जमशेदपुर। एशिया के उपाध्यक्ष उद्योगपति देवांग गांधी के 24 वर्षीय बेटे कैरव गांधी के चर्चित अपहरण कांड को बिहार के उभरते “सिंह साहब गिरोह” ने पूरे 10 करोड़ रुपये की फिरौती के लिए अंजाम दिया था। जमशेदपुर पुलिस ने कैरव को सकुशल बरामद करने के साथ ही गिरोह के सरगना बिहार के गयाजी के “सिंह साहब” समेत कुल सात अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। अपहरण में प्रयुक्त फर्जी नंबर और पुलिस स्टीकर वाली सादे रंग की स्कॉर्पियो, कैरव के शिफ्टिंग के दौरान उपयोग की गई एक अन्य व्हाइट स्कॉर्पियो, कई पिस्टल, कारतूस, आठ मोबाइल फोन और 56 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा जमशेदपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे कांड का उद्भेदन करेंगी। तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर पुलिस ने यह पूरी कार्रवाई की है।

बॉर्डर पर दबिश, स्कॉर्पियो से बाहर धकेला गया कैरव
पुलिस सूत्रों के अनुसार, 26-27 जनवरी की मध्य रात्रि को जब कैरव को बिहार से झारखंड शिफ्ट किया जा रहा था, तब पुलिस ने चौपारण-बरही के बीच अपहरणकर्ताओं पर दबिश बना ली थी। सादे लिबास में पुलिस की दो गाड़ियों ने अपहरणकर्ताओं की व्हाइट स्कॉर्पियो को आगे-पीछे से घेर लिया। घबराकर अपहरणकर्ताओं ने कैरव को पिछली सीट से बाहर धकेल दिया और भागने का प्रयास किया, लेकिन चारों ओर से घिरे अपराधी असफल रहे। पुलिस ने मौके से तीन अपहरणकर्ताओं को धर-दबोचा और उन्हें जमशेदपुर लेकर पूछताछ की।

मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए पुलिस ने गढ़ी कहानी
कैरव की बरामदगी के बाद पुलिस की प्राथमिकता मास्टरमाइंड तक पहुंचना थी। पुलिस ने अपराधियों के पकड़े जाने की बात मीडिया से छिपाई। पकड़े गए अपराधियों के निशानदेही पर मंगलवार देर रात जमशेदपुर पुलिस ने बिहार के नालंदा, गया और औरंगाबाद में छापेमारी की। गयाजी के बुनियादगंज थाना क्षेत्र के सोंधी गांव से उपेंद्र सिंह (50) और अर्जुन सिंह (28), नालंदा के इस्लामपुर से गुड्डू सिंह को गिरफ्तार किया गया। चार अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है। आरोपियों में उपेंद्र सिंह और गुड्डू सिंह अपहरण, बैंक लूट और अवैध शराब कारोबार में जेल जा चुके हैं। अर्जुन सिंह अति महत्वकांक्षी है और कम समय में ज्यादा पैसे कमाने की लालच में अपराध करता है।

सप्ताह भर रेकी, बिहार के कई ठिकानों पर रखा गया कैरव
अपहरणकर्ताओं ने एक सप्ताह तक कैरव की रेकी की थी। फर्जी नंबर प्लेट और पुलिस स्टीकर वाली स्कॉर्पियो का उपयोग करके कैरव को शक न हो इसलिए योजना बनाई। 13 जनवरी की दोपहर सर्किट हाउस से 500 मीटर की दूरी पर कदमा-सोनारी लिंक रोड से अपहरण किया गया। इसके बाद कैरव को गयाजी और नालंदा के कई ठिकानों पर एक कमरे में बंद रखा गया। अपहरणकर्ता कैरव की पसंद पूछकर खाना देते थे, लेकिन डर से वह कम और सादा खाना ही खाते थे। पीने के लिए सिर्फ मिनरल वाटर दिया जाता था।

डाइवर्जन टैक्टिस को भेदने के लिए पुलिस की रणनीति
अपहरणकर्ताओं ने पुलिस को उलझाने के लिए कैरव की कार चांडिल के कांदरबेड़ा में और मोबाइल की अंतिम लोकेशन सोनारी के आदर्श नगर में ट्रेस कराई। लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी में रांची-टाटा हाईवे पर एक होटल में फर्जी नंबर वाली व्हाइट स्कॉर्पियो देखी। साइबर सेल ने एक्टिव नेटवर्क, कॉल डेटा और डंप का विश्लेषण कर अपराधियों तक पहुंचने की कोशिश की। पुलिस को डर था कि दबिश बनाने पर अपहरणकर्ता कैरव को नुकसान न पहुंचा दें, इसलिए सही वक्त का इंतजार किया गया।

इंडोनेशियाई नंबर को ट्रेस करने के लिए दिल्ली-पंजाब से मदद
अपराधियों ने मोबाइल नेटवर्क के बजाय VOIP तकनीक का इस्तेमाल किया। कैरव के पिता और चाचा को वर्चुअल नंबर +62-831-94765544 से फिरौती के लिए कॉल आया। VOIP कॉल को ट्रेस करने के लिए दिल्ली और पंजाब के हाई लेवल टेक्निकल इंटेलिजेंस से संपर्क साधा गया। जांच में सामने आया कि यह बर्नर नंबर था, जो सिर्फ इस अपहरण के लिए खरीदा गया और काम होते ही डिजिटल रूप से डिलीट कर दिया गया।

परिजनों ने कराई मेडिकल जांच
पुलिस स्वयं कैरव को लेकर जमशेदपुर पहुंची और परिजनों के अनुरोध पर उन्हें उनके आवास ले जाया गया। फैमिली डॉक्टर से ब्लड और यूरिन की जांच कराई गई, जिसमें सब कुछ नॉर्मल पाया गया। पुलिस के अनुसार कैरव के साथ कोई मारपीट या टॉर्चर नहीं किया गया, हालांकि वह ट्रॉमा में थे। अब वे पूरी तरह सामान्य हो चुके हैं।

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