रांची। झारखंड में बालू घाटों की नीलामी और उनके आवंटन को लेकर लंबे समय से चली आ रही कानूनी अड़चन अब समाप्त हो गई है। झारखंड उच्च न्यायालय ने पेसा कानून से जुड़ी अवमानना याचिका पर सुनवाई के बाद बालू घाटों के आवंटन पर पूर्व में लगाई गई रोक को हटा दिया है। इसके साथ ही राज्य में बालू घाटों की नीलामी के बाद आवंटन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और पंचायती राज विभाग की ओर से अदालत को जानकारी दी गई कि झारखंड में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी पेसा की नियमावली लागू कर दी गई है। इस पर संतोष जताते हुए उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका का निष्पादन कर दिया और पहले से जारी प्रतिबंध को समाप्त कर दिया।

यह अवमानना याचिका आदिवासी बुद्धिजीवी मंच की ओर से दायर की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार पेसा नियमावली लागू करने में विफल रही है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश महेश शरदचंद्र सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने पक्ष रखा, जबकि याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार ने दलीलें पेश कीं।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पेसा नियमावली लागू होने के बाद अब बालू घाटों के आवंटन से जुड़ी प्रक्रिया में कोई कानूनी बाधा नहीं रह गई है। न्यायालय ने इसे स्वीकार करते हुए पूर्व आदेश वापस ले लिया।

गौरतलब है कि पेसा कानून का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में अधिक अधिकार देना है। ऐसे में बालू घाटों के आवंटन से जुड़ा यह फैसला झारखंड में खनन और विकास गतिविधियों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

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