स को कॉल करो, जब वे शर्ट लेकर आयेंगे, तब जाने देंगे नहीं तो नहीं जाने देंगे। कुछ बच्चे घबरा कर ऐसे ही घर चले गये, लेकिन कुछ बच्चियां वहीं रोने लगीं। अभिवावक ने कहा कि उनकी बेटी वहीं रोने लगी और टीचर से शर्ट छिन कर किसी तरह घर आयी। अभिभावकों का कहना था कि ये लडकियां सेक्शन 10 ए और 10 बी की थीं। वहीं एक पिता का कहना है कि क्या मेरी बेटी की इज्जत नहीं है क्या। कैसे मेरी बेटी का शर्ट उतरवाया गया। ब्लेजर से सब ढंक जाता है क्या। अगर स्कूल को कोई आॅब्जेक्शन होता तो पैरेंट्स को कॉल करना चाहिए था। लेकिन इसके बजाय मेरी बेटी का शर्ट खुलवा लिया गया और कहा गया कि ऐसे ही घर जाओ। उनका कहना था कि कैसे उनकी बेटी शर्म से घर आयी, एक पिता के लिए कितनी पीड़ा का विषय है। शर्ट खोलने के बाद एक पिता को अगर स्कूल बुलाया भी जायेगा तो क्या मैं अपनी बेटी को ऐसे देख पाऊंगा क्या। मेरी बेटी की दसवीं की परीक्षा है, मेंटली डिस्टर्ब हो गयी है वो। दिन भर मेरी बेटी रोयी थी उस दिन। हमारी मांग है प्रिंसिपल को हटाया जाये और अरेस्ट किया जाये।
ये सब झूठ है: प्रिंसिपल सिस्टर देवश्री
वहीं स्कूल की प्रिंसिपल सिस्टर देवश्री का कहना है कि मैंने छात्राओं को यह सब नहीं करने को कहा था, ना ही उन्हें शर्ट उतारने के लिए कहा। मैंने उनसे कहा कि आप लोग प्रॉपर यूनिफार्म में ही घर जायें, आस-पास नहीं घूमिये। उनका कहना है कि ये सभी आरोप निराधार हैं। गलत है।
धनबाद की डीसी एक्टिव
इस मामले का संज्ञान लेते हुए धनबाद की डीसी माधवी मिश्रा से इसकी लिखित शिकायत की गयी है। तत्काल डीसी ने एसडीएम राजेश कुमार और डीइओ निशु कुमारी को जांच के निर्देश दिये हैं। डीसी के निर्देश के बाद जिला, पुलिस प्रशासन एवं शिक्षा विभाग की टीम कार्मेल स्कूल डिगवाडीह पहुंची। डीसी माधवी मिश्रा ने कहा कि इस मामले को डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन ने बहुत गंभीरता से लिया है। जांच कमिटी जो भी फाइंडिंग्स प्रस्तुत करेगी, उसके आधार पर कार्रवाई की जायेगी। पैरेंट्स की जो भी 10वीं की परीक्षा के लिए चिंताएं हैं, उससे वे निश्चिंत हो जायें, बच्चियों को कोई दिक्कत आने नहीं दी जायेगी। हमारी टीम जांच करने कार्मेल स्कूल गयी हुई है, जरूरत पड़ने पर एफआइआर भी दर्ज की जायेगी।
जांच चल रही है
फिलहाल कार्मेल स्कूल की 10वीं की छात्राओं की शर्ट उतरवाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सोमवार को घटना की जांच के लिए दो अलग-अलग टीम स्कूल पहुंची। एसडीएम राजेश कुमार और जिला शिक्षा पदाधिकारी निशु कुमारी के नेतृत्व में पहली टीम ने जांच शुरू की। साथ ही, झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की टीम भी मौके पर पहुंच कर घटना की जांच में जुट गयी है। बच्चों के पैरेंट्स भी स्कूल में मौजूद थे। इधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ता स्कूल के मुख्य द्वार पर धरना पर बैठ गये हैं और जम कर नारेबाजी भी की। वे स्कूल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने और प्रिंसिपल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। स्थिति इतनी तनावपूर्ण रही कि डालसा की टीम को स्कूल में प्रवेश के लिए पैदल जाना पड़ा।
प्रिंसिपल का कमरा सील
झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच का निर्देश दिया है। धनबाद के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा के चेयरमैन वीरेंद्र कुमार तिवारी ने लीगल एंड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के आठ सदस्यों की जांच टीम बनायी है। टीम ने रविवार को भी पुलिस के साथ स्कूल में जाकर छानबीन की थी। उन्होंने छात्राओं, पैरेंट्स और स्कूल प्रबंधन से बातचीत भी की। सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को सुरक्षित रखने के लिए प्रिंसिपल के कमरे को सील कर दिया, जहां डीवीआर लगा है। इससे पहले, शनिवार को जिला प्रशासन की ओर से एसडीएम के नेतृत्व में गठित टीम भी जांच करने स्कूल गयी थी। मामले में झरिया के धर्मशाला रोड में प्राचार्य का पुतला भी जलाया गया।
इस स्कूल के बारे में मैंने कई बार शिकायत सुनी, लेकिन आज आंखों से भी देख लिया: रागिनी सिंह
वहीं झरिया की विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि एक महिला होकर महिला का अपमान कैसे कोई कर सकता है। उन्होंने डीसी से मुलाकात भी की। डीसी इस घटना से दुखी हैं। उन्होंने इस मामले में संज्ञान लिया है। आश्वासन दिया है कि कार्रवाई होगी। वैसे हम लोग डीसी की बातों से संतुष्ट हैं, लेकिन अगर कार्रवाई नहीं होती है, तो हम लोग न्याय के लिए लड़ेंगे। बच्चियों के साथ हम लोग खड़े हैं। आज हमारी बच्चियों के साथ जो कुछ हुआ है, कल यह फिर से नहीं हो इसके लिए आवाज उठाने की जरूरत है। उनका कहना है कि इस स्कूल के बारे में मैंने कई बार शिकायत सुनी है, लेकिन आज आंखों से भी देख लिया। हम लोग यह बर्दाश्त नहीं करेंगे।